मध्य प्रदेशराज्‍य

ईवी बैटरी, स्वच्छ ऊर्जा, इलेक्ट्रॉनिक्स और रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता का लक्ष्य होगा साकार

By Admin|04 Jul 2026, 9:01 PM
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भोपाल 

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मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि खनिज संपदा की प्रचुरता और निवेश अनुकूल नीतियों से मध्यप्रदेश देश की औद्योगिक प्रगति में अहम भूमिका निभा रहा है। इससे राज्य की अर्थव्यवस्था मजबूत होगी और प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के आत्मनिर्भर भारत मिशन को भी बल मिलेगा। बैतूल से आलीराजपुर तक फैली खनिज बेल्ट में उच्च गुणवत्ता वाले ग्रेफाइट के विशाल भंडार मिलने से प्रदेश देश के उभरते 'क्रिटिकल मिनरल हब' के रूप में तेजी से विकसित हो रहा है। इस बेल्ट में हाई फिक्स्ड कार्बन और उत्कृष्ट फ्लेकी गुणवत्ता वाला ग्रेफाइट पाया गया है। इसे इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी), ऊर्जा भंडारण, इलेक्ट्रॉनिक्स और रक्षा उद्योगों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। यह खोज मध्यप्रदेश को भविष्य की हरित अर्थव्यवस्था का प्रमुख केंद्र बनाने के साथ देश को हरित ऊर्जा एवं ऊर्जा भंडारण के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

उच्च गुणवत्ता वाला ग्रेफाइट, औद्योगिक विकास का नया आधार

प्रदेश ग्रेफाइट संसाधनों में देश के अग्रणी राज्यों में शामिल है। प्रदेश के बैतूल, आलीराजपुर और सीधी जिलों में उच्च गुणवत्ता वाले ग्रेफाइट के विशाल भंडार चिन्हित किए गए हैं। इन क्षेत्रों से प्राप्त ग्रेफाइट में उच्च स्थिर कार्बन की मात्रा होने के कारण यह इलेक्ट्रोड निर्माण, बैटरी उद्योग तथा अन्य उच्च तकनीकी औद्योगिक उपयोगों के लिए अत्यंत उपयुक्त माना जाता है।

भारतीय भू-वैज्ञानिक सर्वेक्षण (जीएसआई) ने अकेले बैतूल जिले में लगभग 11 मिलियन मीट्रिक टन ग्रेफाइट संसाधनों का अनुमान लगाया है। बैतूल जिले के चिखलार, गौठाना और गोलीघाट क्षेत्र प्रमुख ग्रेफाइट ब्लॉकों के रूप में उभरकर सामने आए हैं।

कोल इंडिया के प्रवेश से व्यावसायिक खनन को मिलेगी गति

प्रदेश में ग्रेफाइट खनन के क्षेत्र में बड़ा परिवर्तन तब आया जब सार्वजनिक क्षेत्र की अग्रणी कंपनी कोल इंडिया लिमिटेड (CIL) ने गैर-कोयला खनन क्षेत्र में प्रवेश करते हुए आलीराजपुर जिले के खट्टाली छोटी ग्रेफाइट ब्लॉक का अधिग्रहण किया। इससे प्रदेश में बड़े स्तर पर व्यावसायिक ग्रेफाइट खनन का मार्ग प्रशस्त हुआ। विशेषज्ञों के अनुसार बैतूल क्षेत्र के ग्रेफाइट शिस्ट में वेनेडियम जैसे महत्वपूर्ण क्रिटिकल मिनरल मिलने की भी संभावना है। इससे यह क्षेत्र देश के सबसे महत्वपूर्ण बहु-खनिज क्षेत्रों में शामिल हो जाएगा।

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ईवी क्रांति का बनेगा सशक्त आधार

ग्रेफाइट लिथियम-आयन बैटरियों के एनोड निर्माण का प्रमुख कच्चा माल है। विश्वभर में इलेक्ट्रिक वाहनों और ऊर्जा भंडारण प्रणालियों की बढ़ती मांग के कारण इसकी आवश्यकता लगातार बढ़ रही है। प्रदेश में मिल रहा उच्च गुणवत्ता वाला ग्रेफाइट ईवी उद्योग को गति देगा, ऊर्जा भंडारण परियोजनाओं को सशक्त बनायेगा और पवन एवं सौर ऊर्जा परियोजनाओं के लिए बैटरी निर्माण में सहायक बनेगा। इसके साथ ही रक्षा और इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योगों को भी घरेलू स्तर पर कच्चा माल उपलब्ध कराएगा। इसके परिणाम स्वरूप ग्रेफाइट के आयात पर देश की निर्भरता में उल्लेखनीय कमी आएगी।

आयात निर्भरता होगी कम

वर्तमान में भारत अपनी ग्रेफाइट आवश्यकताओं का अधिकांश आयात करता है। मध्यप्रदेश में बड़े स्तर पर खनन प्रारंभ होने से आयात पर निर्भरता में उल्लेखनीय कमी आएगी तथा विदेशी मुद्रा की बचत होगी। यह पहल 'आत्मनिर्भर भारत' अभियान को भी नई मजबूती प्रदान करेगी।

आदिवासी क्षेत्रों में बढ़ेंगे रोजगार के अवसर

बैतूल, आलीराजपुर तथा आस-पास के आदिवासी एवं पिछड़े क्षेत्रों में ग्रेफाइट आधारित उद्योगों, प्रसंस्करण इकाइयों तथा रिफाइनरी परियोजनाओं की स्थापना से स्थानीय स्तर पर हजारों प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रोजगार अवसर सृजित होने की संभावना है। इससे क्षेत्रीय आर्थिक विकास को नई गति मिलेगी और स्थानीय युवाओं को रोजगार के बेहतर अवसर उपलब्ध होंगे।

कम लागत वाले खनन और उद्योगों की अपार संभावनाएं

प्रदेश में उपलब्ध उच्च गुणवत्ता वाले ग्रेफाइट के कारण कम लागत पर खनन संभव होगा। इसके साथ ही राज्य में कम लागत वाले इलेक्ट्रोड निर्माण उद्योग विकसित किए जा सकेंगे। इससे प्रदेश राष्ट्रीय बैटरी एवं इलेक्ट्रॉनिक विनिर्माण पारिस्थितिकी तंत्र (ईकोसिस्टम) में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकेगा।

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खनिज संपदा से समृद्ध मध्यप्रदेश

मध्यप्रदेश देश के सबसे समृद्ध खनिज राज्यों में शामिल है। प्रदेश देश के 26 प्रतिशत मैंगनीज अयस्क भंडार के साथ सबसे बड़ा उत्पादक राज्य, 73 प्रतिशत तांबा अयस्क भंडार के साथ अग्रणी राज्य, चूना पत्थर उत्पादन में देश का दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक, कोयला उत्पादन में देश का चौथा सबसे बड़ा उत्पादक और देश का एकमात्र हीरा उत्पादक राज्य है। हीरा, तांबा, कोयला, मैंगनीज, चूना पत्थर, स्वर्ण अयस्क, डोलोमाइट, ग्रेफाइट तथा अन्य महत्वपूर्ण खनिजों की उपलब्धता प्रदेश को देश के प्रमुख औद्योगिक निवेश गंतव्य के रूप में स्थापित कर रही है।

कटनी बन रहा है माइनिंग एवं औद्योगिक हब

मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में कटनी जिला भी तेजी से देश के प्रमुख माइनिंग हब के रूप में विकसित हो रहा है। यहां स्वर्ण अयस्क, डोलोमाइट, तांबा, लेड, जिंक और चांदी जैसे बहुमूल्य खनिजों के विशाल भंडार सामने आए हैं। स्वर्ण अयस्क क्षेत्र के विकास के लिए खनन लीज प्रदान की जा चुकी है और बड़वारा क्षेत्र में डोलोमाइट ब्लॉकों का विकास भी जारी है। 'माइनिंग कॉन्क्लेव 2.0' में प्रदेश को ₹56,414 करोड़ से अधिक के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए, जिससे खनिज आधारित उद्योगों का तेजी से विस्तार होने की संभावना बलवती हुई है।

रेयर अर्थ मिनरल्स की खोज से बढ़ी संभावनाएं

प्रदेश में रेयर अर्थ मिनरल्स की खोज भी तेज हो गई है। खनिज संसाधन विभाग और भारतीय विज्ञान शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान (आईआईएसईआर) के सहयोग से कटनी एवं जबलपुर सहित विभिन्न जिलों के खनिज नमूनों का वैज्ञानिक परीक्षण किया जा रहा है। इस पहल से रणनीतिक महत्व के नए खनिज भंडारों की पहचान, वैज्ञानिक डेटा संग्रहण तथा भविष्य की खनिज अन्वेषण योजनाओं को नई दिशा मिलेगी।

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सिंगरौली में रेयर अर्थ एलिमेंट्स की खोज

प्रदेश के सिंगरौली जिले में रेयर अर्थ एलिमेंट्स (आरईई) की महत्वपूर्ण उपलब्धता भी सामने आई है। इन तत्वों का उपयोग रक्षा उपकरणों, सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रिक वाहन, पवन ऊर्जा, उच्च क्षमता वाले मैग्नेट, मेडिकल उपकरण तथा अंतरिक्ष तकनीक में किया जाता है। यह खोज भारत की चीन सहित दूसरे देशों पर निर्भरता कम करने की दिशा में महत्वपूर्ण सिद्ध होगी।

डिजिटल माइनिंग की दिशा में अग्रणी मध्यप्रदेश

प्रदेश सरकार खनन क्षेत्र में आधुनिक तकनीकों को तेजी से लागू कर रही है। आईआईटी (आईएसएम) धनबाद के टेक्समिन फाउंडेशन, भू-विज्ञान एवं खनिज निदेशालय तथा मध्यप्रदेश राज्य खनिज निगम के बीच हुए समझौते के तहत जीआईएस आधारित डिजिटल मिनरल डेटाबेस विकसित किया जा रहा है, एआई आधारित माइनिंग मैनेजमेंट सिस्टम लागू किए जा रहे हैं, ब्लॉकचेन आधारित मॉनिटरिंग से पारदर्शिता बढ़ाई जा रही है, आधुनिक तकनीक आधारित कौशल विकास कार्यक्रम संचालित किये जा रहे हैं और पर्यावरण-अनुकूल एवं सस्टेनेबल माइनिंग को बढ़ावा दिया जा रहा है।

आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में प्रदेश की भूमिका महत्वपूर्ण

उच्च गुणवत्ता वाले ग्रेफाइट, स्वर्ण, रेयर अर्थ मिनरल्स, तांबा, मैंगनीज, कोयला, डोलोमाइट तथा अन्य बहुमूल्य खनिजों की उपलब्धता, आधुनिक तकनीक आधारित खनन व्यवस्था, वैज्ञानिक अन्वेषण, बड़े निवेश और औद्योगिक नीतियों के प्रभावी क्रियान्वयन के कारण मध्यप्रदेश देश के सबसे महत्वपूर्ण खनिज एवं औद्योगिक राज्यों में तेजी से उभर रहा है।

बैतूल से अलीराजपुर तक फैली ग्रेफाइट बेल्ट की खोज केवल एक खनिज उपलब्धि नहीं, बल्कि भारत की ऊर्जा सुरक्षा, हरित अर्थव्यवस्था, इलेक्ट्रिक वाहन उद्योग, रणनीतिक खनिज आत्मनिर्भरता और स्थानीय रोजगार सृजन की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर सिद्ध हो रही है। आने वाले वर्षों में यह क्षेत्र न केवल मध्यप्रदेश, बल्कि पूरे देश के क्रिटिकल मिनरल, एडवांस्ड मटेरियल एवं हरित औद्योगिक विकास का प्रमुख केंद्र बनने की क्षमता रखता है।

 

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