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राजनांदगांव : धान के कटोरा गीत ने डॉ. जीवन यदु को प्रदेश में दिलाई विशेष पहचान…

By kadwaghut|31 Aug 2026, 10:44 AM
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राजनांदगांव , छत्तीसगढ़ी की माटी, किसान-मजदूर और लोकजीवन की पीड़ा को अपनी कलम की आवाज बनाने वाले कवि-साहित्यकार डॉ. जीवन यदु की रचना पर खैरागढ़ में साहित्यकारों ने चर्चा की। छत्तीसगढ़ साहित्य सृजन समिति और राष्ट्रीय कवि संगम के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित कार्यक्रम में कवियों और साहित्यकारों ने लंबे समय से अस्वस्थ चल रहे डॉ. जीवन यदु के निवास स्थान पर पहुंचकर श़ॉल, स्मृति चिन्ह और श्रीफल भेंट कर सम्मान किया।

साहित्यकार आत्माराम कोशा ने कहा कि छत्तीसगढ़ ल कहि थे भैया धान के कटोरा, लछमी दाई के कोरा जैसे गीतों ने डॉ. यदु को छत्तीसगढ़ की माटी में अमर कर दिया। सम्मान से अभिभूत हुए डॉ. जीवन यदु ने कवियों का स्वागत करते हुए कहा बहुत लिखेंव… अब हाथ कांपथे संगवारी हो। इस भावुक क्षण ने कार्यक्रम में मौजूद साहित्यकारों को भावविभोर किया। कवि करिश्मा श्रीवास्तव, भावेश देशमुख, पवन यादव, आनंद राम, मदन मंडावी सहित साहित्यकारों ने आशीर्वाद लिया। लखनलाल साहू, फकीर साहू, दूजराम साहू, तुलेश्वर सेन, गुनीराम बोधन चंदेल, रवि यादव, डोरेलाल साहू, मानसिंह मौलिक, रूपेश देवांगन मौजूद रहे।

यदु को बड़ा लेखक, कवि और गीतकार भी बताया कार्यक्रम का शुभारंभ अतिथियों द्वारा मां सरस्वती के पूजन और कवि पद्मा साहू की सरस्वती वंदना से हुआ। कार्यक्रम की अध्यक्षता छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग के जिला समन्वयक एवं साहित्य समिति के संरक्षक आत्माराम कोशा ने की। विनय शरण सिंह और डॉ. मांगी लाल यादव मुख्य वक्ता एवं विशेष अतिथि रहे। डॉ. मांगी लाल यादव ने डॉ. जीवन यदु को हिंदी और छत्तीसगढ़ी के बड़े लेखक, कवि और गीतकार के रूप में रेखांकित किया।

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किसान-मजदूर के संघर्ष शोषण पर बेबाक लेखनी डॉ. यदु पर शोध कर रहे शोधार्थी धर्मेंद्र जंघेल ने उनके साहित्यिक जीवन के एक रोचक प्रसंग का उल्लेख करते हुए बताया कि एक हमनाम रचनाकार द्वारा तखल्लुस अपना लिए जाने के बाद डॉ. यदु ने उपनाम का उपयोग करना बंद कर दिया था। विनय शरण सिंह ने कहा कि प्रगतिशील विचारधारा से जुड़े डॉ. यदु की कलम ने विभिन्न विषयों को छुआ, लेकिन किसान और मजदूर के संघर्ष, शोषण के सवालों पर उनकी लेखनी हमेशा बेबाक रही। संस्मरण भी बताए।

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