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बाघों की मौत पर MP High Court सख्त, NTCA ने स्वीकारा- कई मामलों में शिकार का साया

By Admin|27 Jun 2026, 3:12 PM
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 जबलपुर
 देशभर में बाघों की लगातार हो रही अप्राकृतिक मौतों के बीच राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (एनटीसीए) ने हाई कोर्ट के समक्ष एक महत्वपूर्ण और दूरगामी प्रभाव वाली स्वीकारोक्ति की है।

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अप्राकृतिक मौतों में अवैध शिकार प्रमुख कारण
अदालत में दायर हलफनामे में एनटीसीए ने स्पष्ट रूप से माना है कि संरक्षित बाघ अभ्यारण्यों तथा उनके आसपास बाघों की हालिया अप्राकृतिक मौतों में अवैध शिकार प्रमुख कारणों में से एक है।

स्वयं शीर्ष संरक्षण संस्था ने शिकार की गंभीरता को रेखांकित किया
यह स्वीकारोक्ति इसलिए भी अहम मानी जा रही है क्योंकि अब तक बाघों की मौतों को लेकर विभिन्न कारण सामने आते रहे थे, लेकिन कोर्ट के समक्ष स्वयं शीर्ष संरक्षण संस्था ने शिकार की गंभीरता को रेखांकित किया है।

संदिग्ध मौतों की न्यायिक समीक्षा की मांग की थी
कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश विवेक रूसिया की अध्यक्षता वाली की युगलपीठ के समक्ष यह हलफनामा उस जनहित याचिका के जवाब में प्रस्तुत किया गया, जिसे वन्यजीव कार्यकर्ता अजय दुबे ने दायर कर बाघ अभ्यारण्यों के भीतर और आसपास लगातार हो रही संदिग्ध मौतों की न्यायिक समीक्षा की मांग की थी। याचिका में दावा किया गया था कि अनेक मामलों में मौतें संगठित शिकार का परिणाम हैं।

भारतीय बाघों के अस्तित्व के लिए सबसे गंभीर खतर
एनटीसीए ने अपने जवाब में कहा कि देश के बाहर बाघों के अंगों और उनसे निर्मित उत्पादों की अवैध मांग आज भी भारतीय बाघों के अस्तित्व के लिए सबसे गंभीर खतरों में शामिल है। यही कारण है कि इस चुनौती को प्राधिकरण ने अपनी सर्वोच्च संरक्षण प्राथमिकताओं में रखा है।

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राज्यों को लगातार अलर्ट जारी किए जा रहा है
हलफनामे के अनुसार शिकार और वन्यजीव तस्करी के नेटवर्क पर अंकुश लगाने के लिए राज्यों को लगातार अलर्ट जारी किए जा रहे हैं तथा सीबीआई, वन्यजीव अपराध नियंत्रण ब्यूरो, डब्ल्यूसीसीबी और संबंधित राज्यों की पुलिस के साथ समन्वित अभियान संचालित किए जा रहे हैं।

अब हाई कोर्ट की निगाह केवल इस स्वीकारोक्ति पर नहीं
मामले की अगली सुनवाई में अब हाई कोर्ट की निगाह केवल इस स्वीकारोक्ति पर नहीं, बल्कि इस पर भी रहेगी कि देश के राष्ट्रीय पशु की सुरक्षा के लिए घोषित रणनीतियां धरातल पर कितनी प्रभावी सिद्ध होती हैं।

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