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राजस्थान सरकार का बड़ा फैसला, 15 साल में सबसे बड़ा नगरीय विस्तार

By Admin|26 Jun 2026, 10:01 PM
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जयपुर
राजस्थान की राजनीति और प्रशासन में अक्सर बड़े फैसलों की चर्चा होती है, लेकिन इस बार जो हुआ, उसने सिर्फ सरकारी फाइलों का वजन नहीं बढ़ाया, बल्कि उन लाखों लोगों की उम्मीदों को भी नया पता दे दिया, जो वर्षों से अपने कस्बे को शहर बनते देखने का इंतजार कर रहे थे।

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कस्बों से शहर बनने का सफर
सोचिए… एक छोटा कस्बा, जहां सड़कें तो हैं लेकिन शहर जैसी व्यवस्था नहीं। जहां आबादी बढ़ती रही, बाजार फैलते रहे, मकान ऊंचे होते गए, लेकिन सरकारी सुविधाएं वहीं की वहीं अटकी रहीं। अब यही कस्बे नगर पालिका बनने जा रहे हैं। यानी अब इनके पास अपना प्रशासन होगा, अपने विकास की रफ्तार होगी और योजनाओं को जमीन तक पहुंचाने का अलग तंत्र होगा।

15 साल का सबसे बड़ा नगरीय विस्तार
राजस्थान सरकार ने प्रदेश में 76 नई नगरपालिकाओं के गठन को मंजूरी देकर पिछले 15 साल का सबसे बड़ा नगरीय विस्तार कर दिया है। इस फैसले के बाद राज्य में नगरीय निकायों की संख्या 309 से बढ़कर 385 हो जाएगी। इसके साथ ही इन नए निकायों के प्रशासनिक संचालन के लिए 684 नए पदों का भी सृजन किया गया है। यह सिर्फ एक सरकारी आदेश नहीं, बल्कि उन इलाकों के लिए नई शुरुआत माना जा रहा है, जो लंबे समय से शहर जैसी सुविधाओं की मांग कर रहे थे।

सबसे ज्यादा फायदा किन जिलों को?
सबसे दिलचस्प बात यह है कि इस विस्तार का सबसे बड़ा फायदा जयपुर और झुंझुनूं को मिला है। दोनों जिलों में सात-सात नई नगरपालिकाओं का गठन किया गया है। जयपुर जिले में वाटिका, जमवारामगढ़, फागी, गट्टू, कानोता, खेजरोली और कालाडेरा को नगर पालिका का दर्जा मिला है। वहीं झुंझुनूं में सिंघाना, डूंडलोद, जाखल, सुलताना, बुहाना, मलसीसर और मण्ड्रेला अब नए शहरी निकायों के रूप में पहचान बनाएंगे।

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इन जिलों की भी बदलेगी तस्वीर
दौसा, अलवर और टोंक में चार-चार नई नगरपालिकाएं बनाई गई हैं। अजमेर, बाड़मेर और बालोतरा में तीन-तीन नए निकाय बने हैं। इसके अलावा सीकर, बूंदी, जालौर, नागौर, बीकानेर, धौलपुर, करौली, उदयपुर, श्रीगंगानगर, कोटा, बारां, पाली, चूरू, प्रतापगढ़, सिरोही और कई अन्य जिलों के कस्बों को भी नगर पालिका का दर्जा देकर विकास की नई कतार में खड़ा कर दिया गया है।

आम लोगों की जिंदगी में क्या बदलेगा?
असल बदलाव अब इन कस्बों की तस्वीर में दिखाई देगा। नगर पालिका बनने के बाद स्थानीय स्तर पर सफाई व्यवस्था, सड़क निर्माण, स्ट्रीट लाइट, पेयजल, नालियां, कचरा प्रबंधन और शहरी योजनाओं को लागू करना पहले की तुलना में ज्यादा व्यवस्थित हो सकेगा। लंबे समय से गांव और शहर के बीच झूल रहे इन इलाकों को अब अपनी अलग प्रशासनिक पहचान मिलेगी।

684 नई नौकरियों का रास्ता खुला
सरकार ने सिर्फ नगरपालिकाओं की घोषणा कर औपचारिकता पूरी नहीं की, बल्कि इनके संचालन के लिए 684 नए पदों को भी मंजूरी दी है। हर नई नगर पालिका में एक अधिशासी अधिकारी, सहायक राजस्व निरीक्षक, कनिष्ठ अभियंता (सिविल), कनिष्ठ लेखाकार, ठोस कचरा प्रबंधक (स्वास्थ्य निरीक्षक), वरिष्ठ प्रारूपकार, वरिष्ठ सहायक और दो कनिष्ठ सहायकों के पद स्वीकृत किए गए हैं। यानी नए निकाय शुरुआत से ही प्रशासनिक ढांचे के साथ काम करेंगे।

युवाओं के लिए क्यों है बड़ी खबर?
इन पदों का एक और बड़ा असर युवाओं पर पड़ेगा। पिछले तीन वर्षों में स्वायत्त शासन विभाग में पहली बार इतनी बड़ी भर्ती का रास्ता खुला है। लंबे समय से सरकारी नौकरियों का इंतजार कर रहे युवाओं के लिए यह फैसला रोजगार की नई उम्मीद भी लेकर आया है।

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आउटसोर्सिंग पर भी बड़ा फैसला
सरकार ने एक और महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। पहले से गठित छह नगरपालिकाओं में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी, चौकीदार, सफाई जमादार और सफाई कर्मचारियों की आउटसोर्सिंग व्यवस्था को तत्काल प्रभाव से समाप्त कर दिया गया है। इन निकायों के लिए पहले स्वीकृत 54 पदों से जुड़ी व्यवस्था भी निरस्त कर दी गई है। इससे संकेत मिलता है कि सरकार अब नगरीय निकायों की प्रशासनिक संरचना को नए सिरे से व्यवस्थित करना चाहती है।

आगे क्या बदलेगा?
राजस्थान के तेजी से बढ़ते कस्बों के लिए यह फैसला सिर्फ सीमा बदलने का नहीं, बल्कि पहचान बदलने का है। जिन इलाकों में लोग वर्षों से बेहतर सड़क, नियमित सफाई, व्यवस्थित विकास और मजबूत स्थानीय प्रशासन की मांग कर रहे थे, वहां अब बदलाव की घड़ी शुरू हो चुकी है। आने वाले समय में यह फैसला जमीन पर कितना असर दिखाता है, इस पर पूरे प्रदेश की नजर रहेगी।

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