मध्य प्रदेशराज्‍य

युवाओं को अधिक अवसर मिलना जरूरी, राज्यपाल पटेल बोले- यही विकसित भारत की नींव

By Admin|25 Jun 2026, 6:07 PM
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विकसित भारत के निर्माण में युवाओं को मिले अधिक से अधिक अवसर : राज्यपाल पटेल

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विद्यार्थियों में कौशल, योग और सामाजिक सरोकार करें विकसित  
विश्वविद्यालय समन्वय समिति की 102वीं बैठक लोकभवन में

भोपाल

राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की विकसित भारत@2047 की संकल्पना को साकार करने की दिशा में प्रदेश के युवाओं की सहभागिता सुनिश्चित करने के लिए विश्वविद्यालयों द्वारा अधिक से अधिक अवसर उपलब्ध कराये जाने चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी वर्ष 2047 में भारत को विकसित राष्ट्र के रूप में स्थापित करने के लिये सभी वर्गों से सतत् विचार-विमर्श करते रहे है जिसमें युवा भी शामिल है। विश्वविद्यालयों का दायित्व है कि विद्यार्थियों में राष्ट्र निर्माण के जज्बे को और अधिक सुदृढ़ करने में अपना सक्रिय योगदान दें। राज्यपाल पटेल गुरूवार को लोकभवन में आयोजित विश्वविद्यालय समन्वय समिति की 102वीं बैठक को संबोधित कर रहे थे। बैठक में शासकीय एवं निजी विश्वविद्यालयों के संचालन एवं समन्वय संबंधी विभिन्न विषयों की समीक्षा की गई।

राज्यपाल पटेल ने विश्वविद्यालयों को सेवायोजित पूर्व विद्यार्थियों के लिए प्रत्येक 2 वर्ष में प्लेसमेंट सम्मेलन आयोजित करने की सलाह दी है। प्लेसमेंट सम्मेलन में वर्तमान छात्र-छात्राओं को प्रेरणा और मार्गदर्शन मिलेगा। विश्वविद्यालय का गौरव भी बढ़ेगा। उन्होंने अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस पर विश्व के लगभग 200 देशों में किये गये योगाभ्यास से योग की वैश्विक स्वीकार्यता का उल्लेख करते हुए कहा कि विश्वविद्यालयों को योग को नियमित गतिविधियों को मासिक साप्ताहिक आयोजन के क्रम में शुरू करना चाहिए। इसकी शुरुआत छात्रावासों से की जा सकती है। उन्होंने रोजगारोन्मुखी प्रमाण-पत्र एवं डिप्लोमा पाठ्यक्रमों को गरीब एवं वंचित परिवारों की आत्मनिर्भरता में व्यवहारिक पहल बताया। कृषि संबद्ध विभिन्न कार्यों के लिए भी प्रमाणन व्यवस्था विकसित किए जाने पर बल दिया।

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राज्यपाल पटेल ने कहा कि माता-पिता अपने बच्चों के भविष्य को उज्ज्वल बनाने के विश्वास के साथ उन्हें विश्वविद्यालयों में शिक्षा ग्रहण करने भेजते हैं। इस विश्वास को बनाये रखना कुलगुरुओं और प्राध्यापकों की जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को ज्ञान और कौशल के साथ सामाजिक संवेदनशीलता से भी जोड़ना जरूरी है। विश्वविद्यालय गाँव को गोद लेकर ग्रामीणों के साथ संवाद और विकास गतिविधियों में विद्यार्थियों को सहभागी बनाएं। पिछड़े समुदायों एवं क्षेत्रों के विकास की अभूतपूर्व योजना पीएम-जनमन, धरती आबा ग्राम उत्कर्ष योजना के बेहतर क्रियान्वयन के लिए विद्यार्थियों को भी जोड़े। महाविद्यालयीन और विश्वविद्यालयीन छात्रों को गाँवों का भ्रमण करवाएं। इससे प्राप्त अनुभव विद्यार्थियों को भावी जीवन में वंचित और गरीब वर्गों के प्रति संवेदनशील बनाएगा।

उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार ने विश्वविद्यालयों द्वारा वित्तीय प्रबंधन को व्यवस्थित करने पर विशेष बल दिया। उन्होंने कहा कि वित्तीय प्रावधानों और निर्देशों का उल्लंघन गंभीर अनियमितता है। कुलगुरू वित्तीय निर्देशों की सीमा का कड़ाई से पालन करें। मंत्री परमार ने कहा कि कॉमन पोर्टल के माध्यम से एकीकृत ई-प्रवेश प्रक्रिया से जुड़ना निजी विश्वविद्यालयों के लिए स्वैच्छिक है, किन्तु विश्वविद्यालय में प्रवेश होने की सूचना आयोग के पोर्टल पर प्रदर्शित होने की ऑटोमेडेट व्यवस्था की जाना अनिवार्य है।

बैठक में अपर मुख्य सचिव उच्च शिक्षा अनुपम राजन, राज्यपाल के प्रमुख सचिव डॉ. नवनीत मोहन कोठारी, आयुक्त उच्च शिक्षा प्रबल सिपाहा, राज्यपाल के उप सचिव सुनील दुबे, शासकीय एवं निजी विश्वविद्यालयों के कुलगुरू, लोकभवन एवं उच्च शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

 

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