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MRP से ज्यादा वसूली पर बड़ा फैसला, भोपाल के होटल रेडिसन को ग्राहक को लौटाने होंगे ₹8,000

By Admin|25 Jun 2026, 3:52 PM
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भोपाल

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60 रुपए की पानी की बोतल पर 175 रुपए वसूलने वाले भोपाल के एक बड़े होटल पर उपभोक्ता आयोग का फैसला आया है। आयोग ने माना कि होटल एमआरपी से ज्यादा कीमत ले सकता है, लेकिन उसी राशि पर अलग से जीएसटी वसूलना गलत है।
होटल को उपभोक्ता से अतिरिक्त लिए गए 10.80 रुपए लौटाने, 5 हजार रुपए मानसिक प्रताड़ना और 3 हजार रुपए वाद व्यय के रूप में देने के निर्देश दिए गए हैं। तय अवधि में भुगतान नहीं करने पर होटल को 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी देना होगा।

पानी की बोतल की कीमत देखकर आपत्ति जताई
मामला अप्रैल 2022 का है। रायसेन रोड निवासी हुकुम सिंह ठाकुर अपने चार साथियों के साथ होटल रेडिसन में बुफे डिनर के लिए गए थे। भोजन के दौरान उन्होंने मिनरल वॉटर की एक बोतल ली। बोतल पर एमआरपी 60 रुपए अंकित थी, लेकिन बिल में इसके 175 रुपए जोड़े गए।

जब बिल आया तो कुल राशि 6809.88 रुपए थी। पानी की बोतल की कीमत देखकर हुकुम सिंह ने आपत्ति जताई, लेकिन होटल प्रबंधन ने राशि वापस नहीं की। इसके बाद उन्होंने उपभोक्ता आयोग में शिकायत दर्ज कराई। आयोग ने जून 2026 में फैसला सुनाया।

होटल प्रबंधन बोला- MRP से ज्यादा कीमत लेना जायज
होटल प्रबंधन ने आयोग के सामने तर्क दिया कि होटल और रेस्टोरेंट में बेची जाने वाली वस्तुएं सिर्फ उत्पाद नहीं होतीं। उनके साथ एयर कंडीशनिंग, बैठने की सुविधा, लाउंज, संगीत, सर्विस और अन्य आतिथ्य सेवाएं भी दी जाती हैं।

होटल का कहना था कि इसलिए मेन्यू कार्ड में दर्ज कीमतें लागू होती हैं। बोतल पर अंकित एमआरपी रिटेल दुकानों के लिए होती है, होटल में परोसी जाने वाली वस्तुओं पर नहीं। होटल ने यह भी कहा कि मेन्यू में पहले से स्पष्ट था कि जीएसटी अलग से लिया जाएगा।

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आयोग ने कहा: कीमत सही, लेकिन टैक्स वसूली में गलती
जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोषण आयोग ने सुप्रीम कोर्ट और अन्य न्यायिक फैसलों का हवाला देते हुए माना कि होटल में एमआरपी से ज्यादा कीमत लेना अपने आप में अवैध नहीं है और इसे सेवा में कमी नहीं माना जा सकता।

हालांकि आयोग ने कहा कि 175 रुपए की कीमत में ही जीएसटी शामिल माना जाएगा। ऐसे में होटल द्वारा उस पर 18 प्रतिशत जीएसटी के रूप में अतिरिक्त 10.80 रुपए वसूलना अनुचित व्यापार व्यवहार और सेवा में कमी है।

शिकायतकर्ता बोले- स्टाफ ने बदसलूकी भी की
शिकायतकर्ता हुकुम सिंह ठाकुर का कहना है कि कीमत पर आपत्ति जताने पर होटल स्टाफ ने उनके साथ बहस की और अभद्र व्यवहार भी किया। इसी के बाद उन्होंने उपभोक्ता आयोग का दरवाजा खटखटाया। उनका कहना है कि आयोग ने अतिरिक्त जीएसटी वसूली को गलत माना, लेकिन एमआरपी से अधिक कीमत वसूले जाने के मुद्दे पर उन्हें आंशिक राहत ही मिली।

वकील बोले- मामला उपभोक्ता अधिकारों से जुड़ा है
परिवादी (शिकायत) पक्ष के वकील शशिकांत वर्मा ने कहा कि मामला सिर्फ 10.80 रुपए का नहीं, बल्कि उपभोक्ता अधिकारों से जुड़ा है। उनके अनुसार होटल और रेस्टोरेंट अक्सर सुविधाओं के नाम पर ऊंची कीमतें वसूलते हैं।

उन्होंने कहा कि आयोग का फैसला उपभोक्ताओं को यह संदेश देता है कि अनुचित व्यापार प्रथाओं के खिलाफ आवाज उठाने पर न्याय मिल सकता है।

एमआरपी (MRP) को लेकर आयोग ने 2 केस का हवाला दिया
फेडरेशन ऑफ होटल एंड रेस्टोरेंट एसोसिएशन ऑफ इंडिया वर्सेस यूनियन ऑफ इंडिया (सिविल अपील नं. 21790/2017, निर्णय दिनांक 12.12.2017) इसके अलावा आयोग ने एक और फैसले ITC Ltd vs K.C. Khanna (अपील नं. A/2013/2201, निर्णय दिनांक 04.09.2023) का जिक्र किया गया है।

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इन फैसलों में माना गया कि होटल, रेस्टोरेंट, एयरलाइन और रेलवे जैसे संस्थागत उपभोक्ता पैकेज्ड वस्तुएं खरीदकर अपनी सेवाओं के साथ ग्राहकों को उपलब्ध कराते हैं। इसलिए उन पर सामान्य रिटेल एमआरपी नियम उसी तरह लागू नहीं होते जैसे दुकानों पर होते हैं। इसी आधार पर आयोग ने माना कि होटल द्वारा एमआरपी से अधिक कीमत लेना अपने आप में अवैध नहीं है।

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