मध्य प्रदेशराज्‍य

पशुपालन एवं डेयरी विभाग समीक्षा बैठक सम्पन्न

By Admin|24 Jun 2026, 9:41 PM
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भोपाल 

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राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने कहा है कि मुख्यमंत्री दुधारू पशु प्रदाय योजना के हितग्राहियों को दुग्ध संग्रहण एवं विपणन की मजबूत व्यवस्था उपलब्ध कराने के प्रयास किए जाए। उन्होंने कहा कि हितग्राही को उत्पादित दुग्ध का उचित मूल्य दिलाने के लिए परिवहन व्यवस्था विकसित की जानी चाहिए। विभागीय अथवा थर्ड पार्टी समन्वय से आवश्यक वाहनों की उपलब्धता पर विचार किया जाए।

राज्यपाल पटेल बुधवार को लोक भवन में आयोजित पशुपालन एवं डेयरी विभाग के अधिकारियों से चर्चा कर रहे थे। बैठक में प्रदाय पशुओं के स्वास्थ्य, देखभाल एवं मॉनिटरिंग व्यवस्थाओं, हितग्राहियों को पशुपालन प्रशिक्षण, वनाधिकार पट्टा धारकों को लाभान्वित करने और हितग्राही अंशदान के संबंध जानकारी दी गई।

राज्यपाल पटेल ने कहा है कि मुख्यमंत्री दुधारू पशु योजना अति-गरीब के पोषण और सतत् आजीविका की पहल है। योजना की सफलता के लिए अति-गरीब को प्राथमिकता वितरण पद्धति का आधार होना चाहिए। उन्होंने अति-पिछड़ी जनजातियों बैगा, भारिया और सहरिया के अति-गरीब को प्राथमिकता से लाभान्वित करने के प्रयासों पर बल दिया। उन्होंने कहा कि आबादी के अनुपात में वितरण की व्यवस्था सुनिश्चित की जानी चाहिए। योजना की जानकारी के लिये अति-पिछड़ी जनजातियों के बीच प्रचार-प्रसार किया जाए। राज्यपाल पटेल ने कहा कि पशु वितरण कार्यक्रम में लाभान्वित महिला हितग्राहियों के माध्यम से पशुपालन व्यवस्थाओं और परिवार की आय में बढ़ोतरी के संबंध में जानकारी प्रदान करने की पहल करें। योजना की उपलब्धियों का वर्षवार चित्रात्मक विवरण संधारित किया जाए।

राज्यपाल पटेल ने गुजरात राज्य में जनजातीय बहुल क्षेत्र में दुग्ध संजीवनी योजना के अनुभवों का उल्लेख करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री पशु प्रदाय योजना के हितग्राहियों को परिवार के बच्चों के लिए दुग्ध की उपलब्धता को सुनिश्चित करने की समझाइश दी जाए। विभाग के द्वारा 2 महिला, 2 पुरुष अधिकारियों को बनासकांठा के डेयरी उद्योग का अध्ययन करने के लिए गुजरात राज्य भेजने के निर्देश दिए हैं।

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राज्यपाल पटेल को प्रमुख सचिव पशुपालन एवं डेयरी उमाकांत उमराव ने बताया कि प्रदेश के किसानों, पशुपालकों को मोबाइल पर ही पशुओं के पोषण संबंधी जानकारी दी जा रही है। साथ ही वैज्ञानिक तरीके से पशुओं को आहार मिले, इसके लिए विभाग द्वारा गोरस मोबाइल ऐप तैयार कराया गया है। यह ऐप पूरी तरह से सरल हिंदी भाषा में विकसित किया है। इसके लिए नेट की भी आवश्यकता नहीं है। उन्होंने बताया कि प्रदेश में ब्रीडर एसोसिएशन का विकास किया जा रहा है। इसमें एक ही नस्ल के 20 से अधिक पशुओं के प्रमाणीकरण के द्वारा उन्नत नस्ल के पशुओं की राज्य में ही आपूर्ति के प्रयास किए गए हैं। उन्होंने बताया कि योजना क्रियान्वयन के लिए 5 वर्षों के प्रावधान और बजट वृद्धि की गई है। प्रति इकाई पशु कीमत को भी बढ़ाया गया है। बीमा की भी व्यवस्थाएं की गई है। कार्य क्षेत्र 12 से बढ़ाकर 24 जिलों में किए जाने का प्रस्ताव विचाराधीन है। उमरिया जिले के समस्त हितग्राहियों को 2 पशु प्रदान करने की उपलब्धि हासिल की गई है। उन्होंने बताया कि विभाग द्वारा योजना अंतर्गत 100 लीटर दुग्ध संकलन क्षेत्रवार दुग्ध सहकारी संस्थाएं बनाई जा रही हैं। इन समितियों के सचिव के रूप में हितग्राहियों को अतिरिक्त आय भी उपलब्ध होगी। उन्होंने प्रदाय पशुओं के स्वास्थ्य देखभाल के संबंध में बताया कि वितरण पश्चात् तीन माह तक पुन: आकलन कर हितग्राहीवार समीक्षा की जा रही है। पशु चिकित्सक द्वारा साप्ताहिक भ्रमण कर आवश्यक उपचार, टीकाकरण एवं डीवर्मिंग कराई जा रही है। नोडल अधिकारी द्वारा आकस्मिक निरीक्षण किया जाता है।

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इस अवसर पर जनजातीय प्रकोष्ठ के अध्यक्ष दीपक खांडेकर, राज्यपाल के प्रमुख सचिव डॉ. नवनीत मोहन कोठारी, जनजातीय प्रकोष्ठ की सदस्य सचिव  मीनाक्षी सिंह, प्रकोष्ठ के सदस्य, लोक भवन और पशुपालन एवं डेयरी विभाग के अधिकारी उपस्थित थे।

 

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