छत्तीसगढ़

किसानों की चिंता दूर कर रही छत्तीसगढ़ सरकार, अल-नीनो में दलहन-तिलहन और कम अवधि की फसलों पर फोकस

By Admin|23 Jun 2026, 11:25 PM
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रायपुर

अल-नीनो के प्रभाव से इस बार मानसून कमजोर रहने की आशंका के बीच छत्तीसगढ़ सरकार ने किसानों के हितों की रक्षा के लिए तेजी से कदम उठाए हैं। सूखे की स्थिति से निपटने के लिए राज्य सरकार ने कम अवधि वाली फसलों, दलहन-तिलहन पर जोर, बीज सुरक्षा और फसल बीमा को प्राथमिकता देते हुए व्यापक रणनीति तैयार की है। इस आशय की जानकारी कृषि विकास एवं किसान कल्याण मंत्री  राम विचार नेताम ने केन्द्रीय कृषि मंत्री  शिवराज सिंह चौहान की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में दी। बैठक वीडियोकांफ्रेंसिंग के माध्यम से संपन्न हुई। 
    
बैठक में कृषि उत्पादन आयुक्त  सिद्धार्थ कोमल सिंह परदेशी, संचालक कृषि  राहुल देव, संचालक अनुसंधान डॉ. विवके त्रिपाठी सहित विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे। 
    
वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से आयोजित बैठक में मंत्री  नेताम ने बताया कि 

    
प्रदेश में 22 जून तक औसत वर्षा महज 30.8 मिलीमीटर दर्ज की गई है, जो पिछले 10 वर्षों के औसत से 58.3 मिलीमीटर कम है। खरीफ बोनी का लक्ष्य 48.69 लाख हेक्टेयर है, लेकिन अभी तक केवल 2 प्रतिशत क्षेत्र में ही बोनी हो पाई है। इस चुनौतीपूर्ण स्थिति में सरकार ने किसानों को संभावित घाटे से बचाने के लिए कई ठोस उपाय शुरू कर दिए हैं।
    कृषि उत्पादन आयुक्त  परदेशी ने बताया कि कृषि विभाग ने कम अवधि वाली धान के किस्मों को बढ़ावा देने के साथ-साथ मक्का, कोदो, कुटकी, रागी, दलहनी और तिलहनी फसलों के गुणवत्तापूर्ण बीजों को सुरक्षित रखने के निर्देश दिए हैं। उच्चहन भूमि में अनाज के साथ दलहन-तिलहन फसलों को अंतरवर्तीय फसल के रूप में लगाने की सलाह दी जा रही है। धान की जगह दलहन-तिलहन फसलों की ओर किसानों को प्रोत्साहित किया जा रहा है।
    
उन्होंने बताया कि बीज की उपलब्धता सुनिश्चित करते हुए करते हुए राज्य बीज निगम ने 4.95 लाख क्विंटल प्रमाणित बीज वितरण का लक्ष्य रखा है। सूखे प्रभावित 15 जिलों के लिए 1,22,095 क्विंटल बीज उपलब्ध कराया गया है, जिसमें से 48,449 क्विंटल किसानों तक पहुंच चुका है। 
    
 परदेशी ने बताया कि रासायनिक उर्वरकों का पर्याप्त भंडारण सुनिश्चित करने के साथ नैनो उर्वरक और लाभकारी फसलों के प्रति जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है।
    
सरकार ने बीमा कंपनियों के साथ समन्वय स्थापित कर फसल नुकसान की भरपाई के लिए बीमा प्लान को प्रभावी बनाने के निर्देश भी दिए हैं। ताकि किसानों को  आर्थिक क्षति से बचाया जा सके। उन्होंने यह भी बताया कि अल-नीनो के प्राभाव  कम होने वाली दलहन-तिलहन और कम अवधि की फसलों पर फोकस किया जा रहा है। साथ ही 
इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय, रायपुर अनुसंधान विभाग द्वारा अल-नीनो को ध्यान में रखते हुए आकस्मिक कार्ययोजना तैयार की गई है।

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