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जेपी आंदोलन से 1977 तक: बिहार ने तय की थी लोकतंत्र की वापसी की राह भाजपा का बयान

By Admin|23 Jun 2026, 6:25 PM
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पटना
 आपातकाल की 51वीं वर्षगांठ के मौके पर बिहार भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष Sanjay Saraogi ने उस दौर को याद करते हुए दावा किया है कि देश में लोकतंत्र की रक्षा की सबसे मजबूत लड़ाई बिहार की धरती से लड़ी गई थी।

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उनके अनुसार, आपातकाल केवल एक राजनीतिक घटना नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक अधिकारों पर सबसे बड़ा हमला था।

उन्होंने कहा कि आज भी बिहार की गलियों और परिवारों में उस संघर्ष की यादें जीवित हैं, जिसने तानाशाही के खिलाफ जनआंदोलन का रूप लिया था।
25 जून 1975: जब एक रात में बदल गया देश का राजनीतिक माहौल

25 जून 1975 की रात तत्कालीन प्रधानमंत्री Indira Gandhi ने देश में आपातकाल लागू किया था। इसके बाद नागरिक अधिकारों पर प्रतिबंध लगाए गए, विपक्षी नेताओं की गिरफ्तारियां शुरू हुईं और प्रेस पर सेंसरशिप लागू कर दी गई।

बिहार में भी इसका व्यापक असर देखने को मिला। कई राजनीतिक कार्यकर्ताओं और आंदोलनकारियों को हिरासत में लिया गया और विरोध प्रदर्शनों पर रोक लगा दी गई।

जेपी आंदोलन को बताया लोकतंत्र की सबसे बड़ी लड़ाई
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि बिहार में शुरू हुआ छात्र आंदोलन आगे चलकर लोकतंत्र बचाने के राष्ट्रीय अभियान में बदल गया। इस आंदोलन का नेतृत्व Jayaprakash Narayan ने किया था।

उनके अनुसार, जेपी के आह्वान पर हजारों छात्र और युवा सड़कों पर उतरे और लोकतांत्रिक अधिकारों की बहाली के लिए संघर्ष किया।
कर्पूरी ठाकुर और जॉर्ज फर्नांडिस के संघर्ष का किया जिक्र

लेख में Karpoori Thakur और George Fernandes की भूमिका को भी विशेष रूप से रेखांकित किया गया है।

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दावा किया गया कि आपातकाल के दौरान कई नेता भूमिगत रहकर आंदोलन को आगे बढ़ाते रहे। उस समय सरकारी कार्रवाई के बावजूद विपक्षी नेताओं और कार्यकर्ताओं ने विरोध जारी रखा।

संघ और जनसंघ की भूमिका को बताया आंदोलन की रीढ़
संजय सरावगी ने कहा कि आपातकाल के दौरान Rashtriya Swayamsevak Sangh और Bharatiya Jana Sangh के कार्यकर्ताओं ने संगठनात्मक स्तर पर महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

उनका कहना है कि प्रतिबंधों और गिरफ्तारियों के बावजूद कार्यकर्ता भूमिगत रहकर संदेशों और आंदोलन की गतिविधियों को आगे बढ़ाते रहे।

1977 का चुनाव बना लोकतंत्र की वापसी का प्रतीक
लेख में 1977 के आम चुनाव को लोकतंत्र की पुनर्स्थापना का महत्वपूर्ण पड़ाव बताया गया है। भाजपा नेता के अनुसार, जनता ने चुनाव के माध्यम से आपातकाल की नीतियों के खिलाफ अपना फैसला सुनाया।

उन्होंने कहा कि बिहार ने उस दौर में सत्ता परिवर्तन की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाई और लोकतांत्रिक व्यवस्था को मजबूत करने का संदेश दिया।
51वीं वर्षगांठ पर लोकतांत्रिक मूल्यों को मजबूत करने का आह्वान

आपातकाल की वर्षगांठ पर भाजपा ने इसे लोकतंत्र की रक्षा के संकल्प से जोड़ते हुए याद किया है। संजय सरावगी ने कार्यकर्ताओं और नागरिकों से लोकतांत्रिक संस्थाओं और संवैधानिक मूल्यों को मजबूत बनाए रखने का आह्वान किया।

उन्होंने कहा कि आपातकाल का इतिहास केवल अतीत की कहानी नहीं, बल्कि लोकतंत्र की रक्षा के प्रति सतर्क रहने का संदेश भी देता है।

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