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मोहन सरकार में बड़ा बदलाव तय! नए चेहरों की एंट्री, कुछ मंत्रियों की छुट्टी और विभागों में फेरबदल के संकेत

By Admin|23 Jun 2026, 9:06 AM
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भोपाल 
मध्य प्रदेश की मोहन यादव सरकार पहले बड़े मंत्रिमंडल विस्तार और फेरबदल की तैयारी में है। 2023 के विधानसभा चुनाव के बाद बनने जा रही इस नई कैबिनेट में बड़ा उलटफेर देखने को मिलेगा। कयास लगाए जा रहे हैं कि 23 से 30 जून के बीच यह विस्तार हो सकता है। इस बड़े फेरबदल में बेहतर परफॉर्मेंस न देने वाले 5 से 6 मंत्रियों की छुट्टी की जा सकती है, जबकि 7 से 8 नए विधायकों को मंत्री पद की शपथ दिलाई जाएगी। फिलहाल मुख्यमंत्री समेत कैबिनेट की संख्या 31 है, जबकि 4 पद खाली चल रहे हैं।

वरिष्ठ मंत्रियों को मिल सकती है नई जिम्मेदारी
सियासी गलियारों में चर्चा है कि मोहन यादव कैबिनेट के कुछ बेहद सीनियर मंत्री मुख्यमंत्री से ज्यादा अपनी वरिष्ठता के कारण असहज महसूस कर रहे हैं। ऐसे में पूर्व राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय को राज्यसभा भेजा जा सकता है, जबकि पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल को केंद्र में संगठन की कोई बड़ी जिम्मेदारी दी जा सकती है। 

इसके अलावा, सेना की महिला अधिकारी कर्नल सोफिया कुरैशी पर विवादित टिप्पणी करने वाले जनजातीय कल्याण मंत्री विजय शाह की कुर्सी पर भी खतरा मंडरा रहा है। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट कई बार सरकार को फटकार लगा चुका है। विभाग की समीक्षा रिपोर्ट के आधार पर राज्य मंत्री दिलीप अहिरवार, राधा सिंह और प्रतिमा बागरी पर भी गाज गिर सकती है।

इन नए चेहरों की हो सकती है एंट्री
नए चेहरों की बात करें तो सागर से शैलेंद्र जैन या प्रदीप लारिया में से किसी एक को मौका मिल सकता है। बुंदेलखंड से पूर्व मंत्री बृजेंद्र प्रताप सिंह का नाम भी रेस में आगे चल रहा है। वहीं, ज्योतिरादित्य सिंधिया खेमे के पूर्व स्वास्थ्य मंत्री प्रभुराम चौधरी की भी कैबिनेट में वापसी की पूरी उम्मीद है। सूत्रों के मुताबिक, इस बार केवल मंत्रियों के चेहरे ही नहीं बदलेंगे, बल्कि लगभग सभी मंत्रियों के विभागों में भी भारी फेरबदल किया जाएगा।

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सीएम बोले- परफॉर्मेंस बनेगा आधार
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि मंत्रिमंडल फेरबदल का मुख्य आधार मंत्रियों का कामकाज रहेगा। अंतिम निर्णय पार्टी संगठन और केंद्रीय नेतृत्व से चर्चा के बाद लिया जाएगा। उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय और राज्य स्तर पर मंत्रियों व विधायकों के प्रदर्शन की नियमित समीक्षा होती है, जिसमें शीर्ष नेतृत्व के सुझाव भी शामिल रहते हैं।

बीजेपी के सामने प्रमुख राजनीतिक समीकरण जानकारों के अनुसार इस फेरबदल के जरिए बीजेपी कई राजनीतिक और संगठनात्मक समीकरण साधना चाहती है।

    बुंदेलखंड का प्रतिनिधित्व बढ़ाना: क्षेत्र की सीमित हिस्सेदारी से उपजी नाराजगी दूर करने के लिए सागर, दमोह, पन्ना और टीकमगढ़ से नए मंत्रियों को मौका दिया जा सकता है।

    महिला प्रतिनिधित्व बढ़ाना: महिला मतदाताओं को ध्यान में रखते हुए रीती पाठक, अर्चना चिटनीस और मालिनी गौड़ को अवसर मिल सकता है।

    ओबीसी समीकरण और 2028 की तैयारी: आगामी विधानसभा चुनावों को देखते हुए पार्टी ओबीसी वर्ग में अपनी पकड़ मजबूत करने की रणनीति पर काम कर रही है।

    निकाय चुनाव की तैयारी: अगले वर्ष होने वाले नगरीय निकाय चुनावों को देखते हुए संगठन सीटों की स्थिति, प्रत्याशी चयन, बूथ प्रबंधन और चुनावी रणनीति पर फीडबैक जुटा रहा है।

    सिंधिया खेमे और मूल संगठन में संतुलन: मौजूदा कैबिनेट में सिंधिया समर्थक नेताओं की मजबूत मौजूदगी है। फेरबदल में पार्टी को यह प्रभाव बनाए रखते हुए संगठन के पुराने नेताओं को भी संतुलित प्रतिनिधित्व देना होगा।

इन मंत्रियों पर हटने का खतरा समीक्षा रिपोर्ट और विवादों के आधार पर कुछ मंत्रियों की भूमिका पर सवाल उठे हैं। प्रमुख नाम इस प्रकार हैं:

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    विजय शाह: कर्नल सोफिया कुरैशी पर विवादित टिप्पणी के बाद वे आलोचनाओं के केंद्र में रहे। मामले में सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणियां और संगठन की नाराजगी भी सामने आई। पूर्व में भी उनके कुछ बयान पार्टी के लिए असहजता का कारण बने थे।

    दिलीप अहिरवार: पहली बार विधायक बने अहिरवार को कैबिनेट में जगह मिली थी। हालांकि हालिया समीक्षा में उनके कामकाज को अपेक्षित स्तर का नहीं माना गया, जिससे उनकी स्थिति कमजोर बताई जा रही है।

    प्रतिमा बागरी: उनका नाम जाति प्रमाण पत्र संबंधी विवाद में चर्चा में रहा है, जिसमें हाईकोर्ट ने राज्य स्तरीय जांच समिति से रिपोर्ट मांगी है। उनके भाई की गिरफ्तारी का मामला भी राजनीतिक चर्चा का विषय बना।

    राधा सिंह: पहली बार विधायक बनीं राधा सिंह के विभाग के प्रदर्शन को लेकर हालिया समीक्षा में सवाल उठे हैं। इसके बाद उनके भविष्य को लेकर अटकलें तेज हुई हैं।

    एदल सिंह कंषाना : रेत खनन और माफिया को लेकर विवादित बयान दे चुके हैं। विभाग के प्रदर्शन को लेकर हालिया समीक्षा में सवाल उठे हैं। उनके स्टाफ के सदस्य तबादलों के एवज में रिश्वत मांगते के खुफिया कैमरे में कैद हुए।

इन मंत्रियों के विभागों में हो सकता है बदलाव

    प्रहलाद पटेल: उन्हें संगठन या सरकार में बड़ी जिम्मेदारी मिलने की संभावना जताई जा रही है। राज्य मंत्रिमंडल में बने रहने पर उनके अनुभव के आधार पर अतिरिक्त विभाग भी दिए जा सकते हैं।

    कैलाश विजयवर्गीय: विभागों में बदलाव संभव है, लेकिन उनकी राजनीतिक भूमिका और जिम्मेदारियां क्या होंगी इसे लेकर अभी संशय की स्थिति है।

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    तुलसीराम सिलावट: विभागीय पुनर्संतुलन के तहत उनके विभाग में बदलाव की संभावना बताई जा रही है।

वरिष्ठ पत्रकार एन के सिंह कहते हैं कि एमपी के मुख्यमंत्री मोहन यादव देश के उन चुनिंदा मुख्यमंत्रियों में हैं, जिन्होंने सपने में भी मुख्यमंत्री बनने की कल्पना नहीं की थी। पार्टी ने उन्हें तीसरी या चौथी पंक्ति से उठाकर इतने बड़े पद पर बैठाया है।

उनके साथ प्रहलाद पटेल और कैलाश विजयवर्गीय जैसे दिग्गज नेता काम कर रहे हैं, जो अनुभव और कद में उनसे कहीं ज्यादा हैं। ऐसे में इन नेताओं का असहज होना लाजमी है। यह उस समय का पॉलिटकल कंपल्शन या मजबूरी थी। यह चल रहा था और आगे भी चल सकता है।

नए चेहरों की एंट्री: कौन हैं दावेदार? संभावित नए चेहरों में सागर के प्रदीप लारिया प्रमुख दावेदार माने जा रहे हैं। बुंदेलखंड से पूर्व मंत्री बृजेंद्र प्रताप सिंह का नाम भी चर्चा में है। पूर्व स्वास्थ्य मंत्री प्रभुराम चौधरी की मंत्रिमंडल में वापसी की संभावना भी जताई जा रही है।

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