छत्तीसगढ़

सुकमा की बेटी लावण्या को मिली नई मुस्कान, मुख्यमंत्री ने दिया आशीर्वाद

By Admin|16 Apr 2026, 10:13 AM
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रायपुर. 
कहते हैं कि सही समय पर मिला इलाज किसी की पूरी ज़िंदगी बदल सकता है। सुकमा जिले की 13 वर्षीय बालिका टुंकी लावण्या की कहानी इसी बात का जीवंत उदाहरण है, जिसने कठिन परिस्थितियों और वर्षों की पीड़ा के बाद आखिरकार एक नई मुस्कान और नया आत्मविश्वास पाया है।

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लावण्या, जो कन्या आश्रम, गोल्लापल्ली (पालाचेलमा) की निवासी है, जन्म से ही क्लैफ्ट लिप (कटे होंठ) जैसी गंभीर समस्या से जूझ रही थी। यह बीमारी सिर्फ शारीरिक दर्द तक सीमित नहीं थी, बल्कि उसके बचपन पर सामाजिक झिझक और आत्मविश्वास की कमी का भी गहरा असर डाल रही थी। परिवार में जागरूकता की कमी और इलाज को लेकर भय के कारण लंबे समय तक उसका उपचार नहीं हो पाया। लेकिन किस्मत ने तब करवट ली जब लावण्या मेगा सुपर स्पेशियलिटी स्वास्थ्य शिविर में पहुंची। शिविर में कलेक्टर अमित कुमार और एसपी किरण चव्हाण से मिली। उन्होंने लावण्या को स्वास्थ्य शिविर में जांच कराके बेहतर इलाज का प्रबंध किया। 

स्वास्थ्य शिविर बना जीवन बदलने का मोड़
शिविर में मौजूद स्वास्थ्य विभाग की टीम ने न सिर्फ लावण्या की जांच की, बल्कि उसके परिवार को समझाकर इलाज के लिए तैयार किया। इसी शिविर में आयुष्मान कार्ड बनाया गया। जिला अस्पताल रेफर किया गया। इसके बाद बेहतर इलाज के लिए लावण्या को कालाडा अस्पताल, रायपुर भेजा गया। इस दौरान आरबीएसके चिरायु टीम ने उसे सुरक्षित अस्पताल तक पहुंचाने की जिम्मेदारी निभाई।

10 अप्रैल 2026: जब दर्द की जगह उम्मीद ने ले ली
सभी प्रक्रियाओं और समन्वय के बाद आखिरकार 10 अप्रैल 2026 को लावण्या का सफल ऑपरेशन किया गया। यह सिर्फ एक चिकित्सा प्रक्रिया नहीं थी, बल्कि उसके जीवन के अंधेरे में उम्मीद की रोशनी थी। ऑपरेशन के बाद लावण्या के चेहरे पर लौटी मुस्कान को देखकर परिवार की आंखों में खुशी के आंसू छलक पड़े। वर्षों का दर्द और ताने जैसे उसी दिन समाप्त हो गए।

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मुख्यमंत्री ने की मुलाकात, दिया आशीर्वाद
इस कहानी का सबसे भावुक पल तब आया जब 13 अप्रैल 2026 को सुकमा दौरे के दौरान माननीय मुख्यमंत्री एवं स्वास्थ्य मंत्री ने लावण्या से मुलाकात की। उन्होंने लावण्या के स्वास्थ्य की जानकारी ली, उसे फल भेंट किए और उसके उज्ज्वल भविष्य के लिए आशीर्वाद दिया।

सरकारी योजनाओं की सफलता की मिसाल बनी लावण्या
आज लावण्या के चेहरे पर लौटी मुस्कान केवल उसकी व्यक्तिगत जीत नहीं, बल्कि यह इस बात का प्रमाण है कि सरकारी योजनाएं, स्वास्थ्य विभाग का समर्पण और समय पर उपचार दूरस्थ और ग्रामीण क्षेत्रों में भी चमत्कार कर सकते हैं। लावण्या अब न सिर्फ स्वस्थ है, बल्कि उसके भीतर एक नई ऊर्जा और आत्मविश्वास भी लौट आया है। उसकी मुस्कान आज पूरे सुकमा के लिए प्रेरणा बन चुकी है।

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