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एक्सीडेंट में नंबर-1 बना मध्य प्रदेश! हर दिन 283 सड़क हादसे, युवाओं पर सबसे ज्यादा खतरा

By Admin|18 Jun 2026, 9:23 AM
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भोपाल
 राजधानी भोपाल सहित मध्य प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों से रोजाना सड़क हादसों की खबरें सामने आती हैं. तेज रफ्तार, यातायात नियमों की अनदेखी और लापरवाही लोगों की जान पर भारी पड़ रही है. अब सड़क दुर्घटनाओं को लेकर एक चौंकाने वाली रिपोर्ट सामने आई है. 108 आपातकालीन एंबुलेंस सेवा के आंकड़ों के मुताबिक, पिछले एक साल में प्रदेश में 1 लाख 3 हजार से ज्यादा लोग सड़क हादसों का शिकार हुए हैं। 

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प्रदेश भर में हर दिन औसतन 283 लोग सड़क दुर्घटनाओं में घायल हुए. सबसे चिंता की बात यह है कि इन हादसों का सबसे बड़ा शिकार युवा वर्ग बन रहा है. करीब 61 प्रतिशत युवा सड़क दुर्घटनाओं के शिकार बन रहे हैं। 

सड़क दुर्घटना की भेंट चढ़ रहे एमपी के युवा
मध्य प्रदेश में सड़कों पर बढ़ती रफ्तार अब लोगों की जिंदगी के लिए बड़ा खतरा बनती जा रही है. यातायात नियमों की अनदेखी और लापरवाही सड़क दुर्घटनाओं की सबसे बड़ी वजह बनकर सामने आई है. 108 आपातकालीन एंबुलेंस सेवा द्वारा जारी रिपोर्ट से पता चला है कि मई 2025 से 2026 तक में 1 लाख 3 हजार 294 सड़क दुर्घटना हुई हैं, जिनमें चिकित्सा सहायता प्रदान की गई और इनमें शामिल युवाओं की तादाद सबसे ज्यादा है। 

हादसों में किस उम्र वर्ग के कितने प्रतिशत लोग

    16 से 30 वर्ष आयु – 61 प्रतिशत
    31 से 45 वर्ष आयु – 24 प्रतिशत
    46 से 60 वर्ष आयु – 9 प्रतिशत
    अन्य आयु वर्ग – 6 प्रतिशत

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108 एंबुलेंस सेवा के सीनियर मैनेजर तरुण सिंह परिहार ने कहा, "मेरी टीम हर आपात स्थिति में गोल्डन ऑवर के भीतर पहुंचकर लोगों की जान बचाने का प्रयास करती है. हर कॉल मेरे लिए किसी की जिंदगी बचाने का अवसर होती है. टीम का प्रयास रहता है कि कम से कम समय में घटनास्थल पर पहुंचकर मरीज को बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जाए। 

108 सेवा उपयोग करने की अपील
उन्होंने आगे लोगों से अपील करते हुए कहा, "किसी भी दुर्घटना या स्वास्थ्य आपात स्थिति में निजी वाहन के बजाय 108 एंबुलेंस सेवा का उपयोग करें, क्योंकि एंबुलेंस में जीवन रक्षक उपकरण और प्रशिक्षित मेडिकल स्टाफ उपलब्ध रहता है, जो अस्पताल पहुंचने से पहले ही मरीज को आवश्यक उपचार देना शुरू कर देता है। 

108 एंबुलेंस सेवा के आंकड़ों ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि रफ्तार की सनक लोगों पर कितनी भारी पड़ रही है. हालांकि, राहत की बात यह है कि पिछले एक साल में एक लाख तीन हजार से अधिक घायलों को समय पर अस्पताल पहुंचाकर उनकी जान बचाने का प्रयास किया गया, लेकिन सड़क पर कुछ सेकंड की लापरवाही किसी परिवार की पूरी जिंदगी बदल सकती है. ऐसे में जरूरी है कि रफ्तार नहीं, जिम्मेदारी को प्राथमिकता दी जाए. क्योंकि मंजिल तक पहुंचना जरूरी है, लेकिन सुरक्षित पहुंचना उससे भी ज्यादा जरूरी है। 

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