बिहार / झारखण्डराज्‍य

सोन नदी जल विवाद पर 25 साल बाद करार, बिहार को 5.75 और झारखंड को 2 MAF

By Admin|01 Sep 2026, 9:52 PM
f X W

पटना
 आखिरकार बिहार और झारखंड के बीच 25 सालों से चला आ रहा सोन नदी जल बंटवारा विवाद (Sone River Dispute) समाप्त हो गया। दोनों ही राज्यों के बीच दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने समझौता कराया।

Advertisement
Advertisement

31 अगस्त को बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी (Samrat Choudhary) और झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन (Hemant Soren) ने सोन नदी बंटवारे को लेकर हुए करार पर हस्ताक्षर किए। इस विवाद के सुलझने से मुख्य रूप से बिहार और झारखंड के 10 जिलों को लाभ मिलेगा।

चलिए समझते हैं कि आखिरसोन नदी जल विवाद क्या है और इससे किन-किन जिलों को लाभ मिलेगा?

क्या है सोन नदी जल बंटवारा विवाद?
सोन नदी जल बंटवारा विवाद मुख्य रूप से बिहार और झारखंड के बीच सोन नदी के पानी के अधिकार और उसके उपयोग को लेकर चला आ रहा अंतर-राज्यीय जल विवाद था।

विवाद की मुख्य कड़ी: 1973 का बाणसागर समझौता
दरअसल, सोन नदी के जल प्रबंधन के लिए 1973 में मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और तत्कालीन अविभाजित बिहार के बीच 'बाणसागर समझौता' हुआ था।

इस एग्रीमेंट के मुताबिक, बिहार को सोन नदी से 7.75 मिलियन एकड़-फीट (MAF) जल आवंटित किया गया था। यहां तक तो सब ठीक था, लेकिन फिर जब साल 2000 में झारखंड बिहार से अलग होकर नया राज्य बना तो इस विवाद ने फिर तूल पकड़ लिया।

झारखंड का पक्ष:
15 नवंबर, 2000 को बिहार से अलग होने वाले झारखंड का कहना था कि सोन नदी का उद्गम (जहां से नदी निकलती है), इसका जलग्रहण क्षेत्र (जिस इलाके का पानी नदी में आता है) और इसके बहाव का एक बड़ा हिस्सा गढ़वा और पलामू जैसे झारखंड के इलाकों में पड़ता है।

READ ALSO  बॉन्डेड डॉक्टर्स का लागू होगा समान वेतनमान: ब्रजेश पाठक

इसी वजह से बिहार को मिले कुल 7.75 MAF पानी में से झारखंड को भी उसका जायज हिस्सा मिलना चाहिए।

बिहार का पक्ष:
दूसरी ओर, बिहार का कहना था कि 1973 का बाणसागर समझौता अंतिम है और दक्षिण बिहार के कृषि आधारित जिलों जैसे कि भोजपुर, बक्सर, रोहतास, औरंगाबाद और पटना की सिंचाई व्यवस्था सोन नदी पर पूरी तरह निर्भर है, इसलिए 7.75 MAF पानी पर बिहार का ही अधिकार है।

इंद्रपुरी जलाशय प्रोजेक्ट पर पड़ा असर, योजना अटकी
अब बिहार और झारखंड के बीच सालों चले इस विवाद के कारण रोहतास जिले में प्रस्तावित इंद्रपुरी जलाशय परियोजना पिछले कई दशकों से रुकी हुई थी।

क्या है इंद्रपुरी जलाशय प्रोजेक्ट?
इंद्रपुरी जलाशय परियोजना सोन नदी पर प्रस्तावित एक महत्वपूर्ण और जल संसाधन परियोजना है। यह परियोजना बिहार के रोहतास जिले और झारखंड के गढ़वा जिले की सीमा पर स्थित है।
अब चूंकि बिहार और झारखंड के बीच विवाद खत्म हो गया है कि इंद्रपुरी जलाशय प्रोजेक्ट को भी अंतिम मंजूरी मिल गई है।

सोन नदी जल आवंटन
राज्य     आवंटित सोन जल
बिहार     5.75 MAF
झारखंड     2.00 MAF
कुल     7.75 MAF

किन-किन जिलों को मिलेगा लाभ?
बिहार के 8 जिले: इस जलाशय से सोन नहर प्रणाली को निर्बाध पानी मिलेगा, जिससे दक्षिण बिहार के भोजपुर, बक्सर, रोहतास, कैमूर, औरंगाबाद, अरवल, गया और पटना जिलों की लगभग 10 लाख हेक्टेयर कृषि भूमि को सिंचाई की गारंटी मिलेगी।

झारखंड के 2 जिले: पलामू और गढ़वा जैसे गंभीर जल-संकट वाले जिलों को सिंचाई और पीने के लिए पर्याप्त पानी मिलेगा।

बिहार और झारखंड में कहां-कहां से गुजरती है सोन नदी?
झारखंड की सीमा पार कर सोन नदी बिहार के मैदानों में प्रवेश करती है। यह बिहार के 6 मुख्य जिलों से होकर गुजरती है।

READ ALSO  अकेला नहीं है आउटसोर्स कर्मी, उसकी समस्या को सुनने व सुलझाने का तंत्र विकसित किया सरकार ने: मुख्यमंत्री

    रोहतास (डेहरी ऑन सोन, इंद्रपुरी बराज)
    औरंगाबाद (दाउदनगर)
    अरवल
    भोजपुर (आरा) (कोइलवर)
    पटना (मनेर के पास गंगा नदी में विलय)
    बक्सर (रोहतास व भोजपुर के पास का सीमावर्ती क्षेत्र)

अंत में सोन नदी पटना जिले के मनेर (दानापुर के पास) में जाकर गंगा नदी में मिल जाती है।

झारखंड में कहां-कहां से गुजरती है सोन नदी?
झारखंड के उत्तर-पश्चिमी हिस्से में सोन नदी राज्य में प्रवेश करती है और मुख्य रूप से गढ़वा तथा पलामू जिलों की सीमा बनाते हुए गुजरती है।

अगली खबर लोड हो रही है...

Related Articles

Back to top button
Play GK Quiz and Win Coins