छत्तीसगढ़राजनांदगांव जिला

राजनांदगांव : राधा-माधव चरित्र का मनन मानव कल्याण का मार्ग…

By kadwaghut|05 Jun 2026, 11:09 AM
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राजनांदगांव , श्रीसत्यनारायण मंदिर समिति के द्वारा आयोजित 16 दिवसीय पुरुषोत्तम मास सत्संग महोत्सव के तीसरे दिन गुरुवार को अंचल के प्रसिद्ध भगवताचार्य पंडित अर्पित भाई शर्मा ने दो दिवसीय श्रीराधा-माधव चरित्र कथा की व्याख्या करते हुए कहा कि राधा-माधव का चरित्र मानव जीवन को धन्य बनाने वाला है।

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कहा कि सत्संग के बिना जीवन पूर्ण नहीं होता तथा भक्ति, ज्ञान और सत्कर्म की प्राप्ति सत्संग से ही संभव है। सत्संग से विवेक जागृत होता है और जीवन-मृत्यु, सुख-दुख जैसे विषयों की वास्तविक अनुभूति होती है। राधा-माधव चरित्र की विवेचना करते हुए बताया कि एक ब्रह्मस्वरूप ज्योति दो भागों में विभक्त होकर राधा और माधव के रूप में प्रकट हुई। कथा के दौरान उन्होंने राधा रानी और श्रीकृष्ण के दिव्य स्वरूपों का वर्णन करते हुए उनके प्रेम और समर्पण की महिमा बताई।

प्रसाद का अर्थ प्रत्यक्ष साक्षात दर्शन है: प्रसाद की महिमा बताते हुए पंडित शर्मा ने कहा कि प्रसाद शब्द का अर्थ ही प्रत्यक्ष साक्षात दर्शन है। भगवान को अर्पित भोजन जब तुलसी दल के स्पर्श से लौटता है तो वह प्रसाद बन जाता है। भगवान जगन्नाथ के आनंद बाजार प्रसाद का उदाहरण देकर प्रसाद की आध्यात्मिक महत्ता समझाई। कथा के दौरान गज-ग्राह प्रसंग की भी व्याख्या की गई। कहा कि जीवन में अनेक बाधाएं मनुष्य को सत्संग से दूर रखने का प्रयास करती है, किंतु श्रद्धा और भक्ति से इन पर विजय प्राप्त की जा सकती है।

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