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गर्भावस्था में नियमित जांच है जरूरी, सुरक्षित मातृत्व के लिए जागरूकता पर जोर: शुक्ल

By Admin|08 Jun 2026, 6:06 PM
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गर्भावस्था में समय पर जांच एवं उच्च जोखिम स्थितियों की शीघ्र पहचान से सुरक्षित मातृत्व होता है सुनिश्चित: उप मुख्यमंत्री शुक्ल

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प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान के 10 वर्ष पूर्ण होने पर 9 जून को प्रदेश में विशेष मातृत्व स्वास्थ्य शिविर होंगे आयोजित

शिविर का लाभ लेने की अपील

भोपाल

उप मुख्यमंत्री श्री राजेन्द्र शुक्ल ने कहा कि सुरक्षित मातृत्व प्रत्येक महिला का अधिकार है। राज्य सरकार गर्भवती महिलाओं को गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने प्रदेश की सभी गर्भवती महिलाओं एवं उनके परिजनों से अपील की है कि वे 9 जून को आयोजित विशेष प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान शिविरों में पहुंचकर निःशुल्क जांच, परामर्श एवं उपचार सुविधाओं का लाभ अवश्य लें। उन्होंने कहा कि गर्भावस्था दी समय पर जांच एवं उच्च जोखिम स्थितियों की शीघ्र पहचान से मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में कमी लाई जा सकती है और सुरक्षित मातृत्व सुनिश्चित किया जा सकता है। उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल ने कहा है कि इस अभियान को जन-आंदोलन के रूप में संचालित करते हुए प्रत्येक गर्भवती महिला तक गुणवत्तापूर्ण प्रसवपूर्व सेवाओं की पहुंच सुनिश्चित की जाए, जिससे मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में और कमी लाई जा सके।

प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान में 2.94 लाख उच्च जोखिम गर्भवती महिलाओं की पहचान कर उचित उपचार का किया गया प्रबंधन

प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान (पीएमएसएमए) के अंतर्गत मध्यप्रदेश में मातृ स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने की दिशा में उल्लेखनीय उपलब्धियां प्राप्त हुई हैं। वित्तीय वर्ष 2025-26 में अभियान के तहत पंजीकृत 14.31 लाख गर्भवती महिलाओं में से 10.25 लाख महिलाओं की प्रसवपूर्व जांच (एएनसी) की गई, जो कुल पंजीकृत गर्भवतियों का लगभग 72 प्रतिशत है। जांच के दौरान 2.94 लाख महिलाओं को उच्च जोखिम गर्भावस्था (हाई रिस्क प्रेगनेंसी-एचआरपी) के रूप में चिन्हित किया गया, जिनमें से 2.60 लाख अर्थात 88 प्रतिशत महिलाओं को निर्धारित प्रोटोकॉल के अनुसार आवश्यक उपचार, प्रबंधन एवं रेफरल सेवाएं उपलब्ध कराई गईं।

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अपर मिशन संचालक, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन, सुश्री दिशा प्रणय नागवंशी ने बताया कि प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान के सफलतापूर्वक 10 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर 9 जून को प्रदेश के सभी जिलों में विशेष पीएमएसएमए शिविर आयोजित किए जाएंगे। राज्य के सभी शासकीय चिकित्सा महाविद्यालयों, जिला चिकित्सालयों, सिविल अस्पतालों, सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों, प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों तथा आयुष्मान आरोग्य मंदिरों में गर्भवती महिलाओं को गुणवत्तापूर्ण मातृ स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान की जाएंगी। विशेष शिविरों में गर्भवती महिलाओं की प्रसवपूर्व एवं प्रसवोत्तर जांच, नवीन एवं छूटी हुई गर्भवतियों का पंजीयन, उच्च जोखिम गर्भवती महिलाओं की पहचान, उपचार एवं नियमित फॉलोअप सुनिश्चित किया जाएगा। महिलाओं की रक्तचाप, वजन, बीएमआई, मेडिकल एवं प्रसूति इतिहास की जांच के साथ ही आवश्यक प्रयोगशाला परीक्षण भी किए जाएंगे।

अभियान के अंतर्गत हीमोग्लोबिन, यूरिन एल्बुमिन एवं शुगर, एचआईवी, हेपेटाइटिस-बी, सिफलिस, मलेरिया, सिकल सेल स्क्रीनिंग, ब्लड ग्रुपिंग और ओजीटीटी जैसी महत्वपूर्ण जांचें उपलब्ध कराई जाएंगी। आवश्यकता अनुसार सोनोग्राफी एवं विशेषज्ञ परामर्श की सुविधा भी प्रदान की जाएगी। सभी स्वास्थ्य संस्थानों में आयरन-फोलिक एसिड, कैल्शियम सहित आवश्यक दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित की गई है।

उच्च जोखिम गर्भवती महिलाओं तक सेवाओं की पहुंच सुनिश्चित करने के लिए आशा कार्यकर्ताओं, एएनएम, सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारियों तथा सुमन हेल्प डेस्क की सक्रिय भागीदारी रहेगी। जरूरतमंद महिलाओं के लिए 108 एम्बुलेंस के माध्यम से निःशुल्क परिवहन सुविधा भी उपलब्ध कराई जाएगी। प्रदेशभर में व्यापक जन-जागरूकता अभियान भी संचालित किया जाएगा। ग्राम स्तर पर प्रचार-प्रसार, सोशल मीडिया अभियान, वीएचएसएनडी, जन आरोग्य समितियों, स्व-सहायता समूहों एवं पंचायती राज संस्थाओं के माध्यम से सुरक्षित मातृत्व के प्रति जागरूकता बढ़ाई जाएगी।

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