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डिप्टी CM विजय चौधरी की अफसरों को चेतावनी, बाढ़ तैयारियों में कोताही बर्दाश्त नहीं

By Admin|16 May 2026, 12:41 PM
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 पटना

बिहार में आगामी मानसून के दौरान संभावित बाढ़ और सुखाड़ जैसी प्राकृतिक आपदाओं से निपटने के लिए राज्य सरकार पूरी तरह से ऐक्शन मोड में आ गई है। उपमुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी ने अधिकारियों को दो टूक शब्दों में सख्त चेतावनी दी है। उन्होंने स्पष्ट कर दिया है कि बचाव की तैयारियों में किसी भी स्तर पर कोताही अब बिल्कुल बर्दाश्त नहीं की जाएगी। बेहतर काम करने वाले अधिकारियों की जहां एक तरफ पीठ थपथपाई जाएगी और उन्हें बधाई दी जाएगी, वहीं जानबूझकर लापरवाही और कार्यों में कोताही बरतने वाले अफसरों और कर्मचारियों पर सरकार का डंडा चलेगा और उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

सिंचाई भवन में हुई उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक
प्राप्त जानकारी के अनुसार, शुक्रवार को राजधानी पटना के सिंचाई भवन में बाढ़ और सुखाड़ से पूर्व की तैयारियों को लेकर एक बेहद अहम और उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की गई। इस बैठक की अध्यक्षता उपमुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी ने की। बैठक का मुख्य उद्देश्य राज्य को प्राकृतिक आपदाओं से बचाने के लिए समय रहते पुख्ता इंतजाम सुनिश्चित करना था। डिप्टी सीएम ने सख्त निर्देश देते हुए कहा कि संभावित बाढ़ से बचाव और सुखाड़ से निपटने की सभी आवश्यक तैयारियां निर्धारित समय सीमा से पहले ही हर हाल में पूरी कर ली जाएं।

तटबंधों पर होगी पेट्रोलिंग
समीक्षा बैठक के दौरान उपमुख्यमंत्री ने राज्य के विभिन्न बाढ़ प्रभावित और संवेदनशील क्षेत्रों में चल रहे कटाव निरोधी कार्यों की प्रगति की गहन समीक्षा की। उन्होंने तटबंधों की मरम्मत, उनके उचित अनुरक्षण और बाढ़ सुरक्षात्मक सामग्री के प्राप्त इंतेजाम करने के कड़े निर्देश दिए। डिप्टी सीएम ने जोर देकर कहा कि बाढ़ की अवधि के दौरान तटबंधों की पूरी लंबाई पर अधिकारियों द्वारा पूरी मुस्तैदी के साथ पेट्रोलिंग की जाए, ताकि किसी भी अप्रिय स्थिति को समय रहते टाला जा सके और जानमाल का नुकसान न हो।

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सचिव ने बाढ़ प्रबंधन और सिंचाई व्यवस्था से कराया अवगत
इस अहम बैठक में जल संसाधन विभाग के वरीय अधिकारी भी मौजूद रहे। इससे पहले विभाग के सचिव डॉ. चंद्रशेखर सिंह ने उपमुख्यमंत्री को बाढ़ प्रबंधन और सिंचाई व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ करने के लिए की जा रही सभी तैयारियों से विस्तार से अवगत कराया। उन्होंने बताया कि संवेदनशील स्थलों की कड़ी निगरानी की जा रही है। सरकार का यह कड़ा रुख इस बात का साफ संकेत है कि इस बार मानसूनी आपदाओं को लेकर प्रशासन किसी भी तरह का कोई रिस्क लेने के मूड में नहीं है।

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