मध्य प्रदेश

लगभग 4.8 लाख पेंडिंग केस, मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में जमानत अपीलों के लिए 10 जज करेंगे सुनवाई

By Admin|20 Sep 2025, 9:02 AM
f X W

जबलपुर
 मध्य प्रदेश हाई कोर्ट में पहली बार 10 जज केवल जमानत याचिकाओं की सुनवाई करने के लिए बैठेंगे. मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश संजीव सचदेवा ने एक प्रशासनिक आदेश दिया है, जिसे हाई कोर्ट की वेबसाइट पर देखा जा सकता है. इसमें शनिवार को 10 जज अपनी-अपनी अदालत में बैठेंगे. वे केवल जमानत याचिकाओं की सुनवाई करेंगे.

Advertisement
Advertisement

एमपी हाई कोर्ट में फिलहाल जमानत याचिकाओं के 3000 से ज्यादा मामले लंबित हैं. इन्हीं मामलों में लोगों को न्याय देने के लिए हाईकोर्ट ने यह व्यवस्था की है. हमारी न्याय व्यवस्था की प्रक्रिया में जमानत का प्रावधान है. जस्टिस अचल कुमार पालीवाल, जस्टिस प्रमोद कुमार अग्रवाल, जस्टिस देवनारायण मिश्रा, जस्टिस दीपक खोत, जस्टिस अजय कुमार निरंकारी, जस्टिस हिमांशु जोशी, जस्टिस रामकुमार चौबे, जस्टिस रत्नेशचंद्र सिंह बिसेन, जस्टिस बीपी शर्मा और जस्टिस प्रदीप मित्तल कल 20 सितंबर को केवल जमानत याचिकाएं सुनेंगे.

जबलपुर की मुख्य पीठ में फिलहाल जमानत याचिकाओं के लंबित हैं 3000 से ज्यादा मामले

मान लीजिए किसी के खिलाफ किसी थाने में कोई एफआईआर दर्ज होती है. जिसके बाद पुलिस आरोपी को पकड़ती है. पकड़ने के बाद पुलिस आरोपी के ऊपर लगे आरोप का एक चालान तैयार करती है, जिसे कोर्ट में पेश किया जाता है. धाराओं के आधार पर यह तय होता है कि उसे कौन सी कोर्ट जमानत दे सकती है. गंभीर धाराओं में मामला हाईकोर्ट तक पहुंचता है.

जमानत की प्रक्रिया में आरोपी को अपने किसी ऐसे जानकार को पेश करना होता है, जिसके पास कोई स्थाई संपत्ति हो. स्थाई संपत्ति के कागजात के आधार पर आरोपी को जमानत दे दी जाती है. जमानत में यह शर्त होती है कि आरोपी को हर पेशी पर कोर्ट में आना होगा. इसके बाद ट्रायल चलती है. आरोपी पर लगे आरोप को गवाह और सबूत के आधार पर सिद्ध किया जाता है और इसके बाद सजा होती है या आरोपी बेगुनाह साबित होता है.

READ ALSO  चंचल शेखर को खेल विभाग का डायरेक्टर, अंशुमन यादव बने ADG इंटेलिजेंस; 4 IPS अधिकारियों के तबादले

जुर्म तय नहीं होने तक आरोपी को जेल में बंद रखना सही नहीं

न्याय व्यवस्था की प्रक्रिया सरल है लेकिन सबूत और गवाह को इकट्ठा करने में काफी समय लगता है. इतने दिनों तक किसी भी आरोपी को जेल में बंद रखना सही नहीं है, क्योंकि अब तक यह तय नहीं होता कि उसने ही जुर्म किया है. इसलिए हमारी न्याय व्यवस्था जमानत का प्रावधान देती है. इसमें आरोपी को अपने परिचय के किसी ऐसे आदमी को कोर्ट में लेकर आना होता है जिसके पास कोई स्थाई संपत्ति हो. संपत्ति के कागजात के आधार पर आरोपी को जमानत मिल जाती है लेकिन उसे समय-समय पर कोर्ट में आना पड़ता है. इसके बाद यदि उसे सजा होती है तो वह जेल जाता है और आरोप सिद्ध नहीं होने पर वह जेल से छूट जाता है.

मध्य प्रदेश हाई कोर्ट में लगभग पेंडिंग हैं चार लाख 80 हजार केस

यह प्रक्रिया सुनने में या पढ़ने में जितनी सरल लगे लेकिन उतनी सरल है नहीं. क्योंकि हमारी अदालतों में लाखों केस पेंडिंग हैं. मध्य प्रदेश हाई कोर्ट में लगभग चार लाख 80 हजार केस पेंडिंग हैं. ऐसी स्थिति में यदि किसी आरोपी को पुलिस ने पकड़ा और उसे जेल भेज दिया गया. यदि वह जमानत के लिए हाई कोर्ट में जमानत याचिका लगाता है. लेकिन हाई कोर्ट में महज 41 जज हैं और रोज उनके पास सैकड़ो मामले होते हैं. ऐसी स्थिति में जेल में बंद विचाराधीन कैदियों को जमानत याचिका पर सुनवाई ही नहीं हो पाती.

स्पेशल कोर्ट से हजारों लोगों को मिलेगा जमानत का फायदा

READ ALSO  खेत का 5 प्रतिशत हिस्सा जल संरक्षण के लिए देने की किसानों की अनूठी पहल बनी मिसाल

एमपी हाईकोर्ट में प्रैक्टिस करने वाले वकील एडवोकेट दीपक ने बताया कि यह प्रक्रिया यदि लगातार चलती रही तो हजारों लोगों को जमानत का फायदा मिलेगा और न्याय की प्रक्रिया तेज होगी. इसके साथ ही जिलों को भी राहत मिलेगी. क्योंकि हमारी जेलों में भी अभी क्षमता से ज्यादा कैदी बंद है.

 

अगली खबर लोड हो रही है...

Related Articles

Back to top button
Play GK Quiz and Win Coins