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CG : संस्कार शिविर में बच्चे सीख रहे जीवन जीने की कला …

By kadwaghut|07 Jun 2026, 3:22 PM
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रायपुर । मालवीय रोड स्थित आदिनाथ दिगंबर जैन बड़ा मंदिर (लघु तीर्थ) में 1 से 10 जून तक आयोजित 10 दिवसीय विशेष ‘ग्रीष्मकालीन श्रमण संस्कृति संस्कार शिक्षण शिविर’ सफलता के नए सोपान तय कर रहा है। दिगंबर जैन मंदिर पंचायत ट्रस्ट (कार्यसमिति) एवं आदिनाथ विद्या धार्मिक पाठशाला के तत्वावधान में आयोजित इस शिविर में प्रतिदिन बड़ी संख्या में बच्चे भाग ले रहे हैं और अपने जीवन को सुसंस्कारी बनाने का अटूट संकल्प ले रहे हैं।

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शिविर के शैक्षणिक सत्र में सांगानेर (जयपुर) से आए प्रतिष्ठित विद्वान द्वारा बच्चों को बहुत ही सरल, सुबोध और संक्षिप्त परिभाषाओं के माध्यम से ‘बाल बोध भाग-1’ और ‘भाग-2’ का गहन अध्ययन कराया जा रहा है। शास्त्री जी अपनी अनूठी शिक्षण शैली से कठिन और क्लिष्ट धार्मिक सिद्धांतों को भी खेल-खेल में और अत्यंत आसान शब्दों में बच्चों के मानस पटल पर उतार रहे हैं, जिससे बच्चों में धर्म के प्रति रुचि लगातार बढ़ रही है।

शिविर की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यहाँ बच्चों को केवल किताबी ज्ञान ही नहीं, बल्कि व्यावहारिक जीवन जीने की कला (आर्ट ऑफ लिविंग) सिखाई जा रही है। पंडित शरद जैन शास्त्री द्वारा बच्चों को रोज़मर्रा के जीवन में उपयोगी निम्नलिखित महत्वपूर्ण बातें सिखाई और संकल्पित कराई जा रही हैं।

भारतीय संस्कृति के मूल सिद्धांतों के अनुसार माता-पिता, गुरुजनों और घर आए मेहमानों (अतिथियों) का आदर-सत्कार करने के संस्कार दिए जा रहे हैं। बच्चे अपने माता-पिता की हर बात को सहर्ष स्वीकारें, उनका कहना मानें और परिवार में अनुशासन से रहें।

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आज के आधुनिक दौर की सबसे बड़ी समस्या ‘मोबाइल की लत’ को कम करने के लिए बच्चों को विशेष रूप से प्रेरित किया जा रहा है। उन्हें मोबाइल के दुष्प्रभावों से अवगत कराते हुए रचनात्मक कार्यों की ओर मोड़ा जा रहा है। इसके अलावा बच्चों को आदर्श दैनिक दिनचर्या, सदाचार, शुद्ध शाकाहार और नैतिक मूल्यों से जुड़ी कई नई व ज्ञानवर्धक बातें सिखाई जा रही हैं।

समाज के प्रबुद्ध जनों ने की मुक्त कंठ से सराहना
जैन समाज के प्रबुद्ध जनों और वरिष्ठ श्रावकों ने इस भव्य आयोजन की मुक्त कंठ से सराहना की है। समाज के प्रतिनिधियों का कहना है कि आज के भौतिकवादी युग में ऐसे संस्कार शिविर बच्चों को अपनी जड़ों, जैन धर्म और गौरवशाली संस्कृति से जोड़ने में मील का पत्थर साबित हो रहे हैं। शिविरार्थियों के लिए प्रतिदिन की तरह सात्विक स्वल्पाहार की व्यवस्था भी सुचारू रूप से की जा रही है।

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