मध्य प्रदेशराज्‍य

खंडवा की अनोखी पहल: पहाड़ों के बाद अब सड़क किनारे कंटूर बनाकर सहेजा जाएगा बारिश का पानी

By Admin|13 May 2026, 10:12 AM
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खंडवा
 जल संरक्षण और भूजल संवर्धन की दिशा में खंडवा नई पहचान बना रहा है. जल गंगा संवर्धन अभियान के तहत जिले में वर्षा जल के अधिकतम संचयन के लिए अनोखी पहल की जा रही है. ग्रामीण क्षेत्रों में पहाड़ों पर लाखों कंटूर खोदने के बाद अब सड़कों के किनारों पर भी कंटूर (गड्ढा) खोदकर जल संरचनाएं तैयार की जा रही हैं, ताकि बारिश का पानी व्यर्थ बहने के बजाय जमीन में समा सके और भूजल स्तर में वृद्धि हो।

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प्रदेश में खंडवा का पहला स्थान
जल संचय जन भागीदारी अभियान में खंडवा ने उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की है. जल शक्ति मंत्रालय द्वारा जारी रैंकिंग में खंडवा देशभर में दूसरे स्थान पर पहुंचा है, जबकि जल गंगा संवर्धन अभियान में खंडवा पूरे मध्य प्रदेश में प्रथम स्थान पर चल रहा है. खंडवा में प्रशासन द्वारा जल संरक्षण को जन आंदोलन बनाने के उद्देश्य से लगातार व्यापक स्तर पर कार्य किए जा रहे हैं।

मिशन मोड में चल रहा अभियान
वर्षा जल संरक्षण और जल बचाने के लिए जिला प्रशासन मिशन मोड में अभियान चला रहा है. कलेक्टर ऋषव गुप्ता ने बताया कि "जिले में शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में व्यापक स्तर पर जल संरचनाओं का निर्माण किया जा रहा है. खेत तालाब, कुएं रिचार्ज पिट, अमृत सरोवर, रिचार्ज शाफ्ट, बोरवेल रिचार्ज सिस्टम और रूफटॉप वर्षा जल संचयन जैसी योजनाओं पर तेजी से काम हो रहा है।

सड़कों के किनारों पर भी कंटूर
पुराने तालाबों, जलाशयों और गड्ढों को भी नए तरीके से ठीक किया जा रहा है. अब सड़कों के किनारों पर भी कंटूर बनाए जा रहे हैं, जिससे बारिश का पानी सीधे नालों में बहने के बजाय जमीन में रिस सके. इससे आने वाले समय में भूजल स्तर में सुधार होने के साथ जल संकट से भी राहत मिलने की उम्मीद है।

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अब तक एक लाख कंटूर खोदे
जिले में अब तक एक लाख से अधिक जल संरचनाओं का निर्माण किया जा चुका है, जबकि करीब ढाई लाख संरचनाएं तैयार करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है. वर्ष 2025 में भी खंडवा ने जल संचय करने वाले जिलों में देश में पहला स्थान हासिल किया था. प्रशासन का मानना है कि जनभागीदारी और सतत प्रयासों से खंडवा आने वाले वर्षों में जल संरक्षण का राष्ट्रीय मॉडल बन सकता है।

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