मध्य प्रदेशराज्‍य

CCTV और AI की मदद से अपराधियों पर नकेल, विदिशा पुलिस की नई पहल

By Admin|13 Apr 2026, 10:01 AM
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विदिशा
जिले में अब संगीन वारदातों को अंजाम देने वाले शातिर अपराधियों की खैर नहीं है। पुलिस विभाग अपराधियों पर नकेल कसने के लिए तकनीक का सहारा लेते हुए एक ऐसी डिजिटल कुंडली तैयार कर रहा है, जिससे बच पाना लगभग नामुमकिन होगा। इसके लिए विभाग द्वारा विशेष 'मेजरमेंट कलेक्शन यूनिट' का गठन किया गया है। यह यूनिट अपराधियों का बायोडाटा ठीक उसी तरह तैयार कर रही है, जैसे आम नागरिकों का आधार कार्ड बनाया जाता है। शुरुआती चरण में गंभीर अपराधों में संलिप्त, संपत्ति संबंधी अपराधी और कोर्ट में पेशी पर आने वाले बंदियों का संपूर्ण विवरण दर्ज करना शुरू कर दिया गया है।

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पुतलियों की स्कैनिंग और 'चाल' का भी होगा रिकॉर्ड
पुलिस मुख्यालय से प्राप्त अत्याधुनिक उपकरणों के माध्यम से अब अपराधियों की पहचान के लिए केवल नाम-पता काफी नहीं होगा। मेजरमेंट कलेक्शन यूनिट में अपराधियों की सटीक ऊंचाई, चेहरे के चार अलग-अलग कोणों (एंगल्स) से लिए गए उच्च गुणवत्ता वाले फोटोग्राफ और पूरे शरीर की कद-काठी का रिकॉर्ड रखा जा रहा है। तकनीक का स्तर इतना सूक्ष्म है कि अपराधियों की आंखों की पुतलियों (आईरिस रेटिना) की स्कैनिंग भी की जा रही है। इसके अलावा, अपराधी के चलने का तरीका यानी उसकी 'चाल' (गैट एनालिसिस) को भी वीडियो के माध्यम से रिकॉर्ड किया जा रहा है, ताकि हुलिया बदलने पर भी उसे पहचाना जा सके।

चौराहों पर लगे कैमरों से होगी लाइव ट्रैकिंग
इस हाईटेक डाटा का सबसे बड़ा लाभ अपराधियों की धरपकड़ में मिलेगा। शहर के प्रमुख चौराहों और संवेदनशील स्थानों पर लगे सीसीटीवी कैमरों को इस डाटाबेस से जोड़ा जाएगा। यदि कोई वांछित अपराधी फरार होता है, तो कैमरों में उसकी चाल-ढाल या चेहरे की हल्की सी झलक मिलते ही सिस्टम पुलिस को अलर्ट कर देगा। इतना ही नहीं, यदि अपराधी किसी स्थान पर अपने फिंगर प्रिंट का उपयोग करता है या किसी वारदात स्थल पर उसके निशान मिलते हैं, तो तत्काल उसकी कुंडली सामने आ जाएगी।

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निजता के अधिकार के चलते पुलिस ने विकसित किया अपना सिस्टम
तकनीकी विशेषज्ञों के अनुसार, अपराधियों का यह डाटा आधार के सर्वर से भी लिया जा सकता था, लेकिन 'राइट टू प्राइवेसी' (निजता के अधिकार) और कानूनी पेचिदगियों के चलते पुलिस विभाग आधार का डाटा साझा नहीं कर सकता। यही कारण है कि पुलिस विभाग अपना स्वतंत्र डिजिटल तंत्र विकसित कर रहा है। विदिशा जैसे जिलों से शुरू हुआ यह डाटा सीधे स्टेट क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो (एसटीआरबी) और नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) से लिंक किया जा रहा है, जिससे अपराधी एक राज्य से दूसरे राज्य में भागकर भी अपनी पहचान नहीं छुपा पाएगा।

हर थाने में लगेगी बायोमेट्रिक मशीन
पुलिस की योजना इस व्यवस्था को भविष्य में प्रत्येक थाने तक विस्तार देने की है। वर्तमान में यह जिला मुख्यालय स्तर पर संचालित है, लेकिन आने वाले समय में हर थाने में फिंगर प्रिंट लेने वाली बायोमेट्रिक मशीनें और एचडी कैमरे लगाए जाएंगे। हालांकि, इसके लिए पर्याप्त तकनीकी स्टाफ की आवश्यकता होगी। स्टाफ की उपलब्धता सुनिश्चित होते ही हर थाने में आने वाले संदिग्धों और अपराधियों का डाटा तत्काल पोर्टल पर अपलोड होने लगेगा।

अपराधियों की प्रभावी मॉनिटरिंग और उनकी धरपकड़ को त्वरित बनाने के लिए मेजरमेंट कलेक्शन यूनिट बनाई गई है। इसमें आधुनिक उपकरण स्थापित किए जा चुके हैं। वर्तमान में गंभीर और संपत्ति संबंधी अपराधियों का डाटा जुटाया जा रहा है, जिसे नेशनल ग्रिड से जोड़ा जा रहा है। पर्याप्त स्टाफ मिलते ही यह व्यवस्था जिले के सभी थानों में अनिवार्य रूप से लागू की जाएगी। – रोहित काशवानी, एसपी, विदिशा

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