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दोनों जिलों में 1.67 लाख क्विंटल से ज्यादा धान का अंतर, 54 केंद्रों में ही करीब 31 करोड़ रुपए का शॉर्टेज
राजनांदगांव/कवर्धा। धान खरीदी और उठाव व्यवस्था को लेकर राजनांदगांव और कवर्धा जिले के आंकड़े चौंकाने वाले सामने आए हैं। दोनों जिलों में वर्ष 2025-26 की खरीदी के बाद उपार्जन केंद्रों में धान के शॉर्टेज ने प्रशासनिक व्यवस्था पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार उपलब्ध आंकड़ों में राजनांदगांव और कवर्धा मिलाकर कुल 1 लाख 67 हजार 234.94 क्विंटल धान का शॉर्टेज सामने आया है। यदि इसे 3100 रुपए प्रति क्विंटल के हिसाब से जोड़ा जाए, तो यह राशि लगभग 51 करोड़ 84 लाख रुपए तक पहुंचती है।

सबसे गंभीर बात यह है कि दोनों जिलों के चुनिंदा संवेदनशील केंद्रों में ही शॉर्टेज का बड़ा हिस्सा दिखाई दे रहा है। राजनांदगांव के 27 और कवर्धा के 27 केंद्रों को मिलाकर कुल 54 केंद्रों में ही 1 लाख 681.36 क्विंटल धान का अंतर सामने आया है। इसकी अनुमानित कीमत करीब 31 करोड़ 21 लाख रुपए आंकी जा रही है।
राजनांदगांव में 85 समितियों में 20.43 करोड़ का शॉर्टेज राजनांदगांव जिले में धान खरीदी व्यवस्था को लेकर सामने आए आंकड़ों के अनुसार जिले की 96 समितियों में से 85 समितियों में धान का शॉर्टेज/मिलिंग बाकी बताया गया है। यहां कुल 65,927 क्विंटल धान का अंतर सामने आया है। 3100 रुपए प्रति क्विंटल के हिसाब से इसकी कीमत लगभग 20 करोड़ 43 लाख 24 हजार रुपए बैठती है।
राजनांदगांव में सबसे ज्यादा गड़बड़ी की आशंका उन 27 समितियों में जताई जा रही है, जहां कुल 40,328 क्विंटल धान का शॉर्टेज सामने आया है। इसकी अनुमानित कीमत लगभग 12 करोड़ 50 लाख 70 हजार रुपए है। यानी जिले के कुल शॉर्टेज का करीब 63 प्रतिशत हिस्सा केवल 27 समितियों में ही दर्ज है।
राजनांदगांव में जिन समितियों में अधिक शॉर्टेज बताया गया है, उनमें मुसराकला, घुमका, बनहनी चारभाठा, लाटमेटा, कुहीकला, सीतागोटा, बागरेसा, छुरिया और उपरवाह जैसे केंद्र प्रमुख हैं। इन समितियों में रिकॉर्ड, उठाव, मिलिंग और वास्तविक भंडारण की स्थिति को लेकर जांच की मांग तेज हो गई है।
कवर्धा में 108 केंद्रों में 31.40 करोड़ का धान अंतर में
कवर्धा जिले के आंकड़े भी बेहद गंभीर हैं। वर्ष 2025-26 में जिले के 108 उपार्जन केंद्रों में कुल 63,72,351.20 क्विंटल धान प्राप्त हुआ। इसके मुकाबले 62,71,043.26 क्विंटल धान जारी/उठाव में दिखाया गया। इस आधार पर कवर्धा जिले में कुल 1,01,307.94 क्विंटल धान का शॉर्टेज सामने आया है।
3100 रुपए प्रति क्विंटल के हिसाब से कवर्धा जिले में यह शॉर्टेज लगभग 31 करोड़ 40 लाख रुपए का बैठता है। रिपोर्ट के अनुसार शॉर्टेज में मोटा धान 29,588.07 क्विंटल, पतला धान 33,971.25 क्विंटल और सरना धान 37,748.62 क्विंटल शामिल है।
कवर्धा जिले में भी पहले 27 केंद्रों में ही बड़ा अंतर सामने आया है। इन 27 केंद्रों में कुल 60,353.36 क्विंटल धान का शॉर्टेज दर्ज है। इसकी अनुमानित कीमत करीब 18 करोड़ 71 लाख रुपए है। यह जिले के कुल शॉर्टेज का लगभग 59.57 प्रतिशत है।
कवर्धा में सबसे अधिक शॉर्टेज वाले केंद्रों में धरमगढ़, सुरजपुरा, कामठी, जुनवानी, रणवीरपुर, भीमीनपुर, कुकदा, पेंड्रीकला, अतरवाही और राजानवागांव जैसे केंद्र शामिल हैं। धरमगढ़ में अकेले 5,164.82 क्विंटल, सुरजपुरा में 4,668.10 क्विंटल, कामठी में 4,067.64 क्विंटल और जुनवानी में 3,981.87 क्विंटल धान का शॉर्टेज बताया गया है।
दो जिलों का कुल आंकड़ा
| जिला | कुल शॉर्टेज | अनुमानित राशि |
| राजनांदगांव | 65,927 क्विंटल | करीब 20.43 करोड़ रुपए |
| कवर्धा | 1,01,307.94 क्विंटल | करीब 31.40 करोड़ रुपए |
| कुल | 1,67,234.94 क्विंटल | करीब 51.84 करोड़ रुपए |
54 केंद्रों में ही 31 करोड़ से अधिक का अंतर
| जिला | संवेदनशील केंद्र | शॉर्टेज | अनुमानित राशि |
| राजनांदगांव | 27 | 40,328 क्विंटल | करीब 12.50 करोड़ रुपए |
| कवर्धा | 27 | 60,353.36 क्विंटल | करीब 18.71 करोड़ रुपए |
| कुल | 54 | 1,00,681.36 क्विंटल | करीब 31.21 करोड़ रुपए |
उठ रहे बड़े सवाल
अब सवाल यह उठ रहा है कि खरीदी के बाद इतना धान आखिर गया कहां? क्या यह अंतर सुखत, परिवहन, मिलिंग और रिकॉर्ड की गड़बड़ी के कारण है, या फिर इसके पीछे बड़ी लापरवाही और अनियमितता छिपी है। कई समितियों में धान का उठाव शेष दिख रहा है, जबकि मौके की स्थिति को लेकर अलग-अलग चर्चाएं सामने आ रही हैं।
जानकारी यह भी सामने आ रही है कि शॉर्टेज सामने आने के बाद कुछ समितियों में कार्रवाई से बचने के लिए मिलर्स से डीओ और कागजी प्रक्रिया पूरी कराने की कोशिशें तेज हो गई हैं। हालांकि प्रशासनिक जांच और भौतिक सत्यापन के बाद ही वास्तविक स्थिति साफ हो पाएगी।
राजनांदगांव और कवर्धा दोनों जिलों के आंकड़े यह संकेत दे रहे हैं कि धान खरीदी के बाद भंडारण, उठाव और मिलिंग की पूरी प्रक्रिया की गहन जांच जरूरी है। यदि समय रहते केंद्रवार जांच नहीं हुई, तो करोड़ों रुपए के इस धान अंतर की जिम्मेदारी तय करना मुश्किल हो सकता है।
दोनों जिलों में कुल शॉर्टेज: 1,67,234.94 क्विंटल
कुल अनुमानित राशि: करीब 51.84 करोड़ रुपए
राजनांदगांव में शॉर्टेज: 65,927 क्विंटल
कवर्धा में शॉर्टेज: 1,01,307.94 क्विंटल
54 संवेदनशील केंद्रों में शॉर्टेज: 1,00,681.36 क्विंटल
54 केंद्रों की अनुमानित राशि: करीब 31.21 करोड़ रुपए
गणना का आधार: 3100 रुपए प्रति क्विंटल
धान शॉर्टेज को लाभांश से समायोजित नहीं होने देंगे: भरत वर्मा
किसानों से अपील—अपनी सोसायटी में जाकर लाभांश की जानकारी लें, गड़बड़ी मिलने पर होगी जांच और कार्रवाई

राजनांदगांव।धान खरीदी में समितियों में सामने आ रहे शॉर्टेज के मामले को लेकर जिला सहकारी केंद्रीय बैंक के उपाध्यक्ष और भाजपा के वरिष्ठ नेता भरत वर्मा ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा है कि सोसायटियों में धान का शॉर्टेज दिखाकर किसानों को मिलने वाले लाभांश से समायोजन नहीं किया जाएगा। यदि कहीं इस तरह की गड़बड़ी सामने आती है, तो उसकी जांच कराकर दोषियों पर कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
भरत वर्मा ने किसानों से अपील करते हुए कहा कि प्रत्येक किसान सदस्य का सोसायटी में शेयर होता है, इसलिए किसानों को अपनी-अपनी सोसायटी में जाकर लाभांश की जानकारी लेनी चाहिए। उन्होंने कहा कि किसान यह जरूर देखें कि कहीं उनके हिस्से का लाभांश धान शॉर्टेज के नाम पर समायोजित तो नहीं किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि जिलेभर की सोसायटियों की जांच शुरू कर दी गई है और जांच में कई बातें सामने आ रही हैं। कुछ समितियों में जानबूझकर अधिक मात्रा में धान शॉर्टेज दिखाने की शिकायतें मिल रही हैं, जो गंभीर मामला है। ऐसे मामलों में जिला कलेक्टर के माध्यम से कार्रवाई कराई जाएगी।
भरत वर्मा ने कहा कि राजनांदगांव, खैरागढ़, कवर्धा और मोहला-मानपुर चारों जिले जिला सहकारी केंद्रीय बैंक राजनांदगांव से जुड़े हुए हैं। ऐसे में धान खरीदी और शॉर्टेज से जुड़े मामलों की गंभीरता से जांच जरूरी है। उन्होंने कहा कि जहां भी जानबूझकर शॉर्टेज दिखाकर शासन और किसानों को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की गई है, वहां दोषियों से राशि की वसूली भी की जानी चाहिए।
वर्मा ने स्पष्ट कहा कि सोसायटी में किसानों का पैसा और हिस्सा जुड़ा होता है। यदि कोई समिति धान शॉर्टेज के नाम पर लाभांश को प्रभावित करती है, तो यह किसानों के हितों के खिलाफ है। उन्होंने किसानों से कहा कि वे अपने समिति प्रबंधक से पूछकर पूरी जानकारी लें और अपने लाभांश को नुकसान न होने दें।
उन्होंने आगे कहा कि यदि किसी भी समिति में इस प्रकार की हरकत की गई है, तो समिति स्तर पर प्रस्ताव कर मामला जिला सहकारी केंद्रीय बैंक को भेजा जाए। जांच में जो भी व्यक्ति दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
मुख्य बातें:
भरत वर्मा का बयान: धान शॉर्टेज को किसानों के लाभांश से समायोजित नहीं किया जाएगा।
किसानों से अपील: अपनी सोसायटी में जाकर लाभांश और शेयर की जानकारी लें।
जांच: जिलेभर की सोसायटियों की जांच शुरू।
कार्रवाई: गड़बड़ी मिलने पर कलेक्टर और जिला सहकारी केंद्रीय बैंक के माध्यम से कार्रवाई।
मामला: धान खरीदी में शॉर्टेज दिखाकर लाभांश प्रभावित करने की आशंका।
