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‘ऑपरेशन जमुहार’ में पुलिस का बड़ा एक्शन, ट्रक से 88 किलो अफीम बरामद

By Admin|11 Jun 2026, 2:41 PM
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 जयपुर
राजस्थान पुलिस की एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स ने महानिदेशक पुलिस श्री राजीव कुमार शर्मा के निर्देशानुसार कार्रवाई करते हुए नशे के खिलाफ अपने अभियान में एक और ऐतिहासिक सफलता हासिल की है। इस कार्रवाई में मणिपुर से उत्तर भारत के रास्ते राजस्थान लाई जा रही करीब 90 किलोग्राम अवैध अफीम के दूध की खेप जब्त की है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में इसकी अनुमानित कीमत 4.50 करोड़ रुपये आंकी गई है। हरियाणा के सिरसा जिले में हरियाणा पुलिस के सहयोग से अंजाम दी गई यह कार्रवाई हाल के वर्षों में एएनटीएफ की सबसे बड़ी और प्रभावशाली कार्रवाइयों में गिनी जा रही है।

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राजस्थान को नशामुक्त बनाने के लिए प्रतिबद्ध एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स का कहर अब नशे के सौदागरों पर वज्र बनकर टूटा है। एएनटीएफ महानिरीक्षक पुलिस श्री विकास कुमार ने बताया कि  उत्तर-पूर्वी राज्यों से उत्तर भारत में आ रही नशे की बड़ी खेपों को रोकने के लिए 'मणिपुर मॉड्यूल' पर तकनीकी अन्वेषण शुरू किया गया था। महीनों की अथक मेहनत और 5 राज्यों में फैले जाल को काटकर एएनटीएफ ने यह ऐतिहासिक सफलता हासिल की है।

दो महीने तक पकाई खिचड़ी: साए की तरह पीछे लगी रही एएनटीएफ
एएनटीएफ को मणिपुर और उत्तर-पूर्वी राज्यों से राजस्थान में भारी मात्रा में मादक पदार्थ लाए जाने का इनपुट मिल रहा था। आईजी श्री विकास कुमार ने अपनी विशेष खुफिया टीमों को तीन बार मणिपुर भेजा, जहां टीमों ने 10-10 दिन कैंप कर पूरे इलाके का सर्वे किया। इस दौरान पाली निवासी सुखराम विश्नोई रडार पर आया, जो लगातार मणिपुर और राजस्थान के चक्कर काट रहा था। इस बार जब सुखराम मणिपुर गया, तो एएनटीएफ की टीमें साए की तरह उसके पीछे लग गईं। शातिर सुखराम लगातार अपने फोन, गाड़ियां और रास्ते बदलता रहा, लेकिन एएनटीएफ का इरादा नहीं बदल सका।

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मौज-मस्ती, भगवत भक्ति और पुलिस की पहेली
मणिपुर से नशे का सौदा फाइनल कर सुखराम अपने ऐश-ओ-आराम के ठिकाने लखनऊ उत्तर प्रदेश पहुंचा। वहां उसने अपनी एक महिला मित्र को बुलाया और उसके साथ नैनीताल तथा प्रसिद्ध कैंची धाम की यात्रा कर जीवन के आनंद लेता रहा। एएनटीएफ इस पहेली को सुलझाने में जुटी रही कि जिस गाड़ी में करोड़ों का नशा होने का शक है, उससे यह जोड़ा खुलेआम घूम कैसे रहा है? आखिरकार, महिला मित्र बस से जयपुर के लिए रवाना हुई और सुखराम अपनी मिजोरम नंबर की कार से अलग रास्ते से जयपुर की तरफ बढ़ा।

फोन बदले, गाड़ियां बदलीं, रास्ते बदले… लेकिन नहीं टूटा पुलिस का पीछा
जयपुर के नजदीक नाकाबंदी कर एएनटीएफ ने सुखराम को दबोच लिया, लेकिन पूरी कार खंगालने पर भी एक ग्राम अफीम नहीं मिली। दरअसल, सुखराम ने टोल नाके पर पुलिस को देखकर अपने सारे मोबाइल और तकनीकी उपकरण रिसेट कर दिए थे। एएनटीएफ की तकनीकी विंग ने जब सुखराम के रिसेट उपकरणों से डेटा रिकवर किया, तो उसमें एक संदिग्ध ट्रक के फास्टैग कार्ड की डिटेल मिली। गहनता से जांच करने पर पता चला कि इस ट्रक का फास्टैग भुगतान सुखराम खुद कर रहा था और वह ट्रक मणिपुर से असम, पश्चिम बंगाल, बिहार और यूपी होते हुए हरियाणा की सीमा में दाखिल हो चुका था।

श्रीनगर और जम्मू का 'कोड वर्ड'
एएनटीएफ की हनुमानगढ़, गंगानगर और नागौर की टीमें तुरंत उस ट्रक के पीछे लग गईं। इसी बीच जम्मू में बैठे मुख्य सूत्रधार मगनलीप (काल्पनिक नाम) ने सुखराम के पकड़े जाने के डर से ट्रक ड्राइवर को कोड वर्ड में निर्देश दिया- "रात तक श्रीनगर (जोधपुर) पहुंचना था पर अब जम्मू ही रुकना पड़ेगा, आगे नहीं जाएंगे।" इसका मतलब था कि पुलिस के डर से अब माल राजस्थान नहीं बल्कि रास्ते में ही ठिकाने लगाया जाएगा। इसके बाद ट्रक अचानक राजस्थान सीमा से ठीक पहले हरियाणा के सिरसा इलाके में रुक गया।

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महिला इंस्पेक्टर का जांबाज नेतृत्व और सिरसा पुलिस की मुस्तैदी
इस क्रिटिकल मोड़ पर आईजी विकास कुमार ने खुद मोर्चा संभाला। उन्होंने रात के करीब 03:30 बजे हरियाणा के सिरसा एसपी श्री दीपक सारण को फोन किया। मुस्तैदी दिखाते हुए सिरसा एसपी ने तत्काल अपनी फोर्स को राजस्थान एएनटीएफ की टीम के साथ अटैच किया। इस पूरे धरपकड़ ऑपरेशन की कमान एएनटीएफ की महिला इंस्पेक्टर श्रीमती किरणजीत कौर (हनुमानगढ़ टीम प्रभारी) के हाथ में थी, जो पिछले 36 घंटों से बिना खाए-पिये और बिना सोए पूरी मुस्तैदी से अपने कर्तव्य को अंजाम दे रही थीं। संयुक्त टीम ने घेराबंदी कर संदिग्ध ट्रक को ढूंढ निकाला।

ट्रक के नीचे वेल्डिंग कर बनाया था गुप्त कमरा
शुरुआती जांच में ट्रक पूरी तरह खाली मिला और ड्राइवर अनजान बनता रहा। लेकिन जब एएनटीएफ की टीम ने ट्रक के निचले हिस्से (चेसिस) की बारीकी से जांच की, तो दंग रह गए। तस्करों ने ट्रक के नीचे लोहे की पत्तियों से वेल्डिंग कर और नट-बोल्ट लगाकर एक गुप्त कमरेनुमा केबिन बना रखा था। जब कटर से उस तहखाने को तोड़ा गया, तो उसके अंदर से 95 पोटलियों में पैक 88.970 किलोग्राम अवैध अफीम बरामद हुई। मौके से आरोपी किशनाराम विश्नोई पुत्र छोगा राम उम्र 44 साल निवासी शिवपुरा जिला पाली को गिरफ्तार किया गया और मुख्य सूत्रधार सुखराम विश्नोई को हिरासत में लिया गया।

क्यों रखा गया 'ऑपरेशन जमुहार' नाम?
पांच राज्यों में फैले इस नेटवर्क को ध्वस्त करने वाले इस मेगा ऑपरेशन का नामकरण (ज-मु-हा-र) इन राज्यों के शुरुआती अक्षरों को मिलाकर किया गया:
° *ज* – जम्मू (जहां मुख्य सूत्रधार बैठा था)
° *म* – मणिपुर (जहां से नशे की खेप चली)
° *उ* – उत्तर प्रदेश (ट्रांजिट पॉइंट – लखनऊ)
° *हा* – हरियाणा (जहां माल को दबोचा गया)
° *र* – राजस्थान (जहां नशे की सप्लाई होनी थी)
° *शाब्दिक अर्थ:* 'जमुहार' का शाब्दिक अर्थ मुख्य फसल को नुकसान पहुंचाने वाली 'जहरीली घास' होता है, जो मणिपुर से लाए जा रहे अफीम के इस जहर के लिए बिल्कुल सटीक बैठता है।

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मुख्यालय में किया जाएगा जांबाज टीम को सम्मानित
एएनटीएफ महानिरीक्षक श्री विकास कुमार ने बताया कि हाल ही के दिनों की यह सबसे बड़ी और प्रभावशाली कार्रवाई है। 36 घंटों तक बिना आराम किए इस जटिल ऑपरेशन को सफल बनाने वाली महिला निरीक्षक किरणजीत कौर और उनकी पूरी टीम को विशेष कार्यक्रम आयोजित कर एएनटीएफ मुख्यालय, जयपुर में सम्मानित किया जाएगा।

एएनटीएफ की आमजन से अपील
महानिरीक्षक पुलिस ने अपील की है कि किसी भी अपराधी या नशे के कारोबार से जुड़ी सूचना को एएनटीएफ नियंत्रण कक्ष नंबर 0141-2502877 एवं व्हाट्सएप नंबर 9261225056 पर साझा करें। सूचना देने वाले व्यक्ति की गोपनीयता का पूर्ण ख्याल रखा जा

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