मध्य प्रदेशराज्‍य

संकटग्रस्त बच्चों के लिए वरदान बनी 1098 हेल्पलाइन, मिशन वात्सल्य दे रहा सुरक्षा का भरोसा

By Admin|31 May 2026, 12:06 PM
f X W

मिशन वात्सल्य की चाइल्ड हेल्पलाइन-1098 बनी संकटग्रस्त बच्चों का सशक्त सुरक्षा कवच

Advertisement
Advertisement

24×7 मुस्तैदी: वित्तीय वर्ष 2025-26 में 30 हजार से अधिक बच्चों को मिला नया जीवन

भोपाल

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के लगभग ढाई साल के कार्यकाल में राज्य ने महिला एवं बाल विकास के क्षेत्र में संवेदनशीलता और गवर्नेंस के एक नये प्रतिमान स्थापित किये है। उनके नेतृत्व में 'चाइल्ड हेल्पलाइन-1098' प्रदेश के संकटग्रस्त, शोषित और बेसहारा बच्चों के लिए एक बेहद सशक्त और अभेद्य सुरक्षा कवच बनकर उभरी है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के निर्देश पर राज्य के महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा 'मिशन वात्सल्य' योजना में चाइल्ड हेल्पलाइन 24 घंटे कार्य कर रही है। यह हेल्पलाइन प्रदेश में हजारों बच्चों को हिंसा, बाल श्रम और मानव तस्करी के चंगुल से छुड़ाकर उनका पुनर्वास सुनिश्चित कर रही है। सरकार के इस प्रभावी कदम से न केवल संकट के समय बच्चों को आपातकालीन मदद मिल रही है, बल्कि उन्हें एक सुरक्षित और भयमुक्त वातावरण भी मिल रहा है।

इस हेल्पलाइन की व्यापकता और रिस्पॉन्स टाइम में अभूतपूर्व सुधार आया है, जिसका अंदाजा विभागीय आंकड़ों से साफ लगाया जा सकता है। वित्तीय वर्ष 2025-26 में इस हेल्पलाइन से रिकॉर्ड 30 हजार 810 संकटग्रस्त बच्चों को सहायता पहुंचाई गई। वहीं, वर्तमान वित्तीय वर्ष 2026-27 में भी हेल्पलाइन की टीम पूरी मुस्तैदी से डटी हुई है, जहां महज़ 15 मई तक ही 4 हजार 376 बच्चों तक त्वरित मदद पहुंचाई जा चुकी है। अब तक 2 हजार 367 मामलों का पूरी तरह से निराकरण किया जा चुका है, जबकि शेष बचे मामलों में जिला स्तर पर फॉलो-अप कार्रवाई तेजी से जारी है।

READ ALSO  बिजली व्यवस्था में योगी सरकार का बड़ा सुधार, AT&C हानि में कमी से मजबूत हुआ विद्युत वितरण तंत्र

मुख्यमंत्री डॉ. यादव की 'जीरो टॉलरेंस' नीति

'मिशन वात्सल्य' के अंतर्गत नए स्वरूप में संचालित इस हेल्पलाइन को और अधिक हाईटेक और चुस्त रिस्पॉन्स सिस्टम से लैस किया गया है। हेल्पलाइन पर आने वाली कॉल्स को उनकी गंभीरता के आधार पर 2 हिस्सों में बांटा जाता है। कोई बच्चा किसी गंभीर या तत्काल खतरे में होता है, तो मुख्यमंत्री डॉ. यादव की 'जीरो टॉलरेंस' नीति में उस आपातकालीन मामले को तुरंत 'रिस्पॉन्स सपोर्ट सिस्टम' यानी आरएसएस-112 को ट्रांसफर किया जाता है, जिससे गृह विभाग और पुलिस की रेस्क्यू टीम मौके पर पहुंच सके। गैर-आपातकालीन मामलों को संबंधित जिला बाल संरक्षण इकाई (DCPU) को प्रेषित किया जाता है।

इस हेल्पलाइन से प्रदेश के बच्चों को केवल रेस्क्यू ही नहीं किया जा रहा, बल्कि उन्हें समुचित सुरक्षा दी जा रही है। इसमें बच्चों को हिंसा और शोषण से बचाना, उनके कानूनी अधिकारों की जानकारी देना, मानसिक एवं सामाजिक परामर्श उपलब्ध कराना, बाल श्रम से मुक्ति और सबसे महत्वपूर्ण—लापता बच्चों का उनके परिवारों से पुनर्मिलन कराना शामिल है। बेघर हुए या मानव तस्करी के शिकार बच्चों के लिए यह हेल्पलाइन एक नई जिंदगी की शुरुआत साबित हो रही है।

इन शहरों में दिखा सबसे ज्यादा असर

प्रदेश की राजधानी भोपाल सहित इंदौर, जबलपुर, ग्वालियर, सागर और सतना जैसे बड़े जिलों में हेल्पलाइन का नेटवर्क सबसे ज्यादा सक्रिय रहा है और यहां बड़ी संख्या में बच्चों को रेस्क्यू किया गया है।मुख्यमंत्री डॉ. यादव का मानना है कि हमारा उद्देश्य केवल आपातकालीन सहायता देना नहीं, बल्कि हर बच्चे के अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित करना है।

विभाग ने मध्यप्रदेश के सभी जागरूक नागरिकों, प्रबुद्ध वर्ग और ग्रामीणों से अपील की है कि वे सूबे के बच्चों के प्रति अपनी सामाजिक जिम्मेदारी निभाएं। प्रदेश के किसी भी कोने में यदि कोई बच्चा संकट में, बाल विवाह का शिकार, बाल श्रम करता हुआ या किसी भी प्रकार के शोषण से पीड़ित दिखाई दे, तो मूकदर्शक न बनें। राज्य सरकार की 'चाइल्ड हेल्पलाइन-1098' पर तुरंत इसकी सूचना दें, ताकि समय रहते मध्यप्रदेश के हर मासूम का भविष्य सुरक्षित और खुशहाल बनाया जा सके।

READ ALSO  रायपुर बनेगा उद्योग और निवेश का केंद्र, इंडिया इंडस्ट्रियल फेयर में MSME, स्टार्टअप और रोजगार को मिलेगा बड़ा मंच

 

अगली खबर लोड हो रही है...

Related Articles

Back to top button
Play GK Quiz and Win Coins