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Krishi Vikas Yojana: किसानों की बल्ले-बल्ले, जैविक खेती अपनाने पर सरकार दे रही आर्थिक मदद और ट्रेनिंग, जाने डिटेल्स?

By News Desk|09 May 2026, 2:48 PM
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Paramparagat Krishi Vikas Yojana: आज के ज़माने में, जैसे-जैसे हर कोई अपनी सेहत को लेकर ज़्यादा जागरूक हो रहा है, ऑर्गेनिक प्रोडक्ट्स की मांग तेज़ी से बढ़ रही है। इस मांग को देखते हुए, सरकार परंपरागत कृषि विकास योजना (PKVY) के ज़रिए किसानों को बिना केमिकल वाली खेती के तरीके अपनाने के लिए प्रोत्साहित कर रही है।

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यह योजना मिट्टी की सेहत सुधारने और पर्यावरण बचाने की दिशा में एक बड़ा कदम है, जिसका मकसद क्लस्टर-आधारित विकास के तरीके से ऑर्गेनिक खेती को बढ़ावा देना है। अगर आप भी मिट्टी की उपजाऊ शक्ति को बनाए रखते हुए अपनी कमाई बढ़ाना चाहते हैं, तो यह योजना एक शानदार मौका देती है, जिसमें आपको आर्थिक मदद और तकनीकी ट्रेनिंग, दोनों मिलते हैं।

Paramparagat Krishi Vikas Yojana:

इस योजना का मुख्य मकसद उन किसानों पर है जो केमिकल वाले खाद और कीटनाशकों को छोड़कर खेती के प्राकृतिक तरीके अपनाना चाहते हैं। इस पहल के ज़रिए, सरकार का मकसद मिट्टी की सेहत सुधारना और देश के हर गांव तक टिकाऊ खेती की पहुंच बढ़ाना है।

  • यह योजना क्लस्टर-आधारित मॉडल पर काम करती है, जिसमें 50 या उससे ज़्यादा किसानों का एक समूह बनाया जाता है जिनके पास कुल मिलाकर कम से कम 20 हेक्टेयर ज़मीन होनी चाहिए।
  • यह सॉइल हेल्थ कार्ड योजना का ही एक विस्तार है, जो किसानों को मिट्टी की पूरी जांच के बाद यह सलाह देता है कि उन्हें कौन से ऑर्गेनिक खाद इस्तेमाल करने चाहिए।
  • यह मॉडल न सिर्फ़ खेती की लागत कम करने में मदद करता है, बल्कि किसानों को अपनी उपज को सर्टिफ़ाई करवाने में भी मदद करता है, जिससे वे अपनी उपज को ज़्यादा कीमतों पर बेच पाते हैं।

Paramparagat Krishi Vikas Yojana: किसानों के लिए आर्थिक मदद

PKVY योजना के तहत, किसानों को ऑर्गेनिक खेती शुरू करने के लिए सीधे आर्थिक मदद दी जाती है, ताकि उन्हें पैसों की कमी का सामना न करना पड़े।

  • इसके लिए, सरकार तीन साल की अवधि में प्रति हेक्टेयर ₹50,000 की आर्थिक मदद देती है।
  • कुल मदद की रकम में से, ₹31,000 (62%) सीधे किसानों को दिए जाते हैं, ताकि वे ऑर्गेनिक खाद, कीटनाशक और बीज खरीद सकें।
  • बाकी बची रकम का इस्तेमाल क्लस्टर बनाने, ट्रेनिंग देने, सर्टिफ़िकेशन की फ़ीस देने और उपज की मार्केटिंग करने के लिए किया जाता है।
  • यह रकम सीधे किसानों के बैंक खातों में ट्रांसफ़र की जाती है, जिससे बिचौलियों के दखल का खतरा खत्म हो जाता है और पूरी पारदर्शिता बनी रहती है।

Paramparagat Krishi Vikas Yojana: ट्रेनिंग और PGS सर्टिफ़िकेशन

सिर्फ़ खेती करना ही काफ़ी नहीं है। अपनी उपज के ऑर्गेनिक होने को साबित करने के लिए सर्टिफ़िकेशन ज़रूरी है, और PKVY योजना इस मामले में किसानों को पूरी मदद देती है।

  • इस पहल के तहत, किसानों को ‘सहभागी गारंटी प्रणाली’ (PGS) के माध्यम से प्रमाणन की सुविधा प्रदान की जाती है।
  • विशेषज्ञों के मार्गदर्शन से, सरकार किसानों को जैविक खाद बनाने, कीट नियंत्रण के स्वदेशी तरीकों और फसल चक्रण की तकनीकों पर प्रशिक्षण देती है।
  • PGS प्रमाणन प्राप्त करने के बाद, किसानों को अपने उत्पादों पर ‘जैविक भारत’ (Organic India) का लोगो लगाने का अधिकार मिल जाता है, जिससे उपभोक्ताओं का विश्वास बढ़ता है।

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यह योजना जैविक इनपुट के स्थानीय उत्पादन और विपणन पर विशेष ज़ोर देती है, जिसका उद्देश्य किसानों को बड़े बाज़ारों और निर्यात के अवसरों से जोड़ना है।

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