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बच्चों की शुरुआती पढ़ाई होगी और मजबूत, राष्ट्रीय शिक्षा नीति में आंगनवाड़ी और स्कूलों का होगा बेहतर जुड़ाव

By Admin|19 May 2026, 9:02 PM
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राष्ट्रीय शिक्षा नीति – 2020: आंगनवाड़ी और स्कूलों के समन्वय से सुदृढ़ होगी प्रारंभिक शिक्षा की नींव

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महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के को -लोकेशन के दिशा-निर्देशों से शिक्षा और पोषण के क्षेत्र में बड़े बदलाव की शुरुआत

भोपाल 

छोटे बच्चों की पढ़ाई की शुरुआत अक्सर एक अनजान जगह से होती है, जहां उनको नया माहौल मिलता है। इस माहौल के डर और झिझक को खत्म करने के लिए केंद्र और राज्य सरकार ने आंगनवाड़ी और प्राथमिक विद्यालय को अब एक ही परिसर में लाने का महत्वपूर्ण निर्णय लिया है।

राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 और 'मिशन सक्षम आंगनवाड़ी एवं पोषण 2.0' के विज़न को धरातल पर उतारने के लिए केन्द्र सरकार के महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने एक बड़ा और दूरदर्शी कदम उठाया है। अब आंगनवाड़ी केंद्रों और प्राथमिक विद्यालयों का को-लोकेट किया जा रहा है। इस व्यावहारिक रणनीति का उद्देश्य बच्चों की प्रारंभिक शिक्षा, पोषण और देखभाल की एक ऐसी मजबूत नींव रखना है, जो उनके उज्ज्वल भविष्य का मार्ग प्रशस्त कर सके। विशेषज्ञों का मानना है कि यह केवल दो संस्थानों को एक परिसर में लाने का प्रयास नहीं है, बल्कि यह महिला एवं बाल विकास और स्कूल शिक्षा विभाग के बीच बेहतर तालमेल स्थापित कर बच्चों के लिए एक सुरक्षित, प्रेरक और उत्कृष्ट शैक्षणिक माहौल तैयार करने का महाअभियान है।

क्या बदलेगा इस व्यवस्था से

यह को-लोकेशन मॉडल मुख्य रूप से उन आंगनवाड़ी केंद्रों पर लागू किया जा रहा है जो प्राथमिक विद्यालयों के समीप स्थित हैं और जहाँ बच्चों के लिए सुरक्षित पहुँच उपलब्ध है। इसमें अस्थायी या सीमित संसाधनों वाले परिसरों में चल रहे आंगनवाड़ी केंद्रों को प्राथमिक विद्यालयों में स्थानांतरित कर अधिक सुरक्षित और बेहतर वातावरण उपलब्ध कराया जा रहा है। ऐसे विद्यालय जहॉ अतिरिक्त कक्ष उपलब्ध हैं, वहाँ आंगनवाड़ी केंद्रों को को-लोकेट किया जा रहा है जिससे शासकीय परिसंपत्तियों और संसाधनों का सर्वोत्तम उपयोग हो सके। भौगोलिक कारणों से जिन क्षेत्रों में भौतिक रूप से को- लोकेशन संभव नहीं है, वहाँ समीपस्थ प्राथमिक विद्यालयों के साथ आंगनवाड़ी केंद्रों की डिजिटल मैपिंग की जा रही है जिससे दोनों संस्थानों के बीच समन्वय और संसाधनों का साझा उपयोग सुनिश्चित किया जा सके।

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इस एकीकृत मॉडल से बच्चों का आंगनवाड़ी केन्द्रों से पहली कक्षा में स्थानांतरण बेहद सुचारू और सहज हो जाएगा। विद्यालय परिसर से पहले से परिचित होने के कारण बच्चों का आत्मविश्वास बढ़ेगा, जिससे शुरुआती कक्षाओं में होने वाले ड्रॉप आउट की दर में भारी कमी आएगी। इस नई व्यवस्था से आंगनवाड़ी के बच्चों को स्कूलों की आधुनिक अधोसंरचना, खेल के मैदानों और उन्नत शैक्षणिक संसाधनों तक समान पहुँच मिलेगी। बच्चों की नियमित उपस्थिति सुनिश्चित होने के साथ-साथ खेल-आधारित पाठ्यक्रमों जैसे 'आधारशिला' और 'जादुई पिटारा' के साझा उपयोग से शिक्षा की गुणवत्ता में व्यापक सुधार होगा। आंगनवाड़ी एवं विद्यालीन समन्वय से बच्चों के डेटा का मिलान आसान होगा, जिससे सेवाओं के दोहराव से बचा जा सकेगा और प्रत्येक बच्चे तक शासकीय योजनाओं का लाभ पहुँचना सुनिश्चित हो।

'विद्यारंभ'- म.प्र. ने रचा इतिहास

आंगनवाड़ी और प्राथमिक स्कूलों के इस को-लोकेशन मॉडल को प्रभावी बनाने में 'विद्यारंभ प्रमाण पत्र वितरण कार्यक्रम' एक ऐतिहासिक कड़ी साबित हो रहा है, जो बच्चों की औपचारिक शैक्षणिक यात्रा की शुरुआत को रेखांकित करता है। राष्ट्रीय चिंतन शिविर के निर्णयों के अनुरूप बाल चौपाल अर्ली चाइल्ड हूड केयर एंड एजुकेशन -डे) के पावन अवसर पर मध्यप्रदेश के 94 हजार से अधिक आंगनवाड़ी केंद्रों में एक साथ "विद्यारंभ प्रमाण पत्र वितरण समारोह" संपन्न हुआ। पूरे प्रदेश में एक साथ इस गरिमामयी अभियान को सफलतापूर्वक संचालित करने वाला मध्यप्रदेश देश का प्रथम राज्य बना है। इस महाअभियान में 5 से 6 वर्ष की आयु वर्ग के 9.28 लाख से अधिक बच्चों को उनके जीवन की पहली औपचारिक शिक्षा यात्रा के लिए प्रमाण पत्र प्रदान किए गए।

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इस प्रदेशव्यापी आयोजन की व्यापकता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इसमें राज्य स्तर पर 1, जिला स्तर पर 65, परियोजना स्तर पर 445, सेक्टर स्तर पर 3,358 तथा आंगनवाड़ी स्तर पर 94,482 सफल कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। इन सभी स्तरों पर आयोजित कार्यक्रमों में मंत्रियों, विधायकों, कलेक्टर्स, मुख्य कार्यपालन अधिकारियों सहित वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों और प्रबुद्ध नागरिकों ने सहभागिता कर बच्चों का उत्साहवर्धन किया। भविष्य की कार्ययोजना को सुदृढ़ करने के लिये स्कूल शिक्षा विभाग ने शिक्षकों को पात्र बच्चों की सूची भी उपलब्ध कराई गई है, जिससे आगामी सत्र में शालाओं में उनका शत-प्रतिशत नामांकन सुनिश्चित किया जा सके।

 

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