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40-50% फसल ही बची, अब बैगिंग से आम को बनाया जाएगा एक्सपोर्ट क्वालिटी

By Admin|16 May 2026, 2:31 PM
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लखनऊ

प्रदेश में आंधी- बारिश और कीटों की मार के बाद बागों में बची 40 से 50 फीसदी आम की फसल को सुरिक्षत करने की कोशिशें तेज हो गई हैं। इसके लिए बैगिंग प्रणाली पर जोर दिया जा रहा है, ताकि आम की भरपूर कीमत मिल सके। किसानों को बेहतर फायदा देने के लिए उद्यान विभाग के कर्मचारी उन्हें बैग बांधने के तरीके बता रहे हैं।

आम की स्थिति जानने के लिए हम शुक्रवार सुबह काकोरी के रास्ते सहिलामऊ पहुंचे। यहां एक बाग में मिले शंकर सिंह आसमान की तरफ देखकर कहते हैं कि ये बादल और टिप टिप गिरती बूंदें आम के लिए जहर जैसी हैं।

बैग ( कागज, पालीथीन थैला) को दिखाकर कहते हैं कि इससे कुछ उम्मीद है। वह थैला बांधने में लगे मजदूरों को समझाते हैं कि सिर्फ लंगड़ा और चौसा में ही बांधना है। दशहरी को उसके हाल पर छोड़ दो।

ताकीद भी करते हैं कि जो फल मजबूत दिख रहा है सिर्फ उसी में बांधना है। यहां से आगे बढ़े तो कनार गांव की बाग में उद्यान विभाग के कर्मचारी मिले। वे किसानों को बैग बांधने का तरीका सिखा रहे थे।

बस्ती के बागवान संदीप मौर्य बताते हैं कि पिछले वर्ष तीन हजार फलों में बैग बंधवाया था। सामान्य आम 20 से 25 रुपये प्रति किलो तो बैग वाला 35 से 45 रुपये किलो बिका था। यह आम ज्यादा बड़ा, चमकदार और टिकाऊ था।

फलों को तोड़ने के बाद सुरक्षित रखे गए बैग इस बार भी इस्तेमाल कर रहे हैं। आम्रपाली और चौसा के लिए पांच हजार नए बैग मंगवाये हैं। बाराबंकी, उन्नाव, बुलंदशहर और अमरोहा के हसनगंज के बागवान भी इस प्रणाली से आम को निर्यात लायकबनाने में जुटे हैं।

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