छत्तीसगढ़

ई-ऑफिस और छत्तीसगढ़ प्रशासन: पारंपरिक कार्यप्रणाली से डिजिटल क्रांति तक

By Admin|11 May 2026, 2:01 PM
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विशेष लेख

ई-ऑफिस का विस्तार: छत्तीसगढ़ की प्रशासनिक कार्यसंस्कृति में डिजिटल क्रांति का आगाज

"पारदर्शिता की नई पहचान 'ई-ऑफिस'

रायपुर

छत्तीसगढ़ में 'ई-ऑफिस' (e-Office) प्रणाली सरकारी कामकाज में पारदर्शिता, गति और जवाबदेही लाकर सुशासन (Good Governance) का नया सवेरा लेकर आई है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में, यह डिजिटल पहल भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस और सरकारी प्रक्रियाओं को सरल बनाने की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम है। फाइलों का डिजिटल होना फाइलों में हेराफेरी की गुंजाइश को लगभग खत्म कर देता है, जिससे शासन में पारदर्शिता आती है। कागजी फाइलों के भौतिक परिवहन में लगने वाला समय बचता है, जिससे फाइलें तेजी से आगे बढ़ती हैं और निर्णय जल्दी लिए जाते हैं।

           डिजिटल तकनीक आज केवल सूचनाओं के आदान-प्रदान तक सीमित नहीं है, बल्कि यह शासन की कार्यप्रणाली को नया आयाम दे रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के डिजिटल इंडिया विजन और छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के सुशासन, पारदर्शिता एवं जवाबदेही के संकल्प को साकार करते हुए राज्य में ई-ऑफिस (e-Office) प्रणाली प्रशासनिक व्यवस्था का अनिवार्य हिस्सा बन चुकी है।

फाइलों के अंबार से डिजिटल रफ्तार तक

          छत्तीसगढ़ में अब शासकीय दफ्तरों की तस्वीर बदल रही है। वह दौर बीत रहा है जब कार्यालयों में धूल खाती फाइलों के ढेर और कछुआ गति से चलने वाली प्रक्रियाएं सामान्य मानी जाती थीं। अब डिजिटल फाइलों के माध्यम से कार्यों में न केवल तेजी आई है, बल्कि पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता भी सुनिश्चित हुई है।

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सक्ती जिला रहा अव्वल

         ई-ऑफिस प्रणाली के प्रभावी क्रियान्वयन से राज्य ने डिजिटल गवर्नेंस में नए मानक स्थापित किए हैं। व्यापक नेटवर्क के तहत प्रदेश के 87 हजार 222 से अधिक अधिकारी-कर्मचारी इस डिजिटल प्लेटफॉर्म से जुड़ चुके हैं। अब तक 5 लाख 46 हजार 903 से अधिक फाइलों का सफल डिजिटल संचालन किया गया है। 30 अप्रैल 2026 की स्थिति में प्रदेश का 33 वां जिला सक्ती 15 हजार 735 फाइलों के डिजिटल संचालन के साथ राज्य में अग्रणी रहा है।

ई-ऑफिस के प्रमुख लाभ

        ऑनलाइन फाइल ट्रैकिंग की सुविधा से अब यह जानना आसान है कि कौन सी फाइल किस अधिकारी के पास कितने समय से लंबित है। इससे कार्य के प्रति जवाबदेही बढ़ी है। कुशल निर्णय प्रक्रिया सचिवालय से लेकर जिला स्तर तक फाइलों की आवाजाही त्वरित होने से निर्णय लेने की प्रक्रिया व्यवस्थित और समयबद्ध हुई है। कागज के उपयोग में भारी कमी आने से यह प्रणाली पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक बड़ा योगदान दे रही है। डिजिटल संधारण (Storage) के कारण दस्तावेजों के फटने, खोने या खराब होने का डर खत्म हो गया है और भंडारण की समस्या भी सुलझ गई है।

प्रशिक्षण और तकनीकी मजबूती

         किसी भी नवाचार की सफलता उसके उपयोगकर्ताओं पर निर्भर करती है। इसी उद्देश्य से राज्य शासन ने अधिकारी-कर्मचारियों के लिए चरणबद्ध प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए हैं। इस व्यवस्था को तकनीकी रूप से सशक्त बनाने में एनआईसी (NIC) और चिप्स (CHiPS) की टीमें महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।

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भविष्य की राह पूर्णतः डिजिटल प्रशासन

         मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ का लक्ष्य आगामी समय में समस्त शासकीय पत्राचार को शत-प्रतिशत ई-ऑफिस के माध्यम से संचालित करना है। यह बदलाव केवल एक तकनीकी सुधार नहीं है, बल्कि यह नागरिक-केंद्रित प्रशासन की ओर बढ़ता एक ठोस कदम है। ऑफिस ने यह सिद्ध कर दिया है कि तकनीक का सही समन्वय प्रशासन को प्रभावी और जनोन्मुखी बना सकता है। छत्तीसगढ़ का यह मॉडल आने वाले समय में सुशासन की एक नई और आधुनिक परिभाषा लिखने के लिए तैयार है।

 नितेश चक्रधारी 
(सहायक जनसंपर्क अधिकारी)

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