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शहडोल की ऑटो ड्राइवर की बेटी WMPL में चुनी गई, भोपाल बुल्स ने किया शामिल करने का प्रयास

By Admin|07 May 2026, 10:42 AM
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शहडोल / भोपाल 

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 मध्य प्रदेश के शहडोल जिले की पहचान अब गर्ल्स क्रिकेट की नर्सरी के तौर पर भी होने लगी है. क्योंकि यहां से कई लड़कियां क्रिकेट में कमाल कर रही हैं. पूजा वस्त्रकार जहां भारतीय टीम तक का सफर तय कर चुकी हैं, तो वहीं पूनम सोनी जैसी लड़कियां भी हैं जो क्रिकेट में बड़ा कमाल कर चुकी हैं. अब रीना यादव जैसी लड़कियां हैं जिनके घर की आर्थिक स्थिति भले ही बेहतर नहीं है. लेकिन अपने सपने को साकार करने के लिए वो लगातार कड़ी मेहनत कर रही हैं और सफलता हासिल कर रही हैं। 

मेहनत से मंज़िल पाने की ज़िद
कहते हैं सही दिशा में किया गया हार्ड वर्क एक दिन मंजिल जरूर दिला देता है. रीना यादव की कहानी भी कुछ ऐसी ही है, जिनके घर की घरेलू परिस्थितियों बहुत बेहतर नहीं हैं. पिता ऑटो चलाकर घर को संभाल रहे हैं. लेकिन बेटी का सपना था कि उन्हें क्रिकेटर बनना है और इसीलिए उन्होंने क्रिकेट खेलने की शुरुआत कर दी. और धीरे-धीरे कड़ी मेहनत और हार्ड वर्क से आज रीना यादव मध्य प्रदेश के सीनियर टीम तक का सफर तय कर ही चुकी हैं।  

उन्हें हाल ही में विमेंस मध्य प्रदेश प्रीमियर लीग WMPL की टीम में चुना गया है. जिसके बाद वो एक बार फिर से सुर्खियों में आ गई हैं. रीना यादव बताती है कि, ''वो मध्य प्रदेश एसोसिएशन की खिलाड़ी हैं और उनका सिलेक्शन अभी हाल ही में WMPL के लिए भोपाल बुल्स की टीम में हुआ है. पिछले साल उन्हें बुंदेलखंड बुल्स की टीम ने चुना था। 

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कैसे हुई क्रिकेट की शुरुआत
रीना यादव बताती हैं कि, ''वो शहडोल जिले के बुढार के पास रुंगटा कॉलोनी की रहने वाली हैं और उन्हें बचपन से क्रिकेट खेलने का शौक था. इसी में वो अपना करियर बनाना चाहती थी. पेरेंट्स भी उनके काफी सपोर्टिव थे और उनके हर फैसले का समर्थन कर रहे थे. यही उनकी सबसे बड़ी ताकत थी जिसकी वजह से आज वह अपने क्रिकेट करियर के लिए आगे बढ़ पा रही है और नई मंजिल को अचीव कर रही हैं। 

रीना यादव बताती हैं कि, ''उन्होंने शहडोल क्रिकेट अकादमी में भी क्रिकेट सीखा फिर इसके बाद उनका सिलेक्शन शिवपुरी के महिला क्रिकेट अकादमी में हो गया जहां वो अभी भी सीख रही हैं. सब कुछ अच्छा चल रहा है, शिवपुरी में रहती हैं तो वहां महिला क्रिकेट अकादमी में ट्रेनिंग कर रही हैं. कभी- कभी शहडोल आने पर यहां भी ट्रेनिंग करती हैं. इस तरह से वो अपने क्रिकेट में बेहतर करने की कोशिश में डटी हुई हैं। 

रीना यादव के अचीवमेंट्स
शहडोल क्रिकेट अकादमी के कोच सोनू रॉबिंसन बताते हैं कि, ''रीना यादव 10 साल से शहडोल संभाग के लिए क्रिकेट खेल रही हैं. रीना को पहली बार स्कूल गेम्स में देखा गया था जिसके बाद उन्हें शहडोल क्रिकेट अकादमी प्रैक्टिस के लिए बुलाया गया था. पहले वो हफ्ते में तीन-चार दिन आती थी, कुछ साल तक तो वहीं से उन्होंने अप डाउन किया लेकिन इसके बाद अपने मामा के यहां रहने लगीं. शहडोल में ही उन्होंने क्रिकेट की रेगुलर शुरुआत कर दी. इसके बाद रीना यादव का सफर यहीं नहीं थमा। 

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अपनी हार्ड वर्क और कड़ी मेहनत के दम पर रीना ने मध्य प्रदेश से अंडर-19, अंडर 23 और सीनियर ग्रुप को रिप्रेजेंट किया है. इस बार उनके परफॉर्मेंस के आधार पर मध्य प्रदेश के WMPL में जो वूमेंस का दूसरा संस्करण है भोपाल बुल्स की टीम ने उन्हें अपनी टीम में रखा है. रीना यादव राइट हैंड बैट्समैन हैं और पार्ट टाइम ऑफ स्पिन भी करती हैं. उनमें बहुत काबिलियत है, उन्हें बेहतर मंच मिला है, अब उनके पास एक अच्छा मौका है अपने टैलेंट को दिखाने का। 

शहडोल बना गर्ल्स क्रिकेट की नर्सरी
देखा जाए तो शहडोल जिला गर्ल्स क्रिकेट की नर्सरी है क्योंकि यहां से कई लड़कियां हैं जो मध्य प्रदेश के अलग-अलग एज ग्रुप की टीम से खेल रही हैं. अभी हाल ही में कई लड़कियां WMPL के लिए जो सिलेक्ट हुई हैं, उसमें शहडोल संभाग से भी कई लड़कियां शामिल हैं. पूजा वस्त्रकार जैसे खिलाड़ी भारतीय टीम से खेल चुकी हैं. पूनम सोनी मध्य प्रदेश से तो खेल ही चुकी हैं. इसके अलावा अब वो क्रिकेट के दम पर रेलवे में नौकरी भी कर रही हैं और रेलवे की टीम से भी खेल रही हैं. इसके अलावा भी कई ऐसी लड़कियां हैं, जो लगातार क्रिकेट में कमाल कर रही हैं और अपने टैलेंट से सभी का ध्यान खींच रही हैं। 

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