मध्य प्रदेशराज्‍य

अब शिवपुरी में बिना ई-टोकन के खाद नहीं मिलेगा, किसान निधि से होगा डाटा लिंक

By Admin|02 May 2026, 8:02 PM
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 शिवपुरी
जब भी फसल बुवाई का सीजन आता है तब किसानों को खाद के लिए कड़ी मशक्कत करनी पड़ती है। कहीं खाद नहीं मिलता तो कहीं खाद की कालाबाजारी के आरोप लगाए जाते हैं। जहां तक कि किसानों को खाद के लिए रतजगा करना पड़ता है। ऐसी समस्याओं को देखते हुए सरकार ने खाद वितरण की व्यवस्था को डिजिटल सिस्टम से जोड़ दिया है। ऐसे किसान जो किसान निधि से जुड़े हैं उनका डाटा खाद वितरण सिस्टम से भी जोड़ा जा रहा है। साथ ही किसानों को एग्री स्टैप पर भी पंजीयन कराने के लिए जागरूक किया जा रहा है। अगर आनलाइन सिस्टम से किसान नहीं जुड़ेगा तो वह खाद के लिए परेशान हो सकता है।

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पता चल सकेगा कितना खाद मिला
क्योंकि बिना ई-टोकन के न तो सोसायटी पर खाद दिया जाएगा और न ही बाजार या गोदामों पर मिलेगा। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि आनलाइन सिस्टम से जुड़ने पर किसान का पूरा जमीनी ब्यौरा सामने आ जाएगा। यह भी पता चल सकेगा कि उक्त किसान को कितना खाद दिया जा चुका है। इससे खाद की कालाबाजारी भी रुक सकेगी। एक दूसरे के नाम पर लोग खाद नहीं ले सकेंगे।

इस प्रणाली को एग्रीस्टैक पोर्टल से जोड़ा गया है। जैसे ही किसान का खसरा नंबर दर्ज होगा, उसकी पात्रता के अनुसार खाद की मात्रा का मैसेज सीधे उसके मोबाइल पर आएगा। शासन ने उन किसानों का भी ध्यान रखा है, जिनकी भूमि एग्रीस्टैक पर नहीं है। मंदिर, ट्रस्ट, वन पट्टाधारी और 'सिकमी' (बटाईदार) किसानों के लिए पोर्टल पर विशेष पंजीकरण की अलग से व्यवस्था की गई है। किसान भाई ई-विकास पोर्टल से 01 मई 2026 से अपने रकबे अनुसार डीएपी, एनपीके, एसएसपी एवं पोटास की पुरी मात्रा खरीद सकते है एवं रकबे अनुसार यूरिया की पुरी मात्रा 15 जुन से क्रय कर सकते है।

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उन्‍होंने बताया कि शासन ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि यदि कोई भी सहकारी समिति या निजी विक्रेता बिना ई-टोकन के खाद का विक्रय करता पाया जाता है, तो उसके विरुद्ध उर्वरक (नियंत्रण) आदेश 1985 के तहत कठोर वैधानिक कार्यवाही की जाएगी। उन्‍होंने जिले के समस्त कृषकों से अपील की है कि वे अपनी मिट्टी के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए केवल संतुलित उर्वरकों का ही उपयोग करें। अनावश्यक खाद का प्रयोग न केवल लागत बढ़ाता है, बल्कि भूमि की उर्वरक शक्ति को भी नुकसान पहुँचाता है।

किसान निधी से दो लाख किसान जुड़े हैं
जिलेभर में करीब सवा दो लाख किसान हैं जो किसान निधि से भी जुड़े हुए हैं। करीब 60 से 70 फीसदी किसानों के पंजीयन किसान फार्मर आइडी व एग्री स्टैप से जुड़ चुके हैं। यानी एक क्लिक में किसान का पूरा डाटा सामने आ सकेगा। कृषि विभा के डीडीए पीएस करोरिया के मुताबिक सरकार ने ई विकास प्रणाली लागू की है। जिसके तहत किसानों को एग्री स्टैप से किसानों को जोड़ा जा रहा है। करीब 60 से 70 फीसदी किसान जुड़ चुके हैं। अब किसानों को ई सिस्टम के तहत की खाद का विरतण किया जाएगा।

खाद को लेकर यह होता रहा है
चाहे रबी सीजन बुवाई की बात करें या खरीफ सीजन की कहें। जब भी फसल बुवाई का समय आता है तब किसानों की भीड़ खाद केंद्रों पर होती रही है। जहां किसानों को खाद नहीं मिल पाता और वह धरना प्रदर्शन और हंगामा करने तक मजबूर होते रहे हैं। इधर किसानों को जब खाद नहीं मिल पाता तो बाजार में खाद ब्लैक में बेचा जाने लगता है। एक-एक यूरिया खाद की बोरी पर किसानों को 400 से 500 रुपए तक कालाबाजारी देनी पड़ती रही है।

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अब खरीफ फसल की तैयारी में जुटे किसान, खाद की रैक भी आई
किसान अब खरीफ फसल की तैयारियों में जुट गए हैं। गर्मी में मिट्टी तप जाए इसे लेकर खेतों की जुताई होने लगी है। बारिश होते ही वह खरीफ की बुवाई करनी शुरू करेंगे। इधर किसानों को खाद की समस्या नहीं आए इसे लेकर प्रशासन ने खाद मंगाना शुरू कर दिया है। एक हजार मीट्रिक टन की रैक आई है। हालांकि जिले में खाद का अभी स्टाक है।

तीन दिन तक वैध रहेगा टोकन
खाद के लिए ई-विकास के माध्यम से टोकन जनरेट होगा, जो तीन दिन तक वैध रहेगा। किसान यदि सहकारी समिति का सदस्य है तो संबंधित दुकानों का टोकन मिलेगा। यदि सदस्य नहीं है, तो उसे दूसरी दुकानें बताई जाएंगी। एक माह में किसी भी किसान को 50 बोरी से अधिक खाद नहीं मिलेगी। प्रदेश सरकार की इस पहल को भारत सरकार भी अपना रही है और कुछ स्थानों पर इसके पायलट प्रोजेक्ट चलाने के निर्देश भी दिए गए हैं।

लंबी कतारों से मिलेगी मुक्ति
खरीफ सीजन हो रबी, हर साल खाद वितरण केंद्रों पर लंबी-लंबी लाइनें लगती हैं। कानून व्यवस्था की स्थिति संभालने के लिए पुलिस बल भी तैनात करना पड़ता है और राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप भी लगते हैं। यह व्यवस्था लाइनों से छुटकारा दिलाने में सहायक सिद्ध हुई है।
से काम करती है ई-टोकन प्रणाली
ई-विकास पोर्टल (https://evikas.mpkrishi.mp.gov.in/) के माध्यम से सुबह सात से शाम आठ बजे के बीच एग्रीस्टेक आईडी (फार्मर आईडी) में दर्ज रकबे (क्षेत्रफल) एवं फसल के आधार पर ऑनलाइन टोकन बुक कर खाद खरीद सकते हैं। खाद कौन सी लेना है, यह किसान ही तय करते हैं। किसान द्वारा खाद लेते ही विक्रय केंद्र के भंडार में से ऑनलाइन उतनी कमी दर्ज हो जाती है। इससे मांग और आपूर्ति का सिस्टम बना रहता है।

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मोबाइल पर ओटीपी के माध्यम से पंजीयन की प्रक्रिया करनी होती है। यदि किसान समय सीमा यानी 72 घंटे में खाद नहीं लेता है तो टोकन निरस्त हो जाएगा और दोबारा प्रक्रिया करनी होगी। यदि किसी किसान की भूमि पोर्टल पर दिखाई नहीं दे रही है तो वह एसडीएम को आवेदन करेगा और वहां से टोकन बन जाएगा।

खाद की सीमा तय
बुजुर्ग, दिव्यांग, बटाईदार आदि होने पर किसान किसी दूसरे व्यक्ति को खाद लेने के लिए अधिकृत कर सकता है। जमीन अधिक होने पर यदि किसी किसान की पात्रता 50 बोरी से अधिक है तो भी एक माह में 50 बोरी से अधिक खाद नहीं मिलेगी। कृषि विभाग के अधिकारियों का कहना है कि पारदर्शी व्यवस्था बनाकर लागू की गई है।

पर्याप्त खाद भंडारण का दावा
उधर, अंतरराष्ट्रीय स्थितियों को देखते हुए खाद की कमी की जो आशंका जताई जा रही थी, वैसी स्थिति फिलहाल नहीं है। प्रदेश के पास 5.75 लाख टन यूरिया, 5.25 लाख टन डीएपी और एनपीके के साथ 3.75 लाख टन सिंगल सुपर फास्फेट रखा है। 10 लाख टन खाद के अग्रिम भंडारण के विरुद्ध आठ लाख टन का भंडारण हो चुका है। यूरिया की आवक लगातार नहीं हुई है।

 

 

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