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CG : किसानों के लिए मधुमक्खी पालन कम लागत में ज्यादा मुनाफा…

By lokesh sharma|12 Apr 2026, 1:59 PM
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जशपुरनगर । राष्ट्रीय बागवानी मिशन एवं राज्य योजना अंतर्गत मधुमक्खी पालन को बढ़ावा देने हेतु जशपुर जिले के कुल 20 कृषकों को आर्थिक सहायता दी जा रही है। इस योजना का मुख्य उद्देश्य किसानों की आय में वृद्धि करना, रोजगार सृजन को बढ़ावा देना तथा फसलों के परागण के माध्यम से उत्पादन बढ़ाना है। योजना के तहत लाभार्थियों को मधुमक्खी पेटी बी बॉक्स मय मधुमक्खी कॉलोनी हेतु 1600, मधुमक्खी छत्ता हेतु 800 मधु निष्कासन यंत्र हेतु 8000 अनुदान उपलब्ध कराया जा रहा है।

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मधुमक्खी पालन के लिए अधिक भूमि की आवश्यकता नहीं होती। किसान इसे अपनी खेती के साथ-साथ आसानी से अपना सकते हैं। मधुमक्खी पालन अंतर्गत सरकार द्वारा दी जा रही आर्थिक सहायता से क्षेत्रों को मजबूत बना रही हैं।

फसलों की पैदावार बढ़ाने में मधुमक्खियों की अहम भूमिका

मधुमक्खियां केवल शहद उत्पादन तक सीमित नहीं हैं, बल्कि कृषि उत्पादन बढ़ाने में भी इनकी महत्वपूर्ण भूमिका है।

मधुमक्खियों द्वारा किए गए परागण से फल, सब्ज़ी और तिलहनी फसलों की पैदावार में उल्लेखनीय वृद्धि होती है। सरसों, लीची, आम, अमरूद, सूरजमुखी, धनिया, सब्ज़ी फसलें और जंगली फूल मधुमक्खियों के लिए उत्तम पुष्प स्रोत हैं। वैज्ञानिकों का मानना है कि मधुमक्खी पालन अपनाने से टिकाऊ और लाभकारी कृषि को बढ़ावा मिलता है।

स्वरोज़गार का अवसर

मधुमक्खी पालन ग्रामीण युवाओं और महिलाओं के लिए स्वरोज़गार का अच्छा माध्यम बन रहा है। प्रशिक्षण लेकर कोई भी व्यक्ति इस कार्य को आसानी से शुरू कर सकता है। शहद, मोम, रॉयल जेली जैसे उत्पादों की बाजार में अच्छी मांग है। सरकार द्वारा आर्थिक सहायता एवं तकनीकी सहायता उपलब्ध कराई जा रही है।

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पर्यावरण संरक्षण में सहायक

मधुमक्खियां जैव विविधता बनाए रखने में अहम भूमिका निभाती हैं। इनके बिना प्राकृतिक संतुलन प्रभावित हो सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि कीटनाशकों के अत्यधिक प्रयोग से मधुमक्खियों की संख्या घट रही है, जो चिंता का विषय है। ऐसे में मधुमक्खी-अनुकूल खेती को अपनाने की आवश्यकता है।

कम लागत, अधिक मुनाफा

कम निवेश में अधिक लाभ देने वाला मधुमक्खी पालन आज किसानों की पहली पसंद बनता जा रहा है। एक मधुमक्खी बॉक्स से साल में कई बार शहद उत्पादन किया जा सकता है। सही प्रबंधन से अच्छी आमदनी संभव है। विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि मौसम, पुष्प स्रोत और वैज्ञानिक तकनीकों का ध्यान रखकर मधुमक्खी पालन किया जाए, ताकि उत्पादन और गुणवत्ता दोनों बेहतर हों।

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lokesh sharma

Lokesh Sharma | Editor Lokesh Sharma is a trained journalist and editor with 10 years of experience in the field of journalism. He holds a BAJMC degree from Digvijay College and a Master of Journalism from Kushabhau Thakre University of Journalism & Mass Communication. He has also served as a Professor in the Journalism Department at Digvijay College. Currently, he writes on Sports, Technology, Jobs, and Politics for kadwaghut.com.

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