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ई-मेल सबूत के चलते हाईकोर्ट ने धमाकों के दोषियों को सजा पर रोक नहीं दी

By Admin|01 May 2026, 5:26 PM
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 जयपुर

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राजस्थान हाईकोर्ट ने साल 2008 में हुए जयपुर सीरियल बम धमाकों से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में दो दोषियों को राहत देने से साफ इनकार कर दिया है. जस्टिस इंद्रजीत सिंह और जस्टिस भुवन गोयल की खंडपीठ ने शुक्रवार को मोहम्मद सरवर आजमी और शाहबाज अहमद की उस अर्जी (स्टे एप्लीकेशन) को खारिज कर दिया, जिसमें उन्होंने अपनी सजा पर रोक लगाने की मांग की थी.

क्या है 'नौवें बम' का मामला?
13 मई 2008 को जयपुर में हुए सिलसिलेवार धमाकों ने पूरे देश को दहला दिया था. इन धमाकों में 71 बेगुनाहों की जान गई थी, और 185 लोग घायल हुए थे. पुलिस को चांदपोल बाजार के पास एक 9वां बम भी मिला था, जिसे फटने से महज 15 मिनट पहले डिफ्यूज कर दिया गया था. इसी 'जिंदा बम' मामले में विशेष अदालत ने दोनों को उम्रकैद की सजा सुनाई थी, जिसे उन्होंने हाईकोर्ट में चुनौती दी है.

'जब 8 केस में बरी, तो यहां क्यों नहीं?'
दोषियों के वकील ने तर्क दिया कि हाईकोर्ट पहले ही मुख्य 8 ब्लास्ट मामलों में उन्हें बरी कर चुका है. ऐसे में 'जिंदा बम' मामले में भी उन्हें राहत मिलनी चाहिए. उन्होंने दलील दी कि अपील पर सुनवाई में लंबा समय लग सकता है, इसलिए उनकी सजा पर रोक लगाकर उन्हें जमानत दी जाए.

ई-मेल बना मुख्य सबूत
राज्य सरकार की ओर से पैरवी करते हुए इन दलीलों का पुरजोर विरोध किया गया. सरकारी वकील ने कोर्ट को बताया कि इन आरोपियों के खिलाफ पुख्ता और अतिरिक्त साक्ष्य मौजूद हैं. धमाकों के तुरंत बाद दो न्यूज चैनलों को ई-मेल भेजकर इन लोगों ने धमाकों की जिम्मेदारी ली थी. ई-मेल के जरिए धमाकों को 'सही' ठहराना इनके शामिल होने का बड़ा प्रमाण है.

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अदालत का फैसला
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद हाईकोर्ट ने माना कि मामले की गंभीरता को देखते हुए फिलहाल सजा पर रोक लगाना सही नहीं होगा. इस फैसले के बाद अब सरवर और शाहबाज को जेल की सलाखों के पीछे ही रहना होगा.

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