छत्तीसगढ़

एक किसान की सफलता बनी प्रेरणा, गांव के अन्य किसान भी बढ़ा रहे कदम

By Admin|28 Apr 2026, 10:11 AM
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रायपुर,

परंपरागत खेती (गेहूं-धान) की तुलना में फूलों की खेती कम लागत में 3-4 गुना तक अधिक मुनाफा दे रही है। गेंदा, गुलाब और गुलदाउदी जैसे फूलों की 12 महीने मांग होने से किसान हर सीजन में बंपर कमाई कर रहे हैं। कम पूंजी से शुरू होकर, यह व्यवसाय प्रति हेक्टेयर लाखों रुपये का शुद्ध लाभ  दे रहा है, जिससे किसान आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन रहे हैं।  शादी, पार्टी, त्यौहार और धार्मिक आयोजनों में फूलों की मांग साल भर बनी रहती है, जिससे अच्छी कीमतें मिलती हैं।
         
 राज्य शासन की योजनाओं का लाभ लेकर रायगढ़ जिले के किसान अब परंपरागत खेती से आगे बढ़ते हुए उद्यानिकी फसलों की ओर रुख कर रहे हैं। इसी कड़ी में लैलूंगा विकासखंड के ग्राम गमेकेरा निवासी किसान  ईश्वरचरण पैकरा ने राष्ट्रीय बागवानी मिशन से फूलों की खेती अपनाकर अपनी आमदनी में उल्लेखनीय वृद्धि की है। किसान की सफलता आज सबके लिए प्रेरणा का स्रोत बन रही है।
        
पैकरा पहले परंपरागत रूप से धान की खेती किया करते थे, जिसमें मेहनत के मुकाबले आय सीमित थी। वर्ष 2025-26 में उन्होंने उद्यानिकी विभाग के मार्गदर्शन में 0.400 हेक्टेयर भूमि पर गेंदा फूल की खेती शुरू की। विभाग द्वारा तकनीकी सहयोग एवं आवश्यक मार्गदर्शन मिलने से उन्होंने वैज्ञानिक पद्धति से खेती की, जिसका परिणाम बेहद सकारात्मक रहा। जहां पहले धान की खेती से उन्हें लगभग 11 क्विंटल उत्पादन मिलता था और सीमित आय होती थी, वहीं फूलों की खेती से उन्हें करीब 38 क्विंटल उत्पादन प्राप्त हुआ। इस उत्पादन से उनकी कुल आमदनी लगभग 3 लाख 4 हजार रुपये तक पहुंच गई। लागत निकालने के बाद उन्हें लगभग 2 लाख 59 हजार रुपये का शुद्ध लाभ प्राप्त हुआ, जो पारंपरिक खेती की तुलना में कई गुना अधिक है।
         
फूलों की खेती में सफलता मिलने के बाद  पैकरा का आत्मविश्वास बढ़ा है। वे बताते हैं कि कम समय में अधिक लाभ मिलने के कारण अब वे इस खेती को और विस्तार देने की योजना बना रहे हैं। उनके खेत में खिले गेंदा फूलों की रंगीन पंक्तियां आज उनकी मेहनत और सफलता की कहानी बयां करती हैं। उनकी इस उपलब्धि को देखकर गांव के अन्य किसान भी अब उद्यानिकी फसलों की ओर आकर्षित हो रहे हैं और विभाग से संपर्क कर फूलों की खेती अपनाने के लिए प्रेरित हो रहे हैं। इस प्रकार राज्य शासन की योजनाएं न केवल किसानों की आय बढ़ाने में सहायक हो रही हैं, बल्कि कृषि के स्वरूप में भी सकारात्मक बदलाव ला रही हैं।

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