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रांची के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में ब्लड स्टोरेज यूनिट और सुविधाओं के विस्तार से एनक्वास प्रमाणन की उम्मीद

By Admin|27 Jun 2026, 4:41 PM
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रांची
 रांची जिले के अनगड़ा और रातू सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) को राष्ट्रीय गुणवत्ता आश्वासन मानक (एनक्वास) अवार्ड दिलाने की तैयारी तेज कर दी गई है। स्वास्थ्य विभाग दोनों अस्पतालों में आधारभूत सुविधाओं और स्वास्थ्य सेवाओं को राष्ट्रीय मानकों के अनुरूप विकसित करने में जुटा है।

यदि दोनों अस्पताल करीब 100 गुणवत्ता मानकों पर खरे उतरते हैं तो उन्हें एनक्वास प्रमाणन के साथ 50 लाख रुपये का प्रोत्साहन मिलेगा। यह राशि अस्पताल के विकास, मरीजों की सुविधाओं और चिकित्सा सेवाओं को और बेहतर बनाने में खर्च की जाएगी।

रांची जिले में इससे पहले सदर अस्पताल को वर्ष 2024 में एनक्वास अवार्ड मिल चुका है। वहीं ओरमांझी सीएचसी और कुच्चू पीएचसी भी यह उपलब्धि हासिल कर चुके हैं। जिले के 80 आयुष्मान आरोग्य मंदिर (हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर) भी एनक्वास प्रमाणन प्राप्त कर चुके हैं। अब विभाग की नजर अनगड़ा और रातू सीएचसी पर है।

ब्लड स्टोरेज यूनिट स्थापित होना है बाकी
सिविल सर्जन डा. प्रभात कुमार बताते हैं कि दोनों अस्पतालों में अधिकांश स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध हैं, लेकिन एनक्वास के लिए कुछ महत्वपूर्ण कमियां अभी भी दूर की जानी हैं। सबसे बड़ी चुनौती दोनों अस्पतालों में ब्लड स्टोरेज यूनिट स्थापित करना है।

योजना के तहत सदर अस्पताल स्थित मदर ब्लड बैंक से रक्त लाकर यहां सुरक्षित रखा जाएगा, ताकि विशेषकर गर्भवती महिलाओं और आपातकालीन मरीजों को तत्काल रक्त उपलब्ध कराया जा सके। अनगड़ा सीएचसी में रेडियोलाजी विभाग को भी पूरी तरह सुदृढ़ किया जाना बाकी है, जबकि रातू सीएचसी में यह सुविधा पहले से संचालित है।

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वहीं सर्जरी की सुविधा दोनों अस्पतालों में है, लेकिन रातू सीएचसी में सबसे अधिक सीजेरियन आपरेशन किए जाते हैं। अनगड़ा में सर्जिकल सेवाएं अभी सीमित हैं। यहां जरूरत पड़ने पर निजी विशेषज्ञ चिकित्सकों को बुलाकर आपातकालीन सर्जरी कराई जाती है, जबकि गंभीर मरीजों को उच्च संस्थानों में रेफर करना पड़ता है।

कई मानकों पर होती है जांच
एनक्वास प्रमाणन केवल भवन या उपकरणों के आधार पर नहीं मिलता। इसके लिए अस्पतालों को करीब 100 गुणवत्ता मानकों पर खरा उतरना पड़ता है।

इनमें मरीजों की सुरक्षा, संक्रमण नियंत्रण, स्वच्छता, दवा उपलब्धता, प्रशिक्षित मानव संसाधन, प्रयोगशाला एवं रेडियोलाजी सेवाएं, प्रसव एवं नवजात देखभाल, आपातकालीन चिकित्सा, रिकार्ड प्रबंधन, जैव-चिकित्सा अपशिष्ट प्रबंधन, अग्नि सुरक्षा, मरीजों की शिकायतों का निस्तारण और अस्पताल प्रबंधन जैसी व्यवस्थाओं का विस्तृत मूल्यांकन किया जाता है। राष्ट्रीय स्तर की टीम अस्पताल का निरीक्षण करती है और निर्धारित अंक मिलने के बाद ही एनक्वास प्रमाणन दिया जाता है।

अस्पताल और मरीजों दोनों को मिलेगा लाभ
एनक्वास अवार्ड मिलने के बाद अस्पताल को 50 लाख रुपये तक की प्रोत्साहन राशि मिलती है। इस राशि का उपयोग नई चिकित्सा सुविधाएं विकसित करने, उपकरण खरीदने, मरीजों के लिए आधारभूत सुविधाएं बढ़ाने और गुणवत्ता सुधार कार्यों में किया जाता है। इसका सबसे बड़ा लाभ मरीजों को मिलता है।

अस्पतालों में उपचार की गुणवत्ता बढ़ती है, संक्रमण का खतरा कम होता है, दवाओं और जांच सेवाओं की उपलब्धता बेहतर होती है तथा रेफरल की आवश्यकता भी घटती है। इससे ग्रामीण क्षेत्रों के मरीजों को अपने जिले या प्रखंड स्तर पर ही गुणवत्तापूर्ण इलाज मिलने लगता है।

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तीन वर्ष बाद फिर कराना पड़ता है मूल्यांकन
एनक्वास प्रमाणन स्थायी नहीं होता। इसकी वैधता तीन वर्ष की होती है। इसके बाद अस्पताल को दोबारा आवेदन कर पुनर्मूल्यांकन कराना पड़ता है। यदि गुणवत्ता मानकों का पालन जारी नहीं रहता तो प्रमाणन समाप्त भी हो सकता है। यही कारण है कि एनक्वास प्राप्त अस्पतालों को लगातार अपनी सेवाओं की गुणवत्ता बनाए रखनी पड़ती है।

एनक्वास क्या है?
एनक्वास स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय की राष्ट्रीय गुणवत्ता प्रमाणन प्रणाली है। जिला अस्पताल, सीएचसी, पीएचसी और आयुष्मान आरोग्य मंदिरों को यह प्रमाणन दिया जाता है। अस्पताल का मूल्यांकन मरीजों की सुरक्षा, इलाज की गुणवत्ता, स्वच्छता, मानव संसाधन, संक्रमण नियंत्रण और प्रबंधन समेत लगभग 100 गुणवत्ता मानकों पर किया जाता है।

प्रमाणन मिलने पर अस्पताल को गुणवत्ता सुधार के लिए 50 लाख रुपये तक की प्रोत्साहन राशि मिलती है। झारखंड में पिछले कुछ वर्षों में जिला अस्पतालों, सीएचसी और आयुष्मान आरोग्य मंदिरों को एनक्वास से जोड़ने पर विशेष जोर दिया जा रहा है, ताकि ग्रामीण क्षेत्रों तक गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाई जा सकें।

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