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2007 से पहले की डिग्री पर भेदभाव खत्म, हाईकोर्ट ने नियम को मनमाना बताया

By Admin|24 May 2026, 3:31 PM
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रांची

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झारखंड हाइकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि एक ही संस्थान से हासिल समान डिग्री धारकों के बीच केवल अंकों के बदलाव के आधार पर भेदभाव नहीं किया जा सकता. जस्टिस दीपक रोशन की अदालत ने शिक्षा विभाग के उस नियम को मनमाना और अमान्य करार दिया, जिसके तहत 2007 से पहले 300 अंकों की संगीत प्रभाकर डिग्री लेने वालों को बहाली के अयोग्य मान लिया गया था. अदालत ने याचिकाकर्ता सुचरिता महतो को आठ सप्ताह के भीतर सभी परिणामी लाभों के साथ सेवा में बहाल करने का निर्देश दिया है.

संगीत शिक्षिका की सेवा समाप्त करने पर कोर्ट सख्त
बोकारो निवासी सुचरिता महतो ने प्रयाग संगीत समिति, इलाहाबाद से वर्ष 1985 और 1989 में संगीत प्रभाकर की डिग्री हासिल की थी. वर्ष 2011 के विज्ञापन के आधार पर उन्हें गिरिडीह में संगीत शिक्षिका के पद पर नियुक्त किया गया था, लेकिन 31 जुलाई 2020 को जिला शिक्षा पदाधिकारी ने उनकी सेवा यह कहते हुए समाप्त कर दी कि उनकी डिग्री को सरकार से मान्यता प्राप्त नहीं है.

300 और 500 अंकों की डिग्री को लेकर उठा विवाद
शिक्षा विभाग ने 14 सितंबर 2022 को एक संकल्प जारी किया. इसमें प्रयाग संगीत समिति की 500 अंकों वाली संगीत प्रभाकर डिग्री को स्नातक के समकक्ष मान्यता दी गयी, लेकिन याचिकाकर्ता को इसलिए बाहर रखा गया क्योंकि उनके पास 2007 से पहले की 300 अंकों वाली डिग्री थी.

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