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बेसिक शिक्षा के 32 हजार से अधिक स्कूलों को मिली ‘निपुण’ की मान्यता

By Admin|21 Apr 2026, 1:52 PM
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बेसिक शिक्षा के 32 हजार से अधिक विद्यालय अब ‘निपुण

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योगी सरकार में बेसिक शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाने के लगातार प्रयासों का ठोस परिणाम

हर स्कूल को ₹50 हजार की सहायता, निपुण स्कूलों के शिक्षकों का सम्मान

लखनऊ
 योगी सरकार में बेसिक शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाने के लिए किए जा रहे लगातार प्रयासों का बड़ा परिणाम सामने आया है। निपुण भारत मिशन के तहत किए गए ताजा आकलन में 32,480 प्राथमिक विद्यालय ‘निपुण’ घोषित किए गए हैं। इन विद्यालयों में कक्षा 1 और 2 के कम से कम 80 प्रतिशत बच्चों ने भाषा और गणित में अपेक्षित दक्षता हासिल की है। इन विद्यालयों को 50-50 हजार रुपये की आर्थिक सहायता और उत्कृष्ट कार्य करने वाले शिक्षकों को सम्मानित किया जाता है। डीएलएड (डिप्लोमा इन एलीमेंट्री एजुकेशन) प्रशिक्षुओं के माध्यम से कराए गए इस आकलन को पारदर्शी और जमीनी माना जा रहा है। शिक्षा विभाग का मानना है कि कड़े मानकों के बावजूद यह परिणाम गुणवत्ता सुधार की स्पष्ट तस्वीर पेश करता है।

निपुण रैंकिंग वाले टॉप जिले
निपुण रैंकिंग में प्रदेश के कई जिलों ने उत्कृष्ट प्रदर्शन किया है। निपुण आकलन के आधार पर सबसे अधिक निपुण विद्यालयों वाले जिलों में हरदोई (1002 विद्यालय), अलीगढ़ (969 विद्यालय), शाहजहांपुर (916 विद्यालय), महाराजगंज (874 विद्यालय) और खीरी (830 विद्यालय) शीर्ष स्थान पर हैं। ये आंकड़े दर्शाते हैं कि इन जिलों में बड़ी संख्या में विद्यालयों ने निपुण मानक हासिल किया है और शिक्षा की गुणवत्ता सुधार के प्रयासों का ठोस असर जमीनी स्तर पर दिखाई दे रहा है।

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पारदर्शी आकलन, डीएलएड प्रशिक्षुओं की भूमिका
इस बार आकलन प्रक्रिया को और अधिक पारदर्शी बनाने के लिए डीएलएड प्रशिक्षुओं को जिम्मेदारी दी गई। उन्होंने विद्यालयों में जाकर कक्षा 1 और 2 के छात्रों की सीखने की क्षमता का वास्तविक परीक्षण किया। निपुण भारत मॉनिटरिंग सेंटर के माध्यम से यह रिपोर्ट सभी जिला बेसिक शिक्षा अधिकारियों, खंड शिक्षा अधिकारियों और प्रधानाध्यापकों के पोर्टल पर उपलब्ध करा दी गई है। इससे न सिर्फ योगी सरकार की पारदर्शिता नीति को बल मिला है, बल्कि जवाबदेही भी तय हुई है।

शिक्षकों का सम्मान और आर्थिक प्रोत्साहन
निपुण घोषित विद्यालयों के लिए सरकार ने विशेष प्रोत्साहन योजना लागू की है। प्रत्येक विद्यालय को ₹50 हजार की धनराशि दी जाती है, जिसका उपयोग शैक्षणिक सामग्री और बुनियादी सुविधाओं को मजबूत करना है। साथ ही उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले शिक्षकों को जिला और ब्लॉक स्तर पर सम्मानित किया जाता है। विद्यालय परिसरों में ‘निपुण विद्यालय’ का लोगो भी प्रदर्शित किया जाता है, जिससे उनकी अलग पहचान बनती है।

गुणवत्ता सुधार का व्यापक अभियान
निपुण परिणामों के पीछे व्यापक तैयारी की भूमिका है। बेसिक स्कूलों के शिक्षकों को फाउंडेशनल लिटरेसी एंड न्यूमेरसी (पढ़ने, लिखने और गणना) आधारित प्रशिक्षण दिया गया है। परिषदीय विद्यालयों में स्मार्ट क्लास व ICT लैब विकसित किए गए हैं। 2.61 लाख शिक्षकों को टैबलेट वितरण से डिजिटल शिक्षण को बढ़ावा मिला है। ऑपरेशन कायाकल्प के तहत 1.32 लाख विद्यालयों में बुनियादी सुविधाएं सुदृढ़ की गई हैं। स्कूल चलो अभियान के तहत 2024-25 में 13.22 लाख और 2025-26 में 15.84 लाख बच्चों का नामांकन कराया गया। 7.73 लाख आउट ऑफ स्कूल बच्चों की पहचान कर उन्हें मुख्यधारा से जोड़ा गया। 

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समग्र बदलाव का संकेत
2025-26 में करीब 1.07 लाख परिषदीय विद्यालयों का आकलन किया गया था। कड़े मानकों के बावजूद 32,480 विद्यालयों का निपुण घोषित होना इस बात का संकेत है कि प्रदेश में शिक्षा की गुणवत्ता में वास्तविक सुधार हुआ है। अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि कम प्रदर्शन वाले विद्यालयों को चिन्हित कर उन्हें निपुण श्रेणी में लाने के लिए विशेष प्रयास किए जाएं।

प्रदेश में बेसिक शिक्षा अब केवल नामांकन तक सीमित नहीं है, बल्कि सीखने के परिणामों पर फोकस है। निपुण भारत मिशन के तहत मिले ये परिणाम बताते हैं कि नीति, प्रशिक्षण और निगरानी का समन्वय असर दिखा रहा है। आने वाले समय में और अधिक विद्यालयों को निपुण श्रेणी में लाने की तैयारी है, जिससे शिक्षा की गुणवत्ता को और ऊंचा उठाया जा सके।

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