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विश्वास मत पर फैसला! सम्राट चौधरी की अग्निपरीक्षा, बिहार विधानसभा के विशेष सत्र की तारीख घोषित

By Admin|18 Apr 2026, 8:31 PM
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पटना
बिहार में नवनियुक्त मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के नेतृत्व में गठित एनडीए की नई सरकार के विश्वास मत पेश करने की तारीख आ गई है। बिहार विधानसभा के एक दिवसीय विशेष सत्र की तिथि का ऐलान हो गया है। विधानसभा सचिवालय ने शनिवार को इसकी अधिसूचना जारी कर दी। यह विशेष सत्र आगामी शुक्रवार, 24 अप्रैल को बुलाया गया है। मंत्रिमंडल विस्तार से पहले सीएम सम्राट चौधरी विधानसभा में अपनी सरकार का विश्वास मत पेश करेंगे।

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बिहार विधानसभा सचिवालय ने सभी सदस्यों को 24 अप्रैल सुबह 11 बजे सदन में उपस्थित होने के लिए अनुरोध किया है। विधानसभा के निदेशक राजीव कुमार ने शनिवार को इस संबंध में आह्वान पत्र जारी किया। यह विशेष सत्र एक दिन का ही रहेगा। एनडीए के पास सदन में भारी बहुमत है। ऐसे में सरकार के सामने बहुमत परीक्षण का कोई संकट नहीं आएगा। सम्राट चौधरी आसानी से सदन में अपना विश्वास मत पेश कर देंगे।

नई सरकार के कैबिनेट विस्तार का इंतजार
सम्राट चौधरी के नेतृत्व वाली एनडीए की नई सरकार के कैबिनेट का विस्तार अभी नहीं हुआ है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के इस्तीफे के बाद 15 अप्रैल को नई सरकार का शपथ ग्रहण हुआ था। इसमें सम्राट चौधरी ने मुख्यमंत्री पद और जदयू के दो वरीय नेताओं विजय चौधरी एवं बिजेंद्र प्रसाद यादव ने डिप्टी सीएम पद की शपथ ली थी।

माना जा रहा है कि सदन में विश्वास मत पेश करने के बाद ही सम्राट कैबिनेट का विस्तार किया जाएगा। मंत्रिमंडल विस्तार अगले महीने होने की संभावना है। बताया जा रहा है कि पश्चिम बंगाल समेत पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव होने के बाद बिहार में नए मंत्रियों का शपथ ग्रहण होगा। तब तक मुख्यमंत्री और दोनों डिप्टी सीएम मिलकर ही सरकार चलाएंगे।

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एनडीए के पास सदन में भारी बहुमत
243 सदस्यों वाली बिहार विधानसभा में सत्ताधारी गठबंधन के पास भारी बहुमत है। पिछले साल हुए बिहार विधानसभा चुनाव में भाजपा, जदयू समेत पांचों सहयोगी दलों ने मिलकर 202 सीटों पर जीत दर्ज की थी। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के राज्यसभा सांसद बनने के बाद उन्होंने विधानसभा की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया था। वह पटना की बांकीपुर सीट से विधायक थे, जो अभी खाली है।

इस तरह, एनडीए के पास अभी विधानसभा में 201 विधायक हैं। इनमें भाजपा के 88, जदयू के 85, लोजपा (रामविलास) के 19, हम के 5 और रालोमो के 4 विधायक शामिल हैं। जबकि सरकार बनाने के लिए 122 विधायकों का समर्थन ही चाहिए होता है। वहीं, विपक्षी दलों के महागठबंधन के 35 विधायक ही हैं। पिछले महीने हुए राज्यसभा चुनाव में इनमें से कांग्रेस के 3 विधायकों ने वोटिंग से दूरी बनाई थी, जिसके बाद महागठबंधन में भी टूट की चर्चा होने लगी थी।

क्या है विश्वास मत की प्रक्रिया
संविधान के अनुच्छेद 163, 164 और 175 के तहत नई सरकार के गठन के बाद राज्यपाल बहुमत परीक्षण के लिए विधानसभा सत्र बुलाने का निर्देश देते हैं। नई सरकार को सदन में विश्वास मत के जरिए यह साबित करना होता है कि उसे विधानसभा के कुल सदस्य संख्या का बहुमत हासिल है। मुख्यमंत्री खुद सदन में विश्वास मत का प्रस्ताव पेश करते हैं। फिर इस पर सदन में चर्चा होती है। इसके बाद ध्वनि मत या वोटिंग से इस प्रस्ताव को पारित या खारिज करने का फैसला होता है।

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