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राजस्थान में चर्चा में आया नागौर का मायरा, परंपरा और प्रेम की मिसाल

By Admin|15 Apr 2026, 3:41 PM
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 नागौर

राजस्थान में नागौर जिले के श्यामसर गांव में भाई-बहन के रिश्ते ने ऐसी मिसाल पेश की है, जिसने पूरे मारवाड़ ही नहीं, बल्कि राजस्थान भर में चर्चा की लहर पैदा कर दी है. यहां चार भाइयों ने अपनी बहन के लिए ऐसा मायरा भरा, जो अब इतिहास बन गया है. यह मायरा सिर्फ धन-दौलत का प्रदर्शन नहीं, बल्कि भावनाओं, परंपराओं और संस्कारों का अनोखा संगम बनकर सामने आया है.

इतिहास रच गया मायरा
श्यामसर निवासी सुरजाराम सियाग की बेटी रामी देवी के परिवार में शादी का अवसर था. उनके बच्चों के विवाह समारोह में मायरे की रस्म के दौरान उनके चार भाइयों- गंगाराम, शिवलाल, खीयाराम और श्रवणराम ने मिलकर दिल खोलकर मायरा भरा. 21 लाख 51 हजार रुपये नगद, 25 बीघा खेती योग्य जमीन,7 बरी सोना, 21 बरी चांदी, 51 हजार रुपये टीका-  कुल मिलाकर यह मायरा 1 करोड़ 51 लाख रुपये का रहा, जिसने इस परंपरा को एक नई ऊंचाई दे दी.

1 करोड़ 51 लाख का उपहार
स्थानीय लोगों के अनुसार, 'इतना बड़ा मायरा पहले कभी नहीं देखा गया. गांव के बुजुर्गों का कहना है कि यह आयोजन केवल आर्थिक संपन्नता नहीं, बल्कि भाई-बहन के अटूट प्रेम और सामाजिक प्रतिष्ठा का प्रतीक है. यह घटना यह भी दिखाती है कि जहां कई जगह मायरा केवल औपचारिकता बनकर रह गया है, वहीं श्यामसर के इन भाइयों ने इसे फिर से भावनाओं और जिम्मेदारी का उत्सव बना दिया.

पूरा इलाका इस अनोखे मायरे की चर्चा कर रहा है. आस-पास के गांवों से लोग इस आयोजन को देखने और इसके बारे में जानने के लिए उत्सुक हैं. सोशल स्तर पर भी यह खबर तेजी से फैल रही है और लोग इसे राजस्थानी परंपरा का स्वर्णिम उदाहरण बता रहे हैं.

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परंपरा और आधुनिकता का संगम
राजस्थान में मायरा केवल रस्म नहीं, बल्कि भाई द्वारा बहन के प्रति जिम्मेदारी और सम्मान का प्रतीक माना जाता है. श्यामसर की इस घटना ने यह साबित कर दिया कि आधुनिक समय में भी परंपराएं जीवित हैं, बस उन्हें निभाने का जज्बा होना चाहिए. क्या श्यामसर का यह मायरा आने वाले समय में नई परंपरा बनेगा? या फिर यह केवल एक अनोखी मिसाल बनकर रह जाएगा? श्यामसर का यह मायरा केवल एक परिवार की खुशी नहीं, बल्कि पूरे समाज के लिए एक संदेश है.

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