मध्य प्रदेशराज्‍य

शादी का झांसा देकर यौन शोषण, कोर्ट ने दी 10 साल की सजा, सख्त कार्रवाई जरूरी

By Admin|12 Apr 2026, 9:11 AM
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इंदौर 

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मध्य प्रदेश की इंदौर जिला अदालत ने लिव-इन रिलेशनशिप और विवाह के झूठे वादे से जुड़े एक गंभीर मामले में ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। कोर्ट ने पीड़िता को शादी का झांसा देकर शारीरिक शोषण करने वाले दोषी को 10 वर्ष के कठोर कारावास की सजा दी है। फैसले के दौरान न्यायाधीश ने टिप्पणी की कि विवाह का प्रलोभन देकर संबंध बनाना एक गंभीर सामाजिक अपराध है, जिसमें अपराधियों को कड़ा सबक मिलना अनिवार्य है।

विवाह का झांसा देकर बनाया संबंध
आरोपी ने विवाह का आश्वासन देकर पीड़िता के साथ करीब तीन माह तक शारीरिक संबंध बनाए। 25 जून 2022 तक दोनों साथ रहे। इसके बाद आरोपी जबलपुर चला गया।

जब पीड़िता ने उससे संपर्क किया तो उसने बताया कि उसकी सगाई पहले से तय है और वह विवाह नहीं कर सकता। परिजनों से संपर्क करने पर भी विवाह से इंकार कर दिया गया।

एफआईआर के बाद कार्रवाई
धोखा मिलने के बाद पीड़िता ने आजाद नगर थाना में आरोपी के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई। मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर आरोपी को दोषी पाया।

10 अप्रैल को उसे 10 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई गई। मामले में शासन की ओर से पैरवी एजीपी जयंत दुबे ने की।

क्या था पूरा मामला?
यह मामला साल 2021 से शुरू हुआ था। मूल रूप से जबलपुर की रहने वाली पीड़िता इंदौर में एक पार्टी के दौरान आरोपी के संपर्क में आई थी।

    संपर्क और सहायता: सितंबर 2021 में पीड़िता इंदौर शिफ्ट हुई। जब आरोपी ने नौकरी की तलाश की बात कही, तो पीड़िता ने उसे अपनी जान-पहचान से एक फैक्ट्री में काम दिलवाया।

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    लिव-इन और वादा: मार्च 2022 में जब पीड़िता इंदौर छोड़ने वाली थी, तब आरोपी ने उसे रुकने के लिए मनाया और साथ में रहने लगा। आरोप है कि उसने शादी का वादा कर करीब तीन महीने तक पीड़िता का यौन शोषण किया।

    धोखाधड़ी का खुलासा: जून 2022 में आरोपी अचानक जबलपुर चला गया। जब पीड़िता ने शादी का दबाव बनाया, तो उसने खुलासा किया कि उसकी सगाई कहीं और हो चुकी है।

कानूनी कार्रवाई और सजा
पीड़िता ने हिम्मत दिखाते हुए आजाद नगर पुलिस थाने में शिकायत दर्ज कराई। कोर्ट में अभियोजन पक्ष की ओर से एजीपी जयंत दुबे ने ठोस पैरवी की। गवाहों और साक्ष्यों के आधार पर अदालत ने माना कि आरोपी की मंशा शुरू से ही धोखाधड़ी की थी। 10 अप्रैल को कोर्ट ने अपना फैसला सुनाते हुए दोषी को जेल भेज दिया।

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