उत्तर प्रदेशराज्‍य

बालवाटिका को सक्षम, संवेदनशील और सृजनशील नागरिक गढ़ने की पहली प्रयोगशाला बना रही योगी सरकार

By Admin|17 Apr 2026, 8:26 PM
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लखनऊ.
बालवाटिका को प्रारंभिक शिक्षा के केंद्र के साथ-साथ योगी सरकार उसे भविष्य के सक्षम, संवेदनशील और सृजनशील नागरिकों के निर्माण की पहली प्रयोगशाला के रूप में विकसित करने की दिशा में निर्णायक पहल कर रही है। प्रारंभिक बाल्यावस्था शिक्षा को नई दिशा देते हुए बालवाटिका (3 से 6 वर्ष आयु वर्ग) को समग्र विकास के केंद्र के रूप में विकसित किया जा रहा है।

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बालवाटिका के नवीन पाठ्यक्रम में भारतीय ज्ञान परंपरा के ‘पंचकोश’ सिद्धांत को बाल विकास के पांच प्रमुख आयामों से वैज्ञानिक रूप से जोड़ा गया है। अन्नमय कोष को शारीरिक विकास, प्राणमय कोष को सामाजिक-भावनात्मक एवं नैतिक विकास, मनोमय कोष को भाषा एवं साक्षरता, विज्ञानमय कोष को संज्ञानात्मक विकास तथा आनंदमय कोष को सौंदर्यबोध विकास से जोड़ा गया है। इसी के अनुरूप एससीईआरटी द्वारा इनके लिए चहक, कदम और कलांकुर जैसी वर्कबुक, गतिविधि पुस्तिकाएं, चित्र कथा, संख्या ज्ञान, कला एवं संगीत आधारित सामग्री विकसित की गई है। ये खेल, कहानी और गतिविधि आधारित शिक्षण पद्धति के माध्यम से बच्चों के सर्वांगीण विकास को सुनिश्चित करतीं हैं। 

योगी सरकार की इस पहल से बच्चों का विकास शैक्षणिक स्तर के साथ-साथ उनके शरीर, मन, बुद्धि और भावनाओं के संतुलित व समग्र विकास के रूप में होगा। वे प्रारंभिक अवस्था से ही सृजनशील, संवेदनशील और सक्षम नागरिक के रूप में विकसित भी होंगे। 

यह है उद्देश्य
इस पाठ्यक्रम को तैयार करने का उद्देश्य बच्चों के व्यक्तित्व के प्रत्येक पहलू को संतुलित रूप से विकसित करना है, ताकि प्रारंभिक अवस्था से ही उनकी सीखने की नींव मजबूत हो सके। बालवाटिका के लिए तैयार यह पाठ्यक्रम खेल, गतिविधि और अनुभव आधारित शिक्षण पर आधारित है। बच्चों को कहानी, संवाद, चित्रकला और समूह गतिविधियों के माध्यम से सीखने का अवसर दिया जा रहा है, जिससे वे बिना दबाव के भाषा और संख्यात्मक दक्षताओं के साथ-साथ सामाजिक व्यवहार भी विकसित कर सकें।

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यह हैं पाठ्यक्रम-बाल विकास के निर्धारित चरण
पाठ्यक्रम में शारीरिक विकास के लिए खेलकूद, भाषा विकास के लिए संवाद आधारित गतिविधियां, संज्ञानात्मक विकास के लिए जिज्ञासा आधारित सीखने की प्रक्रिया, सामाजिक एवं नैतिक विकास के लिए समूह सहभागिता तथा सौंदर्यबोध के लिए रचनात्मक गतिविधियों को शामिल किया गया है। इससे बच्चों में आत्मविश्वास, संवेदनशीलता और सृजनात्मक सोच का विकास सुनिश्चित किया जा सकेगा।

भविष्य में दिखेगा सकारात्मक प्रभाव
एससीईआरटी के संयुक्त निदेशक डॉ. पवन सचान का कहना है कि 3 से 6 वर्ष की आयु के बच्चों के विकास की सबसे महत्वपूर्ण अवस्था होती है, जिसमें विकसित होने वाली लगभग 85% क्षमताएं बच्चे के भविष्य की दिशा तय करती हैं। ऐसे में इस आयु वर्ग के लिए समग्र और गुणवत्तापूर्ण बाल केंद्रित पाठ्यक्रम विकसित किया गया है।

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