मध्य प्रदेश

आंगनवाड़ी केन्द्र बच्चों के जीवन की नींव, मंत्री सुश्री भूरिया का बयान

By Admin|24 Mar 2026, 8:01 PM
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आंगनवाड़ी केन्द्र बच्चों के जीवन की सबसे महत्वपूर्ण प्रारंभिक पाठशाला : मंत्री सुश्री भूरिया

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आंगनवाड़ी केन्द्र में पोषण और शिक्षा दोनों का रखा जाता है समग्र ध्यान
97 हजार आंगनवाड़ी केन्द्रों में ‘विद्यारंभ’ उत्सव

भोपाल 

मध्यप्रदेश में शाला-पूर्व शिक्षा को सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के तहत प्रदेशभर के आंगनवाड़ी केन्द्रों में मंगलवार को बच्चों का विशेष समारोह आयोजित किया गया। इस अवसर पर महिला एवं बाल विकास मंत्री सुश्री निर्मला भूरिया आंगनवाड़ी से प्रारंभिक शिक्षा पूरी कर विद्यालय में प्रवेश लेने जा रहे बच्चों को ‘विद्यारंभ प्रमाणपत्र’ प्रदान कर सम्मानित किया। प्रदेश के 97 हजार से अधिक आंगनवाड़ी केन्द्रों में एक साथ आयोजित इस कार्यक्रम के माध्यम से लगभग 10 लाख बच्चे आंगनवाड़ी से आगे बढ़कर औपचारिक स्कूली शिक्षा की ओर कदम रख रहे हैं।

भोपाल के नेहरू नगर आंगनवाड़ी क्रं. 1061 में आयोजित राज्य स्तरीय कार्यक्रम में मंत्री सुश्री भूरिया ने बच्चों और उनके अभिभावकों को शुभकामनाएँ देते हुए कहा कि आंगनवाड़ी केन्द्र बच्चों के जीवन की सबसे महत्वपूर्ण प्रारंभिक पाठशाला हैं, जहाँ पोषण और शिक्षा दोनों का समग्र ध्यान रखा जाता है। आंगनवाड़ी केन्द्र केवल बच्चों की देखभाल का स्थान नहीं बल्कि मातृ-शिशु स्वास्थ्य, पोषण और प्रारंभिक शिक्षा का समन्वित केन्द्र हैं। यहाँ गर्भवती महिलाओं के पंजीयन से लेकर बच्चे के जन्म और छह वर्ष की आयु तक उनके पोषण, स्वास्थ्य और समग्र विकास का ध्यान रखा जाता है। इसी उद्देश्य से प्रदेश में “पोषण भी, पढ़ाई भी” कार्यक्रम संचालित किया जा रहा है, इससे बच्चों को खेल-खेल में प्रारंभिक शिक्षा प्रदान की जाती है।

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मंत्री सुश्री भूरिया ने बताया कि 3 से 6 वर्ष की आयु के दौरान आंगनवाड़ी केन्द्रों में बच्चों के शारीरिक, बौद्धिक, सामाजिक और भावनात्मक विकास पर विशेष ध्यान दिया जाता है। इसी आधार पर वे आगे विद्यालयी शिक्षा के लिए तैयार होते हैं। भारत सरकार के निर्देशानुसार अब आंगनवाड़ी में 3 वर्ष की प्रारंभिक शिक्षा पूर्ण करने वाले बच्चों को ‘विद्यारंभ प्रमाणपत्र’ प्रदान किया जा रहा है, जिससे उनकी शाला-पूर्व शिक्षा को औपचारिक मान्यता मिल सके। उन्होंने आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं की सराहना करते हुए कहा कि वे मातृ-शिशु स्वास्थ्य, पोषण और शिक्षा जैसे अनेक महत्वपूर्ण दायित्वों का निर्वहन समर्पण के साथ कर रही हैं। उनके प्रयासों का ही परिणाम है कि हर वर्ष लाखों बच्चे आंगनवाड़ी केन्द्रों से गुणवत्तापूर्ण प्रारंभिक शिक्षा प्राप्त कर विद्यालय में प्रवेश के लिए तैयार हो रहे हैं।

मंत्री सुश्री भूरिया ने कहा कि मध्यप्रदेश में आंगनवाड़ी केन्द्रों के माध्यम से शाला-पूर्व शिक्षा की गुणवत्ता लगातार बेहतर हो रही है। बच्चों को खेल आधारित शिक्षा, पोषण और विकास के समन्वित वातावरण में तैयार कर उन्हें विद्यालयी शिक्षा के लिए सक्षम बनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि यह पहल न केवल बच्चों के उज्ज्वल भविष्य की मजबूत नींव रखेगी, बल्कि प्रदेश में प्रारंभिक बाल्यावस्था शिक्षा को और अधिक सशक्त बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण सिद्ध होगी।

औपचारिक शिक्षा के अनौपचारिक शिक्षा जरूरी : श्रीमती रश्मि

सचिव, महिला बाल विकास श्रीमती जी वी रश्मि ने कहा कि यह प्रमाण पत्र केवल एक दस्तावेज़ नहीं, बल्कि बच्चों की शिक्षा यात्रा का पहला महत्वपूर्ण पड़ाव है। इसका उद्देश्य आंगनवाड़ी की अनौपचारिक शिक्षा से प्राथमिक विद्यालय की औपचारिक शिक्षा में बच्चों का सहज और आनंदपूर्वक प्रवेश सुनिश्चित करना है। उन्होंने कहा कि बच्चों की ग्रोथ के लिये पिता की भूमिका अति महत्वपूर्ण है। माता-पिता के संयुक्त प्रयासों से बच्चे के बेहतर भविष्य की नींव रखी जाती है।

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सचिव श्रीमती रश्मि ने कहा कि राष्ट्रीय ECCE नीति 2013 और राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुरूप यह पहल प्रारंभिक बाल्यावस्था शिक्षा को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। इस आयोजन से परिवार और समुदाय में शाला पूर्व शिक्षा के महत्व के प्रति जागरूकता बढ़ेगी तथा बच्चों के स्कूल में प्रवेश और उनकी शैक्षणिक निरंतरता को बल मिलेगा।

इस अवसर पर मंत्री सुश्री भूरिया ने बच्चों को प्रमाण-पत्र वितरित किए। कार्यक्रम में बच्चों के अभिभावक श्रीमती बबली शुकवारे और श्री अमित करोसिया ने अपने बच्चों के आंगनवाडी में जाने से आए बदलाव के बारे में बताया। कार्यक्रम में आंगनवाडी के बच्चों ने मनमोहक नृत्य प्रस्तुत किया।

 

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