मध्य प्रदेशराज्‍य

तालाबों में पानी की गुणवत्ता सुधारने के लिए निगम की नैनो एरेटर तकनीक, 10 दिन में क्षीरसागर में दिखा बदलाव

By Admin|28 Apr 2026, 9:12 AM
f X W

उज्जैन 

शहर के तालाबों की बिगड़ती स्थिति को सुधारने के लिए नगर निगम ने नैनो डिफ्यूजर सॉफ्ट एरेटर तकनीक का प्रयोग शुरू किया है। इसकी शुरुआत क्षीरसागर तालाब से की गई है, जहां 10 दिनों से यह तकनीक काम कर रही है। अधिकारियों द्वारा लगातार मॉनिटरिंग की जा रही है और शुरुआती निरीक्षण में पानी की गुणवत्ता में सुधार देखा गया है।

नगर निगम आयुक्त अभिलाष मिश्रा ने हाल ही में स्थल निरीक्षण किया, जिसमें पानी पहले की तुलना में साफ नजर आया। शहर में शिप्रा नदी के साथ-साथ सप्त सागर का धार्मिक और पर्यावरणीय महत्व है, लेकिन जल प्रवाह नहीं होने से तालाबों का पानी अक्सर दूषित हो जाता है।

इससे मछलियों और अन्य जलीय जीवों की मृत्यु होती है। गर्मी में बदबू के कारण आसपास रहना भी मुश्किल हो जाता है। क्षीरसागर में बड़ी संख्या में मछलियां हैं, लेकिन ऑक्सीजन की कमी के कारण उनकी मौत की घटनाएं सामने आती रही हैं। इस समस्या के समाधान के लिए निगम ने यह तकनीक शुरू की है। सफल होने पर इसे शहर के अन्य तालाबों में भी लागू किया जा सकेगा। यह कार्य पर्यावरणविद एसपीएस रंधावा और उनकी टीम की देखरेख में किया जा रहा है।

कैसे काम करती है तकनीक
नैनो डिफ्यूजर सॉफ्ट एरेटर तकनीक के तहत तालाब में ऐसे उपकरण लगाए जाते हैं जो पानी के भीतर बेहद छोटे-छोटे हवा के बुलबुले छोड़ते हैं। ये नैनो बुलबुले पानी में घुलकर ऑक्सीजन की मात्रा बढ़ाते हैं, जिससे गंदगी फैलाने वाले बैक्टीरिया खत्म होते हैं और पानी धीरे-धीरे साफ व पारदर्शी बनने लगता है।

READ ALSO  छत्तीसगढ़ के कृष्ण अग्रवाल ने बढ़ाया रायगढ़ का मान, राष्ट्रीय विज्ञान प्रदर्शनी में मिला सम्मान

फाउंटेन से अलग क्यों है
तालाबों में पहले से लगे फव्वारे मुख्य रूप से सतह पर ही असर करते हैं और सजावटी होते हैं। नैनो एरेटर तकनीक पानी की गहराई तक पहुंचकर वास्तविक सफाई करती है और लंबे समय तक प्रभाव बनाए रखती है।

इसके मुख्य फायदे पानी की गुणवत्ता में सुधार बदबू और गंदगी में कमी मछलियों और जलीय जीवों को बेहतर वातावरण मिलने से उनकी मौत नहीं होगी। किनारे पर जमने वाली काई (ग्रीन लेयर) पर नियंत्रण।

अगली खबर लोड हो रही है...

Related Articles

Back to top button