छत्तीसगढ़

छत्तीसगढ़ में हाथी संरक्षण पर फोकस, फोरेंसिक तकनीकों से लैस होगा वन विभाग का अमला

By Admin|08 Jun 2026, 9:11 PM
f X W

सूरजपुर/ रायपुर.

Advertisement
Advertisement

प्रदेश के वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री केदार कश्यप के मार्गदर्शन तथा प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं वन बल प्रमुख अरुण कुमार पाण्डेय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग द्वारा रायगढ़ में हाथियों की मृत्यु की वैज्ञानिक जांच एवं वन्यजीव अपराधों की पहचान को सुदृढ़ बनाने के उद्देश्य से दो दिवसीय विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया। 

“कार्यक्रम में एशियाई हाथियों की मृत्यु जांच की आवश्यक प्रक्रियाएं” विषय पर आयोजित इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में प्रदेश के विभिन्न वन क्षेत्रों से आए 78 वन अधिकारी एवं पशु चिकित्सा विशेषज्ञों ने भाग लिया। विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर आयोजित इस प्रशिक्षण का उद्देश्य हाथियों की मृत्यु के कारणों की वैज्ञानिक जांच, वन्यजीव अपराधों की पहचान तथा संरक्षण संबंधी प्रयासों को और अधिक प्रभावी बनाना था। छत्तीसगढ़ में वर्तमान में लगभग 450 हाथियों की उपस्थिति है।

रायगढ़, जशपुर, कोरबा और सूरजपुर जैसे जिलों में हाथियों की बढ़ती आवाजाही तथा मानव-हाथी संघर्ष की चुनौतियों को देखते हुए यह प्रशिक्षण आयोजित किया गया। वन विभाग का मानना है कि किसी हाथी की मृत्यु के पीछे बीमारी, विद्युत प्रवाह, विषप्रयोग, शिकार अथवा अन्य कारणों की सटीक पहचान किए बिना भविष्य में ऐसी घटनाओं की रोकथाम और दोषियों के विरुद्ध प्रभावी कानूनी कार्रवाई संभव नहीं है।
प्रशिक्षण के दौरान अधिकारियों को हाथियों की शारीरिक संरचना, स्वास्थ्य, व्यवहार एवं प्रबंधन की विस्तृत जानकारी दी गई। विशेषज्ञों ने बताया कि किसी भी हाथी की मृत्यु की जांच केवल एक औपचारिक प्रक्रिया नहीं बल्कि वैज्ञानिक तथ्यों और साक्ष्यों पर आधारित विस्तृत अध्ययन है। प्रतिभागियों को यह भी बताया गया कि जंगल में मिला मृत हाथी संभावित रूप से एक अपराध स्थल भी हो सकता है, इसलिए घटनास्थल को सुरक्षित रखने, साक्ष्य एकत्रित करने तथा संदिग्ध परिस्थितियों की पहचान करने की प्रक्रियाओं का पालन अत्यंत आवश्यक है।

READ ALSO  रील बनाने रेलवे ट्रैक किनारे बैठा युवक, RPF ने पुणे से किया गिरफ्तार

कार्यक्रम में वन्यजीव अपराधों की जांच, साक्ष्यों के संरक्षण, हाथी दांत तस्करी से जुड़े मामलों में कानूनी प्रक्रियाओं तथा न्यायालय में उपयोगी वैज्ञानिक प्रमाणों के संकलन पर विशेष प्रशिक्षण दिया गया। अधिकारियों को यह भी सिखाया गया कि जांच के दौरान प्राप्त जैविक नमूनों को किस प्रकार सुरक्षित रखा जाए ताकि प्रयोगशाला परीक्षणों में उनकी गुणवत्ता बनी रहे।
प्रशिक्षण के दूसरे दिन अधिकारियों और पशु चिकित्सकों को फील्ड स्तर पर हाथियों के शव परीक्षण, नमूना संग्रहण, रक्त एवं ऊतक नमूनों के संरक्षण तथा विष विज्ञान एवं रोग परीक्षण के लिए आवश्यक प्रक्रियाओं का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया। कठिन परिस्थितियों और दुर्गम क्षेत्रों में सुरक्षित तरीके से शव परीक्षण करने की तकनीकों का भी प्रदर्शन किया गया।
इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में भारतीय वन्यजीव संस्थान, भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान तथा वन्यजीव फोरेंसिक एवं स्वास्थ्य अध्ययन संस्थान के विशेषज्ञों ने सहभागिता करते हुए आधुनिक वन्यजीव फोरेंसिक तकनीकों और वैज्ञानिक जांच पद्धतियों की जानकारी साझा की।

प्रशिक्षण के दौरान दोनों विभागों के अधिकारियों ने वन्यजीव रोगों की निगरानी, वन्यजीव अपराधों की जांच तथा संरक्षण संबंधी गतिविधियों में साझा कार्यप्रणाली विकसित करने पर बल दिया। अचानकमार टाइगर रिजर्व की क्षेत्र संचालक प्रियंका पांडे सहित अनेक वरिष्ठ अधिकारियों ने भी सक्रिय रूप से भागीदारी की। प्रशिक्षण में सभी 78 प्रतिभागियों को हाथियों सहित अन्य वन्यजीवों की मृत्यु जांच के लिए मानकीकृत वैज्ञानिक प्रक्रियाओं का प्रशिक्षण प्राप्त हुआ। इससे छत्तीसगढ़ वन विभाग की फोरेंसिक जांच, रोग निगरानी, वन्यजीव अपराध नियंत्रण तथा वन्यजीव संरक्षण की क्षमता और अधिक मजबूत होगी।

वन मंत्री केदार कश्यप ने कहा कि राज्य सरकार वन्यजीव संरक्षण को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए आधुनिक तकनीकों और वैज्ञानिक पद्धतियों को बढ़ावा दे रही है। हाथियों सहित सभी वन्यजीवों की सुरक्षा सुनिश्चित तथा मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने विभाग निरंतर क्षमता निर्माण, अनुसंधान और नवाचार आधारित प्रयास कर रहा है। यह प्रशिक्षण उसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जो प्रदेश में हाथियों के दीर्घकालिक संरक्षण और वन्यजीव प्रबंधन को नई मजबूती प्रदान करेगा।

READ ALSO  राजनांदगांव : नगर में आज मनाएंगे विश्व साक्षरता दिवस ...
अगली खबर लोड हो रही है...

Related Articles

Back to top button
Play GK Quiz and Win Coins