छत्तीसगढ़

Chhattisgarh Freedom of Religion Bill: सरकार ने लिया यू-टर्न, संशोधनों के बाद सर्वसम्मति से मंजूरी

By Admin|17 Mar 2026, 4:02 PM
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रायपुर.

विधानसभा बजट सत्र के दौरान मंगलवार को गृह मंत्री विजय शर्मा ने राज्यपाल द्वारा लौटाए गए छत्तीसगढ़ धर्म स्वातंत्र्य (संशोधन) विधेयक, 2006 पर विचार का प्रस्ताव प्रस्तुत किया. विचार के उपरांत आसंदी ने सरकार को विधेयक वापस लेने की अनुमति दी.

विधानसभा में छत्तीसगढ़ धर्म स्वातंत्र्य (संशोधन) विधेयक, 2006 को वापस लेने के अलावा राजस्व मंत्री टंकराम वर्मा ने छत्तीसगढ़ भू-राजस्व संहिता (संशोधन) विधेयक, 2026 के पुर्नस्थापन प्रस्ताव प्रस्तुत किया. जिसे विधानसभा में सर्वसम्मति से पारित किया. इसके साथ मंत्री ओपी चौधरी ने छत्तीसगढ़ नगर एवं ग्राम निवेश (संशोधन) विधेयक, 2026 के पुर्नस्थापन का प्रस्ताव और छत्तीसगढ़ गृह निर्माण मंडल (संशोधन) विधेयक, 2026 के पुर्नस्थापन प्रस्ताव प्रस्तुत किया. विधानसभा में दोनों प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित हुआ.

एक के बाद एक प्रस्तुत किए गए प्रस्तावों के स्वीकार होने के बाद मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के विभागों से सम्बंधित अनुदान मांगों पर चर्चा शुरू हुआ. विपक्ष ने चर्चा में भाग नहीं लिया.

क्या है छत्तीसगढ़ में धर्मांतरण विधेयक?
छत्तीसगढ़ में धर्मांतरण स्वातंत्रय विधेयक 2026 के फॉर्मेट का अनुमोदन किया गया है. इस विधेयक का उद्देश्य छत्तीसगढ़ में एक धर्म से दूसरे धर्म में परिवर्तन के लिए बल प्रयोग, प्रलोभन, कपटपूर्ण नीति और साधनों पर सही तरीके से रोक लगाना है. अब अगर छत्तीसगढ़ में रहने वाले किसी व्यक्ति को कोई दूसरा इंसान जबरन दबाव डालकर धर्म परिवर्तन करवाता है, तो उसे दोषी मानते हुए उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी.

अगर नियम के बाहर कोई व्यक्ति धर्म बदलता है, तो उसे कानूनी मान्यता नहीं मिलेगी. विधेयक साफ तौर पर यह कहता है कि धर्म परिवर्तन किसी भी व्यक्ति की इच्छा से होना चाहिए. दबाव या लालच से नहीं. छत्तीसगढ़ में पहले से ही धर्म स्वतंत्रता अधिनियम, 1968 लागू है, जो 1 नवंबर, 2000 को अस्तित्व में आया था.

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सार्वजनिक की जाएगी धर्मांतरण की जानकारी
छत्तीसगढ़ में नए धर्मांतरण विधेयक के मुताबिक यदि कोई व्यक्ति अपनी इच्छा से धर्म परिवर्तन करना चाहता है, तो उसे निर्धारित प्रक्रिया के तहत जिला मजिस्ट्रेट को पूर्व सूचना देनी होगी. प्रस्तावित धर्मांतरण की जानकारी सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित की जाएगी और 30 दिनों के भीतर आपत्ति दर्ज कराने का नियम होगा. विधेयक में प्रलोभन, प्रपीड़न, दुर्व्यपदेशन, सामूहिक धर्मांतरण और डिजिटल माध्यम से धर्मांतरण जैसे शब्दों को स्पष्ट रूप से परिभाषित किया गया है. साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया है कि पैतृक धर्म में वापसी को धर्मांतरण नहीं माना जाएगा.

    जबरन धर्मांतरण करवाने पर है सजा का प्रावधान
    कानून में अवैध धर्मांतरण के मामलों के लिए कड़े दंड का प्रावधान किया गया है. अवैध तरीके से धर्मांतरण कराने पर 7 से 10 साल तक की जेल और कम से कम 5 लाख रुपए का जुर्माना हो सकता है.

    यदि पीड़ित नाबालिग, महिला, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति या अन्य पिछड़ा वर्ग से संबंधित है, तो सजा 10 से 20 साल तक की जेल और कम से कम 10 लाख रुपए का जुर्माना हो सकता है.

    सामूहिक धर्मांतरण के मामलों में सजा और कठोर होगी, जिसमें 10 वर्ष से लेकर आजीवन कारावास और कम से कम 25 लाख रुपए जुर्माना का प्रावधान किया गया है.

    विधेयक के तहत आने वाले अपराध संज्ञेय और गैर जमानती होंगे. मामलों की सुनवाई विशेष न्यायालय में की जाएगी. सरकार का कहना है कि इस कानून का उद्देश्य धार्मिक स्वतंत्रता को सीमित करना नहीं बल्कि अवैध तरीकों से होने वाले धर्मांतरण को रोकना है.

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दूसरे राज्यों से कैसे अलग है छत्तीसगढ़ का कानून
छत्तीसगढ़ से पहले उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, गुजरात, उत्तराखंड, कर्नाटक, हिमाचल प्रदेश, ओडिशा, हरियाणा, झारखंड, अरुणाचल प्रदेश और राजस्थान सहित कई राज्यों में धर्म बदलने के खिलाफ कानून मौजूद हैं. सभी राज्यों में लगभग कानून एक जैसा ही है, लेकिन उसकी सजा और जुर्माने में अंतर है. जबकि छत्तीसगढ़ में आदिवासियों की एक बड़ी आबादी है और उन क्षेत्रों पर विशेष फोकस किया गया है. इसके अलावा सामूहिक धर्मांतरण ना हो इस पर जोर दिया गया है और सख्त सजा का प्रावधान किया गया है.

छत्तीसगढ़ में धर्म परिवर्तन की आईं खबरें
छत्तीसगढ़ के बस्तर और जशपुर क्षेत्र में कई बार आदिवासियों को ईसाई धर्म में परिवर्तन की खबरें आई थीं. कई बार ऐसा भी पता चला है कि आदिवासियों और धर्म परिवर्तन करने वाले लोगों के बीच भी विवाद हुआ था. अब धर्मांतरण विधेयक के बाद ऐसे मामलों में रोक लगने की उम्मीद होगी. छत्तीसगढ़ में धर्मांतरण को लेकर पिछले कुछ महीनों में कई FIR भी दर्ज हुई हैं और पुलिस को शिकायत भी मिली है.

उपमुख्यमंत्री ने कही ये बात
धर्मांतरण विधेयक पर उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने कहा कि छत्तीसगढ़ में 1968 का धर्म स्वतंत्र विधेयक लागू है. अब परिस्थितियां बदल गई हैं, तो नई परिस्थितियों के तहत धर्म स्वतंत्र विधेयक लाया गया है.

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