मध्य प्रदेश

बुद्धि पर अंकुश? 10 साल के बच्चे के 9वीं में दाख़िले को लेकर हाईकोर्ट ने सरकार से मांगा जवाब

By Admin|27 Sep 2025, 8:21 PM
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जबलपुर
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने 10 साल के एक बच्चे को 9वीं कक्षा में दाखिला देने से इनकार करने पर सीबीएसई की कड़ी आलोचना की। कोर्ट की पीठ ने सीबीएसई से कहा कि आपकी राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) पर पुनर्विचार करने की आवश्यकता है। कोर्ट ने नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।

लाइव लॉ की रिपोर्ट के अनुसार, मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने प्रतिभाशाली बच्चों के लिए नीति पर केंद्र सरकार का रुख पूछा है। कोर्ट ने एकल पीठ के आदेश के खिलाफ सीबीएसई द्वारा दायर अपील पर सुनवाई की। इसमें 10 साल के लड़के को 9वीं कक्षा में अस्थायी प्रवेश देने का निर्देश दिया गया था।

बच्चे के पिता ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। उन्होंने दावा किया था कि उनके प्रतिभाशाली बेटे ने कक्षा 1 से 8 तक की पढ़ाई पूरी कर ली है, लेकिन सीबीएसई नियमों के तहत उम्र संबंधी प्रतिबंधों के कारण उसे कक्षा 9 में प्रवेश नहीं दिया गया। एकल पीठ ने अस्थायी प्रवेश की अनुमति तो दे दी, लेकिन सीबीएसई ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) का हवाला देते हुए इस आदेश को चुनौती दी। एनईपी 9वीं कक्षा में 10 साल के बच्चे के प्रवेश की अनुमति नहीं देता है।

सीबीएसई की याचिका पर सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश संजीव सचदेवा और जस्टिस विनय सराफ की खंडपीठ ने सीबीएसई के रवैये पर कड़ी आपत्ति जताई। पीठ ने कहा, "तो आपने प्रतिभाशाली बच्चों के बारे में नहीं सुना जो 14 साल की उम्र में एमबीबीएस डॉक्टर बन जाते हैं। आप बुद्धिमत्ता पर अंकुश लगाना चाहते हैं? आप उसे 9वीं कक्षा में नहीं चाहते?"

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पीठ ने उल्लेख किया कि असाधारण छात्र विश्व स्तर पर उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल करते हैं। अगर ऐसे छात्रों को जल्दी पदोन्नत किया जाता है तो सरकार पर क्या प्रभाव पड़ेगा।

सीबीएसई की ओर से पेश हुए वकील ने तर्क दिया कि उक्त नीतियां विशेषज्ञों द्वारा तैयार की गई थीं। इन नीतियों के पीछे एक उद्देश्य और तर्क था। पीठ ने इस बात पर जोर दिया कि भारत में सात साल की उम्र में एक व्यक्ति सर्जन बन जाता है। फिर 12 साल की उम्र में एक भारतीय शतरंज का ग्रैंडमास्टर बन जाता है। 13 साल की उम्र में एक व्यक्ति ने एक लॉजिस्टिक कंपनी स्थापित की।

पीठ ने सीबीएसई से कहा कि आपकी राष्ट्रीय शिक्षा नीति पर पुनर्विचार की आवश्यकता है। उन्होंने स्कूली दिनों में दोहरी पदोन्नति के उदाहरणों को भी याद किया। जब पूछा गया कि बच्चे को कब तक इंतजार करना होगा, तो सीबीएसई ने जवाब दिया कि दो साल। इस पर कोर्ट ने कहा कि दुनिया भर में प्रतिभाशाली बच्चे हैं। आप इसे स्वीकार करने को तैयार नहीं हैं।

कोर्ट ने नोटिस जारी कर केंद्र सरकार से पूछा है कि कृपया हमें बताएं कि आप प्रतिभाशाली बच्चों के बारे में क्या करना चाहते हैं। आप बुद्धिमत्ता पर अंकुश लगाना चाहते हैं। कोर्ट ने नोटिस का जवाब 6 अक्टूबर तक देने को कहा है।

 

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