मध्य प्रदेश

मंत्री सुश्री भूरिया करेंगी अध्यक्षता

By Admin|16 Mar 2026, 8:50 PM
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भोपाल
केंद्रीय दत्तक-ग्रहण संसाधन प्राधिकरण (सीएआरए-कारा), महिला एवं बाल विकास मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा मध्यप्रदेश शासन के सहयोग से दिव्यांग बच्चों के पारिवारिक पुनर्वास और दत्तक-ग्रहण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से मध्य क्षेत्रीय परामर्श कार्यशाला का आयोजन 17 मार्च मंगलवार को भोपाल में किया जाएगा। कार्यशाला की अध्यक्षता महिला एवं बाल विकास मंत्री सुश्री निर्मला भूरिया करेंगी।

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यह कार्यशाला सीएआरए के दत्तक ग्रहण जागरूकता अभियान 2025-26 की थीम “विशेष आवश्यकता वाले बच्चों (दिव्यांग बच्चों) के गैर-संस्थागत पुनर्वास को बढ़ावा देना” के अनुरूप की जा रही है। इसका उद्देश्य दिव्यांग बच्चों को संस्थागत देखभाल के बजाय पारिवारिक वातावरण, स्नेह, सुरक्षा और सम्मानजनक जीवन उपलब्ध कराने की दिशा में ठोस पहल करना है।

मध्य क्षेत्र में मध्यप्रदेश, उत्तर प्रदेश, छत्तीसगढ़ और उत्तराखंड राज्य शामिल हैं। जिलों की संख्या के लिहाज से यह देश का सबसे बड़ा क्षेत्र है। कार्यशाला में 170 से अधिक जिलों के प्रतिनिधियों की भागीदारी अपेक्षित है। अभियान में आयोजित होने वाली यह सबसे व्यापक क्षेत्रीय परामर्श बैठकों में से एक होगी।

कार्यशाला में राज्य दत्तक संसाधन एजेंसियों (एसएआरए-सारा), विशेष दत्तक ग्रहण अभिकरणों, बाल देखभाल संस्थानों, जिला बाल संरक्षण इकाइयों, मुख्य चिकित्सा अधिकारियों, स्वास्थ्य विशेषज्ञों तथा बाल संरक्षण से जुड़े अन्य प्रमुख हितधारकों की सहभागिता रहेगी। कार्यक्रम के दौरान विशेष आवश्यकता वाले बच्चों के दत्तक ग्रहण की राज्यवार स्थिति, उत्कृष्ट प्रथाओं, सफल दत्तक-ग्रहण के प्रेरणादायक अनुभवों और साक्ष्य-आधारित हस्तक्षेपों पर विस्तृत चर्चा की जाएगी। साथ ही समूह चर्चाओं के माध्यम से क्रियान्वयन योग्य और समयबद्ध अनुशंसाएँ तैयार की जाएंगी। चिकित्सा, विधिक, वित्तीय और शिकायत निवारण से जुड़ी चुनौतियों पर भी विशेषज्ञ विचार-विमर्श करेंगे। इस अवसर पर विशेष आवश्यकता वाले बच्चों के सफल दत्तक ग्रहण पर आधारित एक लघु फिल्म की भी लाँचिंग की जाएगी, जो परिवार आधारित देखभाल की परिवर्तनकारी शक्ति को रेखांकित करेगी।

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परामर्श कार्यशाला से विभिन्न विभागों के बीच समन्वय को सुदृढ़ करने, प्रणालीगत कमियों की पहचान करने और नीति स्तर पर ठोस सुझाव तैयार करने का प्रयास किया जाएगा, जिससे दिव्यांग बच्चों के दत्तक ग्रहण और पुनर्वास को अधिक प्रभावी, समावेशी और बाल-केंद्रित बनाया जा सके।

 

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