मध्य प्रदेश

एमपी में 23 मार्च तक रिजल्ट घोषित होगा, 1 अप्रैल से स्कूल खुलेंगे, ड्रॉप-आउट रोकने के लिए शिक्षक करेंगे घर-घर संपर्क

By Admin|15 Mar 2026, 10:42 AM
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भोपाल
मध्य प्रदेश में नए शैक्षणिक सत्र 2026-27 की तैयारियां तेज हो गई हैं. लोक शिक्षण संचालनालय (डीपीआई) से मिली जानकारी के अनुसार 8वीं, 9वीं और 11वीं कक्षा के परीक्षा परिणाम 23 मार्च तक घोषित कर दिए जाएंगे. इसके बाद 24 से 31 मार्च तक विद्यार्थियों को अगली कक्षा में प्रवेश दिया जाएगा. वहीं एक अप्रैल से प्रदेश भर के सरकारी स्कूलों में नई कक्षाएं शुरू होंगी और प्रवेशोत्सव के साथ विशेष नामांकन अभियान भी चलाया जाएगा।

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हर कक्षा में बनाया जाएगा एक वार्डन
स्कूल शिक्षा विभाग ने इस बार सरकारी स्कूलों में विद्यार्थियों की संख्या बढ़ाने और ड्रॉप-आउट कम करने के लिए विशेष रणनीति बनाई है. डीपीआई द्वारा जारी दिशा-निर्देशों के तहत प्रत्येक कक्षा में एक शिक्षक को ‘वार्डन’ की जिम्मेदारी दी जाएगी. यह शिक्षक विद्यार्थियों की नियमित उपस्थिति पर नजर रखेगा. जो बच्चे लगातार अनुपस्थित रहेंगे, उनके अभिभावकों से सीधे संपर्क करेगा।

लोक शिक्षण संचालनालय की आयुक्त शिल्पा गुप्ता ने बताया कि नामांकन बढ़ाने के लिए शिक्षकों को घर-घर जाकर संपर्क अभियान चलाने के निर्देश दिए गए हैं. इस दौरान शिक्षक अभिभावकों को सरकारी स्कूलों में मिलने वाली सुविधाओं की जानकारी देंगे. इनमें निःशुल्क पाठ्यपुस्तकें, यूनिफॉर्म, स्कॉलरशिप सहित अन्य शासकीय योजनाएं शामिल हैं. विभाग का लक्ष्य है कि अधिक से अधिक बच्चों का नामांकन सुनिश्चित कर स्कूलों में शत-प्रतिशत उपस्थिति दर्ज कराई जाए।

सरकारी स्कूलों में रंगाई-पुताई के निर्देश
नए सत्र की तैयारियों को लेकर स्कूलों को भी कई निर्देश दिए गए हैं. एक अप्रैल से पहले सभी स्कूलों में पाठ्यपुस्तकों का वितरण पूरा कर लिया जाएगा, ताकि सत्र की शुरुआत से ही पढ़ाई सुचारू रूप से शुरू हो सके. इसके अलावा स्कूल भवनों की रंगाई-पुताई और साफ-सफाई का काम 30 मार्च तक पूरा करने को कहा गया है।

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बीते साल 3.43 लाख बच्चों ने रोकी पढ़ाई
दरअसल प्रदेश में बढ़ते ड्रॉप-आउट को देखते हुए सरकार और शिक्षा विभाग चिंतित है. पिछले वर्ष प्रदेश में करीब 3.43 लाख बच्चों ने स्कूल छोड़ दिया था. इनमें सबसे अधिक 2.66 लाख बच्चे सरकारी स्कूलों के हैं. 52 जिलों में सबसे ज्यादा खरगोन जिले से 20 हजार से अधिक बच्चे ड्रॉप-आउट हुए, जिन्होंने कहीं भी दोबारा प्रवेश नहीं लिया।

बजट बढ़ा, लेकिन कम हुई विद्यार्थियों की संख्या
जानकारी के अनुसार आठ साल पहले प्रदेश में पहली से 12वीं तक के स्कूलों में करीब 1.60 करोड़ बच्चों का पंजीयन हुआ था. आठ साल बाद इनमें से केवल 1 करोड़ 4 लाख बच्चे ही पढ़ाई में बने रहे. खास बात यह है कि इस दौरान स्कूल शिक्षा का बजट लगभग चार गुना बढ़कर 9 हजार करोड़ से 37 हजार करोड़ रुपये तक पहुंच गया. इसके बावजूद विद्यार्थियों की संख्या में कमी दर्ज की गई है।

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