छत्तीसगढ़

बच्चों की कलम से: क्या आपको भी क्रिकेट पसंद है मेरी तरह?

By Admin|14 Mar 2026, 1:27 PM
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रायपुर 
आखिर क्रिकेट है क्या? कुछ लोगों के लिए यह खेल होगा, तो कुछ लोगों के लिए रोजी-रोटी, तो किसी के लिए एक इमोशन| यह हर आयु के लोगों को पसंद आता है| एक ही छत के नीचे एक बच्चा, एक जवान, एक बूढ़ा सभी बैठते हैं क्रिकेट के रोमांच के लिए| यह खेल इंग्लैंड का राष्ट्रीय खेल है| यह भारत के गिल्ली डंडे के जैसा भी लगता है| इसमें कुल ग्यारह खिलाड़ी होते हैं| इसे खेलने के लिए हमें एक बल्ला और गेंद चाहिए होती है| एक विशाल गोलाकार मैदान के बीच बनी पिच पर इसे खेला जाता है| पिच को हर मैच के पहले रोल किया जाता है| भारत में तो लोग रोड पर भी क्रिकेट खेलते दिख जाएँगे| अब क्या कहूँ यही है हमारा भारत| 
क्रिकेट में भारत कहीं भी पीछे नहीं|

विश्व में जिसे बैटिंग का सरताज कहा जाता है वह भी एक भारतीय ही है- सचिन तेंदुलकर| दुनिया में लाखों बैट्समैन हुए हैं परंतु सचिन तेंदुलकर जैसा कोई नहीं| इस बात को तो पूरी दुनिया मानती है| जब सचिन सिर्फ तेरह साल के थे तब उन्होंने क्रिकेट की दुनिया में कदम रख लिया था| उन्होंने अपना पहला मैच पाकिस्तान के खिलाफ खेला था| उस समय की सबसे खतरनाक टीम पाकिस्तान के तेजतर्रार गेंदबाजों से पूरी दुनिया घबराती थीं| शोएब अख्तर और वसीम अकरम तो जान ले लेने वाली गेंद फेंकते थे| शोएब अख्तर ने पता नहीं कितने बल्लेबाजों के हेलमेट और बल्ले तोड़े हैं पर सचिन तेंदुलकर ने अपने पहले ही मैच में शोएब का सामना किया था| गेंद सीधा जाकर नाक पर लगी खून से लथपथ चेहरे को देख सभी ने कहा कि वापस चले जाओ परंतु पट्टी लगाकर वापस खेलने खड़ा हो गया मात्र सोलह वर्ष का बच्चा और उसने मैच में क्या पारी खेली| सभी को अचंभित कर दिया| उनकी स्टेट-ड्राइव की तो पूरी दुनिया दीवानी है| सौ से भी ज्यादा शतक मारे हैं उन्होंने अपने पूरे करियर में, अगर मैं कहूँ तो मेरे मनपसंद बल्लेबाज तो विराट कोहली हैं| मेरे मनपसंद गेंदबाज ऑस्ट्रेलिया के ब्रेट ली हैं उनका एक्शन मैकेनिकली परफेक्ट था| आस्ट्रेलिया टीम के पुराने कप्तान रिकी पोंटिंग भी काबिले तारीफ थे| 

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पहले पचास ओवरों के मैच चलन में थे जिसमें आपको अपनी तकनीक सुधारनी पड़ती थी और धीरज से खेलना पड़ता था, परंतु आजकल बीस ओवर के मैच प्रचलन में है| बल्लेबाज मात्र बीस ओवर में करीब दो सौ पचास रन बना देते हैं, परंतु पहले तो पचास ओवर में भी दो सौ  रन का एक बड़ा स्कोर होता था| आजकल की नई पीढ़ी तो पावर प्ले में विश्वास करती है यह सिर्फ एक खेल नहीं है यह कई लोगों के लिए की इमोशन की तरह है| यह हममें जोश लाता है| कभी-कभी तो दर्शक रो भी पड़ते हैं| यह खेल हमारे मानसिक और शारीरिक दोनों स्वास्थ को अच्छा रखता है| यह हममें धीरज और परफेक्शन लाता है इसलिए हमें इसके बारे में और जानना चाहिए| मैं खुद भी इस खेल से बहुत प्रभावित हूँ और मेरे जीवन में इससे कई छोटी-मोटी घटनाएँ जुड़ी है| आशा करता हूँ कि आप भी इस खेल को जरूर खेलना पसंद करेंगे मेरी तरह|.

अथर्व पटौदिया       ब्राइटन इंटरनेशनल स्कूल रायपुर   

 

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