मध्य प्रदेश

MP Health Alert: खसरे के 12 नए मरीज मिले, 4 जिलों में सतर्कता और सर्वे अभियान

By Admin|07 Mar 2026, 7:01 PM
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भोपाल

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मध्य प्रदेश में एक बार फिर संक्रामक बीमारी खसरे (मीजल्स) ने पैर पसारना शुरू कर दिया है। फरवरी 2024 के बाद, अब 2026 में प्रदेश के चार जिलों- अलीराजपुर, दतिया, शिवपुरी और बुरहानपुर में खसरे के 12 नए मामले सामने आए हैं। इन क्षेत्रों में बुखार, शरीर पर दाने और खांसी के लक्षणों वाले मरीजों की पुष्टि के बाद स्वास्थ्य विभाग ने पूरे प्रदेश में अलर्ट जारी कर दिया है। गौरतलब है कि साल 2024 में मैहर में खसरे से दो बच्चों की मौत हो गई थी, जिसके बाद अब मिल रहे नए केस ने प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है।
प्रभावित जिलों की स्थिति: कहां कितने मरीज?

स्वास्थ्य विभाग की रैपिड रिस्पांस टीम (RRT) ने प्रभावित गांवों का दौरा कर सैंपल लिए, जिसकी रिपोर्ट में संक्रमण की पुष्टि हुई है:

  • बुरहानपुर (बरौली गांव): यहां स्थिति सबसे गंभीर है, जहां भेजे गए सभी 5 सैंपल पॉजिटिव पाए गए हैं। संक्रमितों की उम्र 2 से 25 वर्ष के बीच है।
  • दतिया (आगोरा गांव): यहां 8 में से 3 मरीज पॉजिटिव मिले हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि यहां संक्रमितों की आयु सीमा 0 से 40 वर्ष तक है।
  • शिवपुरी (गुदर गांव): खनियाधाना क्षेत्र में 5 में से 3 केस पॉजिटिव आए हैं (उम्र 4 से 15 वर्ष)।   
  • अलीराजपुर (कांडा-चुलिया): जोबट क्षेत्र में 6 में से 1 केस पॉजिटिव मिला है।

संक्रमण फैलने का मुख्य कारण 'टीकाकरण में चूक'

खसरे के दोबारा उभरने के पीछे दो प्रमुख कारण हैं।

  • विमुक्त और घुमक्कड़ समुदायों के लगातार स्थान बदलने के कारण बच्चों का नियमित टीकाकरण चक्र टूट जाता है।   
  • महामारी के दौरान स्वास्थ्य सेवाओं के प्रभावित होने से कई बच्चे वैक्सीन की अनिवार्य डोज से वंचित रह गए थे।
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बच्चों के लिए जानलेवा हो सकता है खसरा

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, खसरा न केवल श्वसन तंत्र पर हमला करता है, बल्कि बच्चों में अंधेपन (Blindness) का भी एक बड़ा कारण है। दुनिया भर में हर साल करीब 60 हजार बच्चे इसके कारण अपनी आंखों की रोशनी खो देते हैं।

प्रमुख लक्षण और जटिलताएं

  •     तेज बुखार, खांसी और शरीर पर लाल चकत्ते।
  •     उल्टी, डायरिया और गंभीर डिहाइड्रेशन।
  •     जटिल मामलों में निमोनिया और मस्तिष्क में सूजन (Encephalitis)

बचाव और सरकारी प्रयास    

  • नेशनल हेल्थ मिशन (NHM) और स्वास्थ्य संचालनालय ने प्रभावित क्षेत्रों में निगरानी और घर-घर सर्वे शुरू कर दिया है
  • मरीजों को लक्षणों के आधार पर दवाइयां और विटामिन-ए सॉल्यूशन दिया जा रहा है। विटामिन-ए की दो डोज संक्रमण की गंभीरता को कम करने में सहायक होती हैं
  • विशेषज्ञों का कहना है कि मीजल्स-रुबेला (MR) वैक्सीन की दोनों डोज समय पर लगवाना ही इससे बचने का एकमात्र प्रभावी तरीका है।   
  • ग्रामीणों और शिक्षकों को सलाह दी गई है कि संक्रमित मरीज को अलग (Isolate) रखें और साफ-सफाई व पोषण का विशेष ध्यान दें।

 

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