धर्म-कर्म

17 दिसंबर 2025 को क्या है शुभ मुहूर्त, राहुकाल और आज का धार्मिक महत्व

By Manish Kumar|17 Dec 2025, 7:59 AM
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आज हम आपको 17 दिसंबर 2025, बुधवार के पंचांग और इस दिन के धार्मिक व ज्योतिषीय महत्व की पूरी जानकारी देने जा रहे हैं। अगर आप पूजा-पाठ, व्रत, दान या कोई शुभ कार्य करने की योजना बना रहे हैं, तो यह खबर आपके लिए बेहद उपयोगी है।

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सबसे पहले बात करते हैं आज के दिन के महत्व की।
17 दिसंबर 2025 का दिन धार्मिक और आध्यात्मिक दृष्टि से काफी शुभ माना गया है। मान्यता है कि इस तिथि पर किए गए पूजा-पाठ, मंत्र-जप और दान-पुण्य से जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। घर-परिवार में सुख, शांति और संतुलन बना रहता है। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, आज की भक्ति और साधना मन को स्थिरता देती है और मानसिक तनाव को कम करने में सहायक होती है।

अब जानते हैं कि 17 दिसंबर 2025 को क्या विशेष है
आज कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि है। यह तिथि विशेष रूप से भगवान शिव की आराधना के लिए शुभ मानी जाती है। पौष मास चल रहा है, और शास्त्रों में पौष मास को देव-पूजन, जप-तप और दान के लिए अत्यंत फलदायी बताया गया है।
ज्योतिष के अनुसार, आज सूर्य धनु राशि में और चंद्रमा तुला राशि में स्थित रहेंगे। इस ग्रह स्थिति से दिन के प्रभाव में संतुलन, संयम और सकारात्मक सोच बनी रहती है। यह समय आत्मचिंतन और आध्यात्मिक प्रगति के लिए अनुकूल माना जाता है।

अब बात करते हैं आज के शुभ और अशुभ समय की।
अगर आप कोई शुभ कार्य करना चाहते हैं, तो अभिजीत मुहूर्त आज 11:34 बजे से 12:16 बजे तक रहेगा।
वहीं राहुकाल रहेगा 11:55 बजे से 1:14 बजे तक, इस दौरान नए कार्य शुरू करने से बचना चाहिए।
गुलिक काल सुबह 10:36 से 11:55 बजे तक और यमघण्टकाल 7:57 से 9:16 बजे तक रहेगा।

अब नजर डालते हैं सूर्योदय और सूर्यास्त के समय पर।
आज सूर्योदय सुबह 6:38 बजे और सूर्यास्त शाम 5:12 बजे होगा।
चंद्रोदय सुबह 4:11 बजे और चंद्रास्त दोपहर 2:56 बजे निर्धारित है।

अब आपको बताते हैं आज का पूरा पंचांग
आज कृष्ण पक्ष त्रयोदशी तिथि रहेगी, जो रात 2:33 बजे तक मान्य है।
विशाखा नक्षत्र आज शाम 5:12 बजे तक रहेगा।
सुकर्मा योग आज दोपहर 2:16 बजे तक बन रहा है, जिसे शुभ योग माना जाता है।
गर करण आज दोपहर 1:15 बजे तक रहेगा।
अमांत मास मृगशिरा और पूर्णिमांत मास पौष है।
विक्रम संवत 2082 (कालयुक्त) और शक संवत 1947 (विश्ववासु) चल रहा है।
आज दिशाशूल उत्तर दिशा में है, इसलिए उत्तर दिशा की यात्रा से बचना बेहतर रहेगा।

अब बात करते हैं पूजा, व्रत और धार्मिक महत्व की।
हालांकि आज कोई बड़ा पर्व नहीं है, लेकिन त्रयोदशी तिथि भगवान शिव की उपासना के लिए विशेष मानी जाती है।
आज शिव पूजा करने से नकारात्मक ऊर्जा का शमन होता है और मनोकामनाएं पूर्ण होने की मान्यता है।
सुकर्मा योग के कारण आज किए गए शुभ कार्यों का अच्छा फल मिलता है। पौष मास में दान करने से पुण्य कई गुना बढ़ जाता है।

अब जानते हैं सरल पूजा विधि
सुबह स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
भगवान शिव को जल, बिल्वपत्र, धूप और दीप अर्पित करें।
ॐ नमः शिवाय” मंत्र का जाप करें।
संध्या समय दीपदान करना अत्यंत शुभ माना गया है।

अंत में निष्कर्ष के रूप में कहें तो,
17 दिसंबर 2025 का दिन शांत, संतुलित और आध्यात्मिक रूप से सकारात्मक ऊर्जा से भरपूर है। त्रयोदशी तिथि, विशाखा नक्षत्र और सुकर्मा योग इस दिन को पूजा, ध्यान, मनन और दान के लिए विशेष रूप से शुभ बनाते हैं।

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