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राजस्थान में टेंडर घोटाले की परतें खुलीं, ACB की पूछताछ में सामने आए विदेश कनेक्शन

By Admin|08 May 2026, 9:31 PM
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 जयपुर

राजस्थान की पूर्व कांग्रेस सरकार के दौरान हुए 960 करोड़ रुपये के बहुचर्चित जल जीवन मिशन (JJM) घोटाले में एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) की कार्रवाई तेज हो गई है. दिल्ली से पूर्व रिटायर्ड IAS सुबोध अग्रवाल की गिरफ्तारी के बाद, अब पूर्व मंत्री महेश जोशी एसीबी की गिरफ्त में हैं और 5 दिन की पुलिस रिमांड पर हैं. एसीबी की पूछताछ में इस घोटाले के तार विदेश तक जुड़ते नजर आ रहे हैं. सबसे बड़ा खुलासा यह हुआ है कि इस पूरे खेल का मास्टरमाइंड और मुख्य दलाल संजय बड़ाया (Sanjay Badaya) गिरफ्तारी के डर से थाईलैंड भाग गया है.

संजय बड़ाया क्या करता था?
सूत्रों के मुताबिक, संजय बड़ाया इस पूरे घोटाले की अहम कड़ी है. वह पूर्व मंत्री महेश जोशी और रिटायर्ड IAS सुबोध अग्रवाल, दोनों का बेहद करीबी माना जाता है. एसीबी की जांच में सामने आया है कि बड़ाया के जिम्मे पैसों के लेन-देन का प्रबंधन करना, अधिकारियों की ट्रांसफर-पोस्टिंग में दलाली खाना, अपने चहेते लोगों को PWD विभाग में लगवाना और टेंडर प्रक्रिया में गड़बड़ी करवाकर ठेके दिलवाना जैसे काम थे. एसीबी की टीम को भनक लगने से पहले ही वह एक शादी में शामिल होने के बहाने थाईलैंड भाग गया. अब एसीबी उसके भारत लौटते ही उसे गिरफ्तार करने की तैयारी में है.

कैसे हुआ 960 करोड़ का फर्जीवाड़ा?
साल 2023 में दर्ज हुए इस मुकदमे में जांच एजेंसियों ने पाया कि मंत्री रहते हुए महेश जोशी ने टेंडर प्रक्रिया में जमकर नियमों की धज्जियां उड़ाईं. 'मैसर्स गणपति ट्यूबवेल' और 'मैसर्स श्री श्याम ट्यूबवेल' को नियमों के विपरीत जाकर करोड़ों के टेंडर बांटे गए. इन दोनों कंपनियों ने इरकॉन इंटरनेशनल (Ircon International) के फर्जी सर्टिफिकेट लगाकर गैर-कानूनी तरीके से ये टेंडर हासिल किए थे. एसीबी इन दोनों कंपनियों के मालिकों सहित अब तक 11 आरोपियों को सलाखों के पीछे भेज चुकी है.

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महेश जोशी से ACB पूछ रही ये सवाल
एसीबी के डीजी गोविंद गुप्ता के अनुसार, महेश जोशी से गहन पूछताछ जारी है. एसीबी की टीम मुख्य रूप से इन तीन सवालों के जवाब तलाश रही है. पहला सवाल- घोटाले का पैसा कहां गया और उसे कहां ठिकाने लगाया गया है? दूसरा सवाल- टेंडर प्रक्रिया में किस प्रकार की शिकायतें थीं और पद का दुरुपयोग कैसे किया गया? तीसरा सवाल- संजय बड़ाया और अन्य फरार आरोपियों के साथ वित्तीय लेन-देन की क्या व्यवस्था थी?

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